ओलंपिक गेम्स में पदक जीतकर साइखोम मीराबाई चानू ने देश का नाम ऊंचा कर दिया है और उनका देश में भव्य स्वागत भी हुआ है। हो भी क्यों न मीराबाई चानू ने जिस तरह से मेहनत कर ये मुकाम हासिल किया है वो तारीफ के काबिल है। ओलंपिक गेम्स में भारत की पदक जीतने की कोशिश हमेशा रही है, लेकिन सिर्फ कुछ चुनिंदा खिलाड़ी ही इस कोशिश को पूरा कर पाए हैं। पीवी सिंधु और लोवोलीना बोरघम ने भी ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रौशन किया है।

ओलंपिक गेम्स को पूरी दुनिया के सबसे अनोखे गेम्स के रूप में माना जाता है। वर्ल्ड चैम्पियनशिप्स से परे यहां लगभग हर खेल को जगह दी जाती है। ये खेल इतने बड़े स्तर पर होते हैं कि कुछ 205 अलग-अलग टीम्स बनाई गई हैं जो अलग-अलग देशों से हैं। जरा रुकिए, 205... जैसा कि सभी जानते हैं कि आधिकारिक तौर पर दुनिया भर में सिर्फ 193 यूनाइटेड नेशन्स द्वारा मान्यता प्राप्त देश हैं फिर 205 टीम्स कैसे आईं? 

तो चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं कि आखिर इन टीम्स का क्या चक्कर है। 

olympics  and tokyo

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दुनिया में हैं केवल 193 देश-

दुनिया भर में केवल 192 देश ही हैं और 2 इंडिपेंडेंट स्टेट्स। इनमें से 193 तो यूनाइटेड नेशन्स के मेंबर्स हैं और अन्य दो देश नॉन-मेंबर्स के तौर पर मौजूद हैं। ये दो देश हैं होली सी (The state of holy see) और स्टेट ऑफ पेलेस्टाइन (State of Palestine)

इस हिसाब से अगर देखा जाए तो ओलंपिक्स में सिर्फ 195 देशों को ही हिस्सा लेना चाहिए था, लेकिन फिर भी टोक्यो ओलंपिक्स 2020 में 205 टीमें हिस्सा ले रही हैं। इसके पीछे का रहस्य जानने के लिए हमें ये पता करना होगा कि आखिर ओलंपिक में टीम भेजने का सिस्टम क्या है?

कैसे भेजी जाती हैं ओलंपिक गेम्स में टीम?

ओलंपिक गेम्स में टीम भेजने के लिए एक देश को नेशनल ओलंपिक कमेटी का हिस्सा होना पड़ता है। इस कमेटी को मान्यता अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी (IOC) देती है। आपको बता दें कि इस साल कोरोना महामारी होने के कारण नॉर्थ कोरिया ओलंपिक गेम्स का हिस्सा नहीं है और उस देश ने अपने खिलाड़ियों को नहीं भेजा है। नॉर्थ कोरिया को मिलाकर कुल ऐसी 206 कमेटी हैं जो ओलंपिक गेम्स का हिस्सा बन सकती हैं। 

अगर नॉर्थ कोरिया को हटा भी दिया जाए तो भी कई ऐसी टीम्स बचती हैं जिन्हें ओलंपिक का हिस्सा नहीं होना था फिर ऐसा क्यों? 

इसके पीछे ओलंपिक के संस्थापक Pierre de Coubertin का हाथ है जिनको लगता था कि देश और राजनीति खिलाड़ी से अलग होते हैं और इसलिए अगर कोई संस्था अपने खिलाड़ियों को इन गेम्स का हिस्सा बनाना चाहती है तो उसे पहले अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी से मान्यता लेनी होगी।

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क्यों नहीं माने जाते हैं ये देश? 

आपने कुछ दिनों पहले हांगकांग का विवाद तो देखा ही होगा। उसके नियमों में बदलाव करने और अलग देश घोषित करने को लेकर काफी विवाद हुआ था। उसे यूनाइटेड नेशन्स ने मान्यता नहीं दी है। ऐसे ही फिलिस्तीन, कोसोवा और ताइवान में भी भू-विवाद के चलते अभी अलग देश होने की मान्यता नहीं मिली है।  

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इसी के साथ, इस बार ओलंपिक्स में रिफ्यूजी टीम भी हिस्सा ले रही है। ऊपर उन देशों की लिस्ट दी गई है जो यूएन का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन ओलंपिक्स का हैं।  

इस टीम की स्थापना जून 2021 में ही हुई है और 12 देशों से 56 रिफ्यूजी एथलीट्स इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इस तरह से कुल 205 टीमों ने ओलंपिक्स में अपनी जगह बनाई है।  

olympic team details

इस लिस्ट में दिए गए नाम स्वतंत्र राष्ट्र के नाम से घोषित किए गए हैं और ओलंपिक्स का हिस्सा हैं। ऐसे में देखा जाए तो ओलंपिक गेम्स में टीम्स अपने-अपने देश के साथ-साथ अपनी-अपनी कम्यूनिटी को भी रिप्रेजेंट कर रही हैं।  

तो अब अगर कोई आपसे पूछे कि ओलंपिक गेम्स में कितनी टीमें हैं तो आपको उसका जवाब सही-सही पता होगा। इन सभी टीम्स की डिटेल्स आप Tokyo Olympics 2020 की वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।   

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