माधुरी दीक्षित बॉलीवुड की बेहतरीन डांसर्स में शुमार रही हैं। चाहें माधुरी का आईकॉनिक सॉन्ग 'एक तो तीन' हो या 'फिर मेरा पिया घर आया', 'तम्मा तम्मा' या फिर 'देवदास' का 'डोला रे डोला', माधुरी ने हमेशा अपनी डांसिंग स्किल्स से लोगों को दीवाना बनाया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि महज 3 साल की उम्र में उन्होंने कथक सीखना शुरू कर दिया था। जब माधुरी 8 साल की थीं, तो उन्होंने स्टेज पर परफॉर्म किया था। अपनी मम्मी स्नेहलता दीक्षित की इंस्पिरेशन से उन्होंने हमेशा डांस में बेस्ट परफॉर्मेंस देने की कोशिश की। माधुरी की मां स्नेहलता ने जब माधुरी के साथ डीडी को एक इंटरव्यू दिया था, तो उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि उनके समय में डांस सीखना अच्छा नहीं माना जाता था, जबकि उन्हें डांस सीखने का मन था और उन्होंने अपनी ख्वाहिशें अपनी बेटी के जरिए पूरी कीं।  माधुरी दीक्षित ने ना सिर्फ खुद कथक सीखा, बल्कि अपनी बड़ी बहन को भी इसमें ट्रेन किया। 

बेहतरीन डांस से बदली लोगों की सोच

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माधुरी दीक्षित का गाना 'एक दो तीन' अपने समय के सबसे बड़े हिट्स में शुमार किया जाता है। इस गाने ने लोगों को खूब एंटरटेन किया है। माधुरी ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में यह बताया था कि इस गाने के लिए लोग हॉल में दोबारा बजाए जाने की रिक्वेस्ट करते थे और स्क्रीन के आगे पैसे भी फेंकते थे। माधुरी दीक्षित ने अपने डांसिंग टैलेंट से लोगों को स्टीरियोटाइप सोच बदली। उनसे पहले तक डांसिंग को बहुत अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था, खासतौर पर फिल्मी डांस को उतनी अहमियत नहीं मिली थी, लेकिन माधुरी दीक्षित ने लोगों को अपने डांस स्टेप्स पर थिरकने को मजबूर कर दिया। माधुरी ने लोगों की सोच को प्रोग्रेसिव बनाने में मदद की। आज के दौर की बहुत सी एक्ट्रेसेस ने माधुरी दीक्षित से ही इंस्पायर होकर डांस की ट्रेनिंग ली और अपने करियर में सफलता हासिल की। माधुरी दीक्षित ने डीडी को दिए अपने एक इंटरव्यू में बताय था, 'फिल्म में डांसिंग पूरी तरह से अलग होती है। यह अलग टेक्नीक है। इसमें लोक नृत्य और क्लासिकल या इसमें लोक नृत्य के साथ वेस्टर्न डांस का फ्यूशन किया जाता है। यह क्लासिकल डांस से बहुत अलग होता है। 

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डांस में आंखों की बड़ी अहमियत

 
 
 
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Одну из крошечных ролей ей дал режиссёр Субхаш Гхаи в фильме «Карма» (1986). Кроме того, он поместил рекламу Мадхури в ряде журналов, заявив, что Бони Капур, Яш Чопра и ещё полдюжины ведущих кинопроизводителей подписали с ней контракт, чего не было и в помине. Мадхури снялась в ещё одном фильме этого режиссёра «Рам и Лакхан» (1988), который обещал стать её первым хитом. Но актриса сумела покорить публику чуть раньше, сыграв в фильме «Жгучая страсть» Н. Чандры. «Жгучая страсть», а не «Рам и Лакхан» круто повернул карьеру актрисы. И теперь акулы Болливуда действительно обратили внимание на талантливую девушку. 1990-е годы стали самым счастливым периодом в карьере Мадхури. В 1990 году вышел фильм «Сердце», принесший ей первую Filmfare Award за лучшую женскую роль. Дуэт с режиссёром Индрой Кумаром стал для неё счастливым — их совместные фильмы «Сын» (1991), принесший вторую Filmfare Awards, и «Принц Раджа» (1995) стали хитами. После «Раджи», фильма далеко не идеального и спасенного лишь Мадхури, она получила прозвище «Женщина Амитабх Баччан». А в 1994 году вышел фильм «Кто я для тебя?», долгое время остававшийся самым большим блокбастером индийского кино. Он принес ей ещё одну Filmfare Award. #биографиямадхури #madhuridixit #tezab#ramlakhan#beta#raaja#dil#HAHK#мадхуридикшит

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माधुरी दीक्षित के ज्यादातर हिट गानों में उनकी आंखें बहुत एक्सप्रेसिव नजर आईं हैं। माधुरी का मानना है कि डांस में आंखें अहम रोल अदा करती हैं। डीडी से हुई एक पुरानी बातचीत में उन्होंने इस बात का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, 'दर्शकों के बीच मौजूद होने के साथ उन्हें सामने से देखना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। स्टेज पर आंखों से ही डेफिनेट लुक मिलता है। ऑडियंस से आई कॉन्टेक्ट होने पर ही उन्हें फील होता है कि उनके साथ कनेक्ट हो पा रहे हैं। फिल्मों में यह चीज आंखों के क्लोज शॉट्स दिखाकर की जाती है, लेकिन स्टेज पर ऑडियंस से आई कॉन्टेक्ट होना बहुत जरूरी है।'

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मुश्किल डांस स्टेप्स भी आसानी से किए परफॉर्म

 

माधुरी दीक्षित का डांस आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, क्योंकि उनके डांस में परफेक्शन नजर आता है। चाहें कितने भी मुश्किल स्टेप्स हों, माधुरी उन्हें बड़ी सहजता से परफॉर्म करती नजर आती हैं, उस पर उनकी स्माइल लोगों को दीवाना बना देती है। माधुरी दीक्षित पर फिल्माए कई गानों की कोरियोग्राफी सरोज खान ने की थी और वह भी माधुरी की डांसिंग स्किल्स की फैन रही हैं। उन्होंने डीडी के इंटरव्यू में माधुरी की तारीफ करते हुए कहा था, 'माधुरी दीक्षित कथक की ट्रेंड डांसर हैं, इसीलिए वह बहुत नापतोल कर डांस करती हैं। उनका फेस बहुत एक्सप्रेसिव है।'

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खलनायक के इस गाने को माधुरी ने बनाया एक्सप्रेसिव

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हर गाने को खूबसूरती से पर्दे पर दिखाने के लिए माधुरी दीक्षित काफी मेहनत करती थीं। खलनायक का चर्चित गाना 'चोली के पीछे' भी ऐसे ही गानों में शुमार था, जिसमें माधुरी को डांसिंग के साथ एक्सप्रेशन्स भी जाहिर करने थे। माधुरी दीक्षित ने अपने पुराने इंटरव्यू में बताया, 'इस गाने में एक लाइन थी 'रेशम का लहंगा मेरा', जिस पर मुझे एक पैर पर डांस करना था, उसमें सर्कुलर मूवमेंट थे, हाथ भी सर्कुल मूवमेंट में थे, उसके साथ कमर भी घूम रही थी और उसके साथ एक्सप्रेशन्स भी देने थे। यह थोड़ा मुश्किल था।'

तम्मा-तम्मा था सबसे मुश्किल गानों में से एक

 
 
 
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Freaking ICONIC ! Old is gold✨ |🎥Thanedaar |

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माधुरी दीक्षित का फिल्म 'थानेदार' का संजय दत्त के साथ फिल्माया गया गाना 'तम्मा तम्मा' भी जबरदस्त हिट रहा था। इस गाने की कोरियोग्राफी को आज भी याद किया जाता है। लेकिन इस गाने में परफेक्ट शॉट के लिए माधुरी ने काफी मुश्किल उठाई थीं। उन्होंने अपनी शूटिंग में बारे में मीडिया को दिए इंटरव्यू में बताया,

'इन गाने में सरोज खान जी ने एक चेयर की मूवमेंट बोली। लेकिन जैनेट जैक्सन से इंस्पायर्ड जिन कुर्सियों की बात हुई थी, उनमें पहिए लगे होते थे और उन्हें स्लाइड करना आसान होता था। वैसी चेयर्स यहां कहां से लाते। गाने के लिए पहले जो चेयर बने, वो काफी हैवी थे, उन्हें लिफ्ट करना और उन पर से कूदना मुश्किल था। इसके बाद केन के चेयर्स थे। हमें उस पर बैठकर उसे स्लाइड करना था, फिर घुटनों पर बैठकर दोबारा खड़े होकर चेयर को खड़ा करके डांस करना था। हम चार लोग थे उसमें और चारों को सही स्टेप करने की जरूरत थी परफेक्ट शॉट के लिए। ये काफी मुश्किल था। इस गाने में इसी शॉट के सबसे ज्यादा टेक्स लिए गए, लगभग 30 रीटेक हुए।'

बार-बार रीटेक से माधुरी के पैर लहूलुहान हो गए थे, लेकिन फिर भी जब तक परफेक्ट शॉट नहीं मिला, उन्होंने हार नहीं मानी। गाने में माधुरी दीक्षित की मेहनत साफ झलकती है। 

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Image Courtesy: Instagram(@madhuridixitnene)