हम हफ्ते भर ऑफिस इसलिए जाते है क्‍योंकि हमें ऑफिस जाना ही है। हम हफ्ते भर सिर्फ इसलिए काम करते हैं क्योंकि हमें काम करना है। क्या कोई और वजह है हमारे पास, शायद नहीं। कोई रोमांच, कोई उत्साह, कोई खुशी नहीं, नौकरी है इसलिए काम करना है। यही तो वजह है कि शुक्रवार आते-आते हम थका हुआ महसूस करते हैं और वीकएंड, वह तो हमें आबे-ज़म ज़म सा लगता है, यानि बेहद राहत भरा। हम सभी छुट्टी के इंतजार में पूरा वीक निकाल देते है। मगर फिर आता है सोमवार यानि ब्लडी मंडे। जो किसी विलेन की तरह दिखता है। जो चला आता है आपको परेशान करने के लिए। आपको काम और थकान की उसी चक्की में दोबारा पीसने के लिए।

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सोमवार यानि ब्लडी मंडे हफ्ते का और आपके शारीरिक-मानसिक 'दमन-चक्र' का पहला दिन होता है। ऐसे में एक सवाल जो हमारे जहन में आता है वह है जिंदगी में वैसे मुश्किलें कम थी जो भगवान ने मंडे बना दिया। सोमवार मतलब काम पर लौटने का दिन। सोमवार को लेकर सबके दिमाग में बड़े अलग अलग विचार आते है। हम मंडे को लोगों के दिमाग में आने वाली ऐसी ही कुछ 9 बातों को आपको बता रहे हैं।

  • मंडे को ज्‍यादातर लोगों को सुबह उठना पसंद नहीं होता है। उन्‍हें ऐसा लगता है कि वो कोई मशीन है जो 9 से 5 काम कर रही है।
  • सोमवार को हमारे दिल में यह ख्‍याल भी आता है कि हम यह जॉब कर ही क्यों रहे हैं।
  • मंडे आने के बाद लोगों को यह अहसास होता है कि उन्‍होंने वीकेंड को ऐसे ही बर्बाद कर दिया।

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  • सोमवार से लेकर अगले पांच दिनों तक दिन गिनाने का काम शुरू हो जाता है कि प्यारा संडे अब आएगा। पहले ही दिन से रूटीन से बोरियत होने लगती है।
  • मंडे को जॉब से जुड़े सारे तनाव एक साथ दिमाग में आते है और जॉब बदलने या छोड़ने का दिल करता है।
  • सोमवार को ज्‍यादातर लोग ट्रैफिक जाम से परेशान रहते है और ऑफिस के पहले दिन ही झलाहट का अनुभव करते हैं।

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  • मंडे को हमें सबसे ज्‍यादा यह फील होता है कि हम काम ज्‍यादा करते है लेकिन हमें सैलरी कम मिलती है।

इंसान का नेचर होता है की वो एक ही रूटीन से उब जाता है। लेकिन इस तरह के विचारों को हम नेगेटिव नहीं कह सकते। बल्कि ऐसे विचार एक जैसी रूटीन में रहने कारण सबके दिमाग में आती है।