सेक्शु्अल असॉल्ट या यौन शोषण एक ऐसा सच है जिसे शायद कई लोग आम बात मान चुके हैं। हमारे आस-पास ही न जाने कितने लोग होंगे जो सेक्शुअल असॉल्ट के सर्वाइवर्स हैं और उन्हें ये समाज चुप रहने को कहता है। इस समस्या का हल निकालने के लिए न जाने कितने लोग काम करते हैं। सोशल मीडिया इन दिनों एक एक्टिव प्लेटफॉर्म बन गया है जो कई ऐसे लोगों तक मदद पहुंचा सकता है जो खुद किसी न किसी वजह से ये पीड़ा भोग रहे हैं और परेशान हो रहे हैं। इसी कड़ी में वारिणी गुप्ता और चैती माहेश्वरी ने मिलकर VOWS की शुरुआत की है जो सेक्शुअल असॉल्ट के प्रति जागरुकता फैलाने का काम कर रहा है। 

इस इंस्टाग्राम अकाउंट का नाम है VOWS.sg (Voices of Women in Solidarity) इस अकाउंट में उस मुद्दे पर बात अब की जा रही है जो सालों पहले शुरू हो जाना था। इस अकाउंट के विषय में और इसके काम के विषय में हमने वारिणी गुप्ता और चैती माहेश्वरी से बात की और इस बारे में और जानने की कोशिश की। 

क्या है VOWS?

VOWS एक अभियान है जिसे सेक्शुअल असॉल्ट के खिलाफ जागरुकता फैलाने के लिए शुरू किया गया है। इसे एक सुरक्षित जगह की तरह माना जाना चाहिए जिसमें कोई भी अपने एक्सपीरियंस को बता सकता है और मदद पा सकता है। दुनिया अराजकता से भरी हुई है और इसी बीच कई ऐसी आवाज़ें होती हैं जो अनसुनी रह जाती हैं। शायद आपके सामने भी ऐसे कई किस्से आए होंगे जिनके बारे में कभी किसी को बताया ही न गया हो। VOWS की शुरुआत इसीलिए की गई है कि वो महिलाओं के हितों के लिए काम कर सके। ये सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि सिंगापुर और दुनिया भर में इस अभियान को फैलाना चाहता है। सबसे पहले तो VOWS की शुरुआत एक ऐसे प्लेटफॉर्म के तौर पर की गई है जहां महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर अपनी आवाज़ उठा सकें।  

लोग कैसे जुड़ेंगे इस मुहिम से?

VOWS ने अपनी पहचान बनानी शुरू की है और कई लोगों ने इसके फाउंडर्स से संपर्क भी किया है। इसके तहत जागरुकता फैलाई जाएगी और कई वर्चुअल मीडियम्स और सोशल मीडिया के तहत फ्री में टियर 2 शहरों में अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। इसी के साथ, इंटरनेट द्वारा फैलाई जा रही गलत जानकारी को लेकर भी जागरुकता फैलाई जाएगी। मौजूदा स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अभी ये काम थोड़ा धीमा है और सिर्फ ऑनलाइन ही इसकी पहुंच बनाई गई है, लेकिन धीरे-धीरे फाउंडर्स वारिणी और चैती लोगों से मिलजुलकर बातें करना शुरू करेंगे और सेमिनार्स भी किए जाएंगे। इस मुहिम के जरिए सर्वाइवर्स को सही रिसोर्स और मदद मिल जाएगी। इसी के साथ, इस संगठन का एक जागरुकता फैलाने वाला हिस्सा भी होगा जो लोगों तक अपनी बात पहुंचाएगा, कई महिला मंडलों और एनजीओ से जुड़ेगा और सर्वाइवर्स के लिए फंडरेजिंग भी की जाएगी। 

vows varini gupta

इसके बारे में बात करते हुए वारिणी गुप्ता ने कहा कि, 'जब हमने इसकी शुरुआत की तो छोटे शहरों के भारतीय पुरुषों से काफी नाराजगी मिली। उन्हें लगा कि सेक्शुअल असॉल्ट एलीट क्लास की प्रॉब्लम नहीं होती और हम ये एनजीओ आदि की शुरुआत सिर्फ पैसे बनाने के लिए करते हैं। ऐसे कई एक्सपीरियंस झेलने के बाद हमें लगा कि महिलाएं बंधंन में बंधने के लिए नहीं हैं और महिला हितों की बात को समाज ने बहुत गलत तरह से ले लिया है। हमारी अपनी पहचान है और आवाज़ है और हम इसे दृढ़ता से रखेंगे। हमें लगा कि VOWS का होना बहुत जरूरी है और हमने ये समझाने की कोशिश की कि ये बदलाव लाने का एक माध्यम है।'

वारिणी गुप्ता का कहना है कि, 'कोविड के कारण हमारा खास प्रोग्राम शुरू नहीं हो पाया है। जिन प्रोग्राम्स को हम VOWS में चला रहे हैं वो सभी साइकिएट्रिस्ट्स और एक्सपर्ट्स द्वारा अप्रूव किए गए हैं। इस बारे में हमने सोचा कि कई लोग इस फील्ड में एक्सपर्ट्स की सलाह अफोर्ड नहीं कर सकते हैं और उनके पास वो सुविधाएं नहीं होती हैं जो हमारे पास हैं। हम उन सुविधाओं को सर्वाइवर्स तक पहुंचाएंगे। जैसे ही हमें इंस्टाग्राम चैनल के जरिए कोई मैसेज आता है हम अपने एक्स्पर्ट्स से बात कर उनके मुद्दे को समझने की कोशिश करते हैं और सर्वाइवर्स के लिए सेफ्टी नेट तैयार करते हैं।'

VOWS की को-फाउंडर चैती ने इसके बारे में बात करते हुए विक्टिम ब्लेमिंग और सेक्स एजुकेशन से जुड़े मुद्दों पर भी बात की उनके हिसाब से, 'लड़कियों को ये नहीं सोचना चाहिए कि क्योंकि वो लड़कियां हैं इसलिए रेप, हिंसा उन्हें झेलनी ही पड़ेगी और ये उनके जेंडर का साइड इफेक्ट है। हम सेक्स एजुकेशन और कंसेंट को आम बनाना चाहते हैं। आज के दौर में जहां हाथरस रेप केस और न जाने कितनी ऐसी घटनाएं हो रही हैं और ऐसे मौके पर सेक्स एजुकेशन और कंसेंट की बात करना बहुत जरूरी है ताकि सर्वाइवर्स हमतक सुरक्षित तौर पर पहुंच पाएं।'

vows chaiti maheshwari

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जागरुकता फैलाने के लिए किस तरह के माध्यम चुने गए हैं?

इस समय जागरुकता के लिए इंस्टाग्राम अकाउंट पर ग्राफिक्स, सीरीज और वीडियोज पोस्ट किए जा रहे हैं। इसके अलावा, यूट्यूब पर वीडियोज डाले जा रहे हैं और स्कूल सर्विस ग्रुप की भी मदद ली जा रही है। VOWS के फाउंडर्स का कहना है कि वो अन्य संगठनों से जुड़ने और उनके साथ काम करने के बारे में सोच रहे हैं। 

पुरुषों के साथ भी होता है यौन शोषण-

VOWS के दोनों फाउंडर्स ने एक बहुत ही पते की बात कही है और वो ये कि पुरुषों के साथ भी सेक्शुअल असॉल्ट होता है और वो इसके बारे में चुप रह जाते हैं। उन्हें लगता है कि ये उनकी मर्दानगी को ठेस पहुंचा सकता है, लेकिन ये असल में पितृसत्ता के कारण होता है और VOWS उन्हें भी ये बताना चाहता है कि उन्हें अब चुप रहने की जरूरत नहीं है।  

भारत और सिंगापुर में चल रही है मुहिम- 

VOWS की मुहिम भारत और सिंगापुर दोनों में चल रही है। सिंगापुर एक बहुत समृद्ध देश है, लेकिन फिर भी वहां सेक्स ट्रैफिकिंग, घरेलू हिंसा और कई यौन शोषण के केस रिपोर्ट नहीं किए जाते हैं। इसके अलावा, सर्वाइवर्स के लिए किसी तरह का सेफ्टी नेट नहीं होता है। जहां तक भारत की बात है तो पितृसत्ता और रेप कल्चर बहुत आम है और समाज इसे आम बात मान चुका है। किसी ऐसी दुनिया में एक बेटी को लाना क्या सही है जहां हम खुद किसी ऐसे रिश्ते से निकल नहीं पा रहे हैं जहां हमारे साथ गलत हो रहा है।  

 VOWS के बारे में बात करते हुए फाउंडर चैती कहती हैं कि, 'महिलाएं भी लड़कियों को दोश देती हैं और कहती हैं कि जो भी हुआ है उसमें उनकी अपनी गलती है जिससे ये साफ जाहिर होता है कि महिलाओं के प्रति किस तरह की मानसिकता पितृसत्ता के कारण फैली हुई है। महिलाएं खुद ये कह चुकी हैं कि विक्टिम ब्लेमिंग नहीं होती जबकि ऐसा नहीं है। फेमिनिज्म को एक खराब शब्द की तरह देखा जाता है, हमारे आस-पास के लोग ही इसे गलत तरह से देखते हैं। VOWS में हम इसे सही तरह से समझाने की कोशिश करते हैं कि महिलाएं अपनी बढ़त दिखाने की नहीं बल्कि समानता का अधिकार पाने की कोशिश कर रही हैं।' 

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मौजूदा समय में क्या किया जा रहा है VOWS में- 

इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म @VOWS.sg एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो सर्वाइवर्स को अपनी कहानियां बताने की कोशिश कर रहा है। ये सेक्शुअल एब्यूज से जुड़ी कुंठाएं और मिथकों को तोड़ने की कोशिश कर रहा है। इसका अहम उद्देश्य है कि लोगों को जागरुक किया जाए और इसमें सोशल मीडिया बहुत अहम हिस्सा निभा सकता है।  

स्कूल की एक टीम इन मुद्दों से जुड़े वीडियो और इन्फोग्राफिक्स तैयार कर रही है। जहां पितृसत्ता, मानसिक तनाव, घरेलू हिंसा, यौन शोषण आदि मुद्दों पर बात हो रही है।  

क्या उद्देश्य है VOWS का-

VOWS एक छोटा प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि एक मुहिम बनना चाहता है जिससे जागरुकता फैले और जेंडर इक्वालिटी की बातें हों। लोगों का रेप और यौन शोषण को लेकर नजरिया बदले और लोग जागरुक हों, जहां कपड़ों को लेकर, कंसेंट को लेकर, बातें की जाएं और जो भी असामनता है वो खत्म हो। यहां सर्वाइवर्स के लिए एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है और एक्सपर्ट्स का इंटरव्यू लिया जा रहा है। VOWS के सभी थेरेपी रिसोर्सेज डॉक्टर्स द्वारा अप्रूव किए गए हैं।  

 

कौन बन सकता है इसका हिस्सा और कैसे करेंगे कॉन्टैक्ट? 

वैसे तो ये महिलाओं के खिलाफ हिंसा के क्षेत्र में काम करता है पर इससे कोई भी जुड़ सकता है जो इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहता है। भले ही वो किसी भी जेंडर, उम्र, धर्म या जाति का हो। असल मायने में बदलाव लाने के लिए ये जरूरी है कि सब एक साथ खड़े रहें।  

अगर कोई VOWS से जुड़ना चाहे तो इंस्टाग्राम पेज vows.sg से जुड़ सकता है या फिर ईमेल आईडी vows.sg@gmail.com के जरिए इसका हिस्सा बन सकता है।  

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