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रॉकेट ब्वॉयज: विक्रम साराभाई का लव ट्रायंगल जिसने बनवा दिया देश का सबसे बड़ा मैनेजमेंट कॉलेज

क्या आप जानते हैं कि भारत के सबसे चर्चित मैनेजमेंट कॉलेज IIM अहमदाबाद के बनने के पीछे की कहानी क्या है?   
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Published -10 Feb 2022, 10:05 ISTUpdated -10 Feb 2022, 10:20 IST
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how iim a was made

भूली बिसरी यादें कभी किसी की शख्सियत बना देती हैं तो कभी किसी के वो राज़ उजागर कर देती हैं जिनके बारे में शायद कोई सोच भी न पाए। आजकल बॉलीवुड और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री अलग-अलग बायोग्राफी पर काम कर रही है और इसी तरह भूली बिसरी यादों को पर्दे पर ला रही है। एथलीट्स, एक्टर, क्रिकेटर, साइंटिस्ट, आईपीएस आदि सभी को लेकर डॉक्यूमेंट्री बनाई जा रही हैं और थोड़ा सच और थोड़ा फिक्शन सामने लाने की कोशिश की जा रही है। ऐसी ही एक वेब सीरीज है रॉकेट ब्वॉयज जो लोगों को काफी पसंद आ रही है। 

रॉकेट ब्वॉयज वो डॉक्यूमेंट्री है जिसे लेकर बहुत सी बातें की जा रही हैं। देश के दो सबसे बड़े साइंटिस्ट डॉक्टर होमी जहांगीर भाभा और विक्रम साराभाई के जीवन के बारे में ये डॉक्यूमेंट्री बनाई गई है जो उनकी शादी, सक्सेस, दोस्ती और कई पहलुओं के बारे में बात करती है। हालांकि, अभी इस डॉक्यूमेंट्री का पहला सीजन ही रिलीज हुआ है जिसमें एक बहुत चर्चित लव ट्रायंगल का जिक्र नहीं किया गया है। 

ये कहानी है विक्रम साराभाई, उनकी पत्नी मृणालिनी साराभाई और मृणालिनी की दोस्त कमला चौधरी के बारे में। माना जाता है कि विक्रम साराभाई ने जिद में आकर प्रधानमंत्री को फोर्स किया था कि वो इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट का दूसरा कॉलेज यानी IIM अहमदाबाद में खोलें। 

sarabhai and his family

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कौन थे विक्रम साराभाई?

विक्रम साराभाई का जन्म सन 1919 में हुआ था और वो गुजरात के एक धनी परिवार में पैदा हुए थे। माना जाता है कि उनके जन्म के बाद पंडितों ने ये कहा था कि विक्रम साराभाई के सितारे बहुत बुलंद हैं। ये सच भी साबित हुआ क्योंकि विक्रम साराभाई वो इंसान बन गए जिन्हें कई सालों तक याद किया जाएगा और जो भारत के वैज्ञानिक विकास की नींव रख चुके थे। गुजरात कॉलेज से पढ़ने के बाद उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अपनी डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। 

sarabhai vikram and his family

यहीं उन्होंने कॉस्मिक रेज की पढ़ाई की और भारत को जिस साल आजादी मिली उसी साल उन्होंने फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी अहमदाबाद में स्थापित की। इसके बाद यहीं स्पेस एप्लीकेशन सेंटर की स्थापना हुई जिसे भारत की शान भारतीय स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) की नींव माना जाता है। विक्रम साराभाई को पद्म भूषण और पद्म विभूषण दोनों से सम्मानित किया गया।  

विक्रम साराभाई और मृणालिनी साराभाई का प्यार 

विक्रम साराभाई और उनकी पत्नी मृणालिनी साराभाई की जिंदगी बहुत ही हसीन रही थी। दोनों की लव स्टोरी भी बहुत ही स्वीट थी। साराभाई अहमदाबाद से ऊटी ट्रैवल कर रहे थे जब उन्होंने आराम करने के लिए मद्रास (तत्कालीन नाम) के बैरिस्टर सुब्बारामा स्वामीनाथन के घर ठहरने का फैसला किया।  

mrinalini sarabhai and kids

यहीं वो पहली बार मृणालिनी से मिले थे और उन्हें पहली ही नजर में प्यार हो गया था। इसके बाद दोनों कुछ सालों बाद 1941 में मिले जहां दोनों ही अपने-अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने आए थे। इसका जिक्र मृणालिनी साराभाई की बायोग्राफी में किया गया है।  

दोनों की बातें होने लगीं और विक्रम मृणालिनी के डांस को देखने जाने लगे। 1942 में ही दोनों ने शादी कर ली और दोनों ही अपनी जिंदगी में मशरूफ हो गए। मृणालिनी को भारत और विदेशों में डांस आइकन की तरह जाना जाता था और विक्रम साराभाई तो थे ही स्पेस जीनियस।  

इन दोनों के दो बच्चे हुए बेटा कार्तिकेय और बेटी मल्लिका। दोनों की जिंदगी में तब तक सब कुछ अच्छा चलता रहा जब तक मृणालिनी की दोस्त कमला चौधरी उनकी जिंदगी में नहीं आई थीं।  

कमला चौधरी और विक्रम साराभाई की कहानी 

मृणालिनी साराभाई की सबसे करीबी सहेलियों में से एक थीं कमला चौधरी। कमला चौधरी के पति जो एक भारतीय सिविल सर्वेंट खेम चौधरी की पत्नी थीं उनकी जिंदगी में अचानक दुर्घटना हुई थी। 1940 के दशक में ही उनके पति जो लाहौर में पोस्टेड थे उन्हें किसी ने गोली मार दी थी। इसके बाद कमला यूएसए चली गईं और सोशल साइकोलॉजी में एम.ए. किया।  

kamala chaudhary and vikram sarabhai

जब कमला वापस भारत आईं तो मृणालिनी ने किसी तरह अपनी सबसे अच्छी सहेली को अपने साथ रहने के लिए बुला लिया। ये वो समय था जब विक्रम साराभाई भारत के पहले टेक्सटाइल रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओपनिंग में व्यस्त थे। मृणालिनी ने अपने पति को कहा कि वो कमला को नौकरी पर रखें और कमला का इंटरव्यू करवाया। उन्हें कमला की प्रोफाइल काफी पसंद आई और उन्होंने कमला को इसी इंस्टीट्यूट में नौकरी पर रख लिया।  

जहां एक ओर मृणालिनी अक्सर अपने काम के सिलसिले में बाहर रहा करती थीं वहीं कमला और विक्रम अक्सर इंस्टिट्यूट में मिला करते थे। इसका नतीजा था एक ऐसी लव स्टोरी जो कभी पूरी नहीं हो पाई।  

kamla chaudhary

जब कमला को पता चला कि वो मृणालिनी और विक्रम के बीच आ गई हैं तो उन्होंने अपनी नौकरी और अहमदाबाद हमेशा के लिए छोड़ने का फैसला किया। विक्रम कमला को मनाने की लाख कोशिश की और कहा कि कम से कम वो शहर न छोड़ें, लेकिन वो नहीं मानीं।  

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तो इस तरह अहमदाबाद में बना IIM-A 

हालांकि, इस बारे में विक्रम साराभाई की बेटी मल्लिका साराभाई ने IIM-A को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा था कि उनकी और उनके पिता की बॉन्डिंग सिर्फ इस अफेयर के कारण खराब थी। मल्लिका के अनुसार विक्रम साराभाई ने उनकी मां मृणालिनी को बहुत दुख दिया था। हालांकि, बाद में उनका रिश्ता थोड़ा ठीक हुआ, लेकिन वो कभी उस तरह से अपने पिता से बात नहीं कर पाईं जिस तरह से करनी चाहिए थी।  

जहां बात विक्रम साराभाई के कमला चौधरी को मनाने की थी तो उन्होंने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। जब कमला नहीं मानीं तो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से कहा कि वो अगला आईआईएम अहमदाबाद में खोलें।  (कैट एग्जाम की टॉपर की कहानी)

sarabhai and jawaharlal nehru

उसी समय विक्रम ने कमला को इस संस्थान का रिसर्च डायरेक्टर अपॉइंट करने की बात की। जब ये फैसला हो गया तो कमला चौधरी को अहमदाबाद में ही रुकना पड़ा।  

इस बारे में कमला चौधरी के भतीजे सुधीर कक्कड़ ने अपनी किताब A book of Memory में जिक्र किया है और ये कहा है कि विक्रम और कमला का प्यार आखिरी सांस तक जीवित रहा था।  

आखिरी सांस तक विक्रम से प्यार करती रहीं मृणालिनी 

मृणालिनी साराभाई ने ये कहा था कि वो अपने पति से बहुत प्यार करती हैं और उनके दिल में विक्रम के लिए कोई नफरत नहीं है। वो चाहती थीं कि उनके पति को हमेशा जीनियस की तरह ही याद किया जाए। विक्रम सबसे ज्यादा इंटेलिजेंट इंसान थे जिनसे मृणालिनी अपनी पूरी जिंदगी में मिली थीं।  

तो ये थी कहानी विक्रम साराभाई, मृणालिनी साराभाई और कमला चौधरी की। विक्रम साराभाई को आज भी उसी जीनियस की तरह याद किया जाता है जिसने हिंदुस्तान को नया आयाम दिया। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। 

 
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