हर महिला चाहती है कि उसके पति की उम्र लंबी हो वह हमेशा स्‍वस्‍थ और सुरक्षित रहे। हिंदू धर्म में महिलाएं तो पति की लंबी उम्र के लिए कई व्रत और पूजा भी करती हैं। इन्‍हीं व्रतों में से एक है वट सावित्री व्रत। साल में एक बार आने वाले इस व्रत का हिंदू महिलाओं में विशेष महत्‍व है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्‍छी सेहत के लिए रखती हैं। 

उज्‍जैन के पंडित मनीष शर्मा जी के मुताबिक, ' वट एक देव वृक्ष है। इसके मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्‍य में भगवान विष्‍णु और अग्र भाग में देवों के देव महादेव विराजमान होतें हैं। देवी सावित्री भी इस वृक्ष में निवास करती हैं। हर वर्ष   ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी से शुरू हो कर अमावस्‍या तक इस व्रत को रखा जाता है। यह व्रत वास्‍तव में 3 दिन का होता है। मगर, यदि शरीर में क्षमता नहीं है तो महिलाएं केवल अमावस्‍या के दिन भी व्रत रख सकती हैं।'

आपको बता दें कि वट सावित्री के व्रत में महिलाएं वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। इस वर्ष यह त्‍योहार 22 मई को है। चलिए हम आपको इसका शुभ मुहूर्त बताते हैं। 

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Somvati Amavasya  Shubh Muhurat

शुभ मुहूर्त 

इस वर्ष अमावस्‍या 21 मई की रात 9:40 पर लग जाएगी। यानी आपका व्रत भी 21 मई की रात से ही शुरू हो जाएगा। वहीं यह तिथी 22 मई को रात 10:10 पर समाप्‍त भी हो जाएगी। 

कैसे करें पूजा 

आपको वट सावित्री का व्रत रखना है तो आप ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी के दिन इसका संकल्‍प लें। इस दिन आप रात्री भोज कर सकती हैं। दूसरे दिन आपको फलाहार करना चाहिए और अमावस्‍या के निद निरजला व्रत रखना चाहिए। हालाकि जिन महिलाओं में क्षमता है वह ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी के दिन से ही व्रत शुरू कर सकती हैं। वट सावित्री की पूजा के लिए आपको बांस की टोकरी में ब्रह्मा, सावित्री और सत्‍यवान की प्रतिमा को स्‍थापित करना चाहिए। व्रत में इतने-इतने अंतराल में करें फल या लिक्विड का सेवन

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जो महिलाएं यह व्रत रख रही हैं उन्‍हें इस दिन 16 श्रृंगार कर यह पूजा करनी चाहिए। इससे पति की उम्र बढ़ती है। आपको बता दें कि शास्‍त्रों में बरगद के पेड़ को रक्षक माना गया है। इसकी छाव से मानव को बहुत लाभ होते हैं। ऐसे में अगर आप इस पेड़ की पूजा करती हैं तो यह पेड़ आपके पति की भी  रक्षा करता है। वट के साथ-साथ यम देव की भी पूजा करनी चाहिए। दरअसल इसके पीछे एक कथा है। व्रत वाले आलू-पनीर के कोफ्ते की रेसिपी

क्‍या है कथा 

हिंदुओं में कई पौराणिक कथाएं हैं। एक चर्चित पौराणिक कथा के अनुसार वट सावित्री के व्रत की शुरुआत सावित्री ने की थी। कथा के अनुसार सावित्री ने अपने मृत पति सत्‍यवान को जीवनदान देने के लिए यम देव की अराधना की थी। ऐसा धार्मिक मान्‍यताएं हैं, बरगद के पेड़ की जटाएं सावित्री का ही रूप होती हैं। कथा के अनुसार सावित्री एक राजकुमारी थी और उन्‍हें एक ऐसे व्‍यक्ति से प्रेम हुआ जिसकी मृत्‍यु एक साल बाद होना तय थी। 16 दिनों तक मां लक्ष्‍मी की ऐसे करें पूजा, धन की होगी वर्षा और पूरी होगी मन्नत

मगर सावित्री ने साल भर कई व्रत और पूजा कीं । फिर भी साल भर बाद सत्‍यवान की मृत्‍यु हो गई।  जब यमराज सत्‍यवान को लेने आए तो सावित्री ने यमराज को अपनी बातों में फसा लिया। सावित्री ने यमराज से पुत्र का वरदान मांगा। यमराज ने भी सावित्री की किसी बात पर प्रसन्‍न होकर उन्‍हें पुत्रवती होने का वरदान दे दिया। बाद में जब यमराज सत्‍यवान को ले जाने लगे तो सावित्री ने यमराज को उनके वरदान के बारे में बाताया। इस तरह सावित्री ने अपने पति सत्‍यवान का जीवन बचा लिया। यह है वह स्‍थान जहां भगवान शिव भी करते हैं सोलह श्रृंगार

 

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मंत्र 

वट वृक्ष के फेरे लेते वक्‍त 108 बार इस मंत्र का जाप करें। 

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।

तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा..

वट वृक्ष को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जाप करें। 

अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते। 

पुत्रान्‌ पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते..


इस तरह आप अपनी पति की लंबी उम्र और सुरक्षा हेतु इस व्रत को विधि विधान से कर सकती हैं। 

 Image Credit: shaligram.com