हिन्दू धर्म में नवरात्रि के त्यौहार का विशेष महत्त्व है। ख़ास तौर पर चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की पूरे श्रद्धा भाव से पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। चैत्र नवरात्री के आठवें दिन को महाष्टमी या दुर्गाष्टमी के नाम से जाना जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महगौरी की पूजा विधि विधान से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह तिथि मुख्य रूप से विवाहित स्त्रियों के दाम्पत्य जीवन के लिए विशेष महत्त्व रखती है।

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इस दिन माता महागौरी की आराधना करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है, साथ ही सुख-समृद्धि में भी कोई कमी नहीं होती है। आइए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें कि किस तरह से अष्टमी तिथि के दिन पूजन करना दाम्पत्य जीवन को खुशियों से भर सकता है। 

कब है चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि 

ashtami tithi chaitr

  • इस साल चैत्र नवरात्रि में 20 अप्रैल, मंगलवार के दिन अष्टमी तिथि पड़ रही है। 
  • इसका शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 11 मिनट से, अप्रैल 21 से 04 बजकर 55 मिनट तक 
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक 
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 17 मिनट से दोपहर 03 बजकर 08 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06 बजकर 22 मिनट से शाम 06 बजकर 46 मिनट तक
  • अमृत काल मुहूर्त: अप्रैल 21 की सुबह 01 बजकर 17 मिनट से, प्रात: 02 बजकर 58 मिनट तक

अष्टमी तिथि को करें ये काम 

लाल वस्त्रों में करें माता का पूजन 

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दुर्गाष्टमी के दिन प्रातः जल्दी उठाकर स्नान करने के पश्चात सबसे पहले लाल रंग का वस्त्र या साड़ी धारण करें और लाल रंग का तिलक लगाकर तांबे के पात्र से सूर्य देवता को अर्ध्य दें। इसके बाद मां दुर्गा की मूर्ति या फोटो को जो आपने कलश के साथ स्थापित की है उस पर सिन्दूर लगाएं। माता की मूर्ति पर लाल पुष्प चढ़ाकर धूप, दीप जलाएं।  

गौरी माता का श्रृंगार व् पूजन करें 

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दुर्गाष्टमी तिथि के दिन गौरी पूजन करें, इससे दांपत्य जीवन (दाम्पत्य जीवन के लिए वास्तु टिप्स) अच्छा रहेगा, क्योंकि माता पार्वती सुहाग की देवी हैं। इस दिन गौरी माता का श्रृंगार अपने हाथों से करें। उन्हें लाल चुनरी से सुसज्जित करें और पूर्ण श्रृंगार करें। इस दिन दाम्पत्य जीवन में खुशियां लाने के लिए सम्पूर्ण श्रृंगार करने के बाद श्रद्धा भाव से गौरी पूजन करें। 

महिलाएं करें 16 श्रृंगार 

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महिलाओं को 16 श्रृंगार करके पूजन करना चाहिए। सोलह श्रृंगार गौरी माता को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार त्रेतायुग में सीता माता ने भी भगवान राम को पति स्वरूप पाने के लिए गौरी पूजन किया था। इसलिए कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति हेतु गौरी पूजन कर सकती हैं। लेकिन खासतौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए पूजन के समय 16 श्रृंगार को अत्यंत महत्त्वपूर्ण बताया गया है। 

जोड़े में करें माता की पूजा 

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दाम्पत्य जीवन को सुखकारी बनाने के लिए हमेशा पति -पत्नी साथ में मिलकर पूजन करें। साथ में किया गया पूजन विशेष महत्त्व तो रखता ही है, पति -पत्नी के रिश्ते को मजबूत भी बनाता है। 

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श्रृंगार का सामान अर्पित करें 

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इस दिन मां गौरी को श्रंगार का सामान, सिन्दूर, साड़ी, चूड़ी, बिंदी, चुनरी जरूर चढा़एं। जहां तक संभव हो मंदिर में श्रृंगार का सामान अर्पित करें और प्रसाद स्वरुप उसी सामान का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से दाम्पत्य जीवन में चली आ रही समस्याओं से छुटकारा मिलता है।  

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अर्द्धनारीश्वर स्वरुप का पूजन 

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इस दिन दुर्गा सप्तशती के नवम अध्याय का पाठ करें। यह अध्याय अर्द्धनारीश्वर(भगवान शिव और माता पार्वती का युगल स्वरूप) का वर्णन करता है। अर्थात दोनों की एक ही स्वरूप में पूजा की जाए तो उनकी कृपा से दांपत्य जीवन सुखद होता है। 

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Image Credit: freepik and pintrest