आपने अपने बच्चे से अक्सर सुना होगा कि उन्हें किसी विशेष बच्चे के साथ नहीं खेलना क्योंकि वह उनकी बात नहीं मानता। या उससे झगड़ते हैं और Arguments करते हैं। वो मुझे अपने साथ खेलने नहीं देते हैं। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि तर्क हमारे सामाजिक और प्रोब्लम-सॉल्विंग स्किल्स को रिफाइन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसे झगड़े या गुस्से से सुलझाने की बजाय या फिर इससे भागने की जगह इसे हैंडल करना चाहिए। कहते हैं परिवार ही बच्चे के लिए पहला स्कूल होता है, जहां आप उसे सोशल स्किल्स सीखाती हैं। कठिनाइयों से लड़ने के लिए तैयार करती हैं। इसी तरह उसे तर्कों को हैंडल करने के तरीके सिखाइए। सीनियर चाइल्ड स्पेशलिस्ट और क्लीनकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी ऐसे ही कुछ तरीके बता रहे हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं।

शांत होने के बाद दें प्रतिक्रिया

perspective of a child

बच्चा घर से ही सीखता है। अगर वह आपको किसी से गुस्से में लड़ते देखेगा तो वो भी ऐसी प्रतिक्रियाएं देगा। बच्चे के सामने ऐसा बिल्कुल न करें। अगर आपका बच्चा गुस्से में आपके साथ या फिर किसी दूसरे के साथ बहस कर रहा है, तो उसे समझाएं कि बात तभी की जा सकती है, जब वह शांत होगा। उन्हें गुस्सा होने पर बहस बिल्कुल भी न करने दें। 

दृष्टिकोण समझें

जब बच्चा नाराज होता है या गुस्सा होता है तो वह तर्क करते हुए सिर्फ अपने दृष्टिकोण को देखता है। वह भूल जाता है कि दूसरा क्या कह रहा है या सोच रहा है। उसे समझाएं कि वह बातों को सभी के दृष्टिकोण से देखें, समझें और तभी बात करे। अपने बच्चे को यह बताने की कोशिश करें कि उनके दोस्त, भाई-बहन उस स्थिति में कैसा महसूस कर रहे होंगे। उनमें सहानुभूति की भावना पैदा करें।

उन्हें क्या ट्रिगर कर रहा है जानें

understand their trigger point

बच्चा कभी भी बिना बात के नहीं चिढ़ता इस बात पर गौर करें। ध्यान दें कि आपके बच्चे को क्या ट्रिगर कर रहा है। बच्चों की परेशानी को समझें। जब आप समझ जाएं, तो उससे शांति से बात करें और उसे भी यह बात समझाने की कोशिश करें। जब आपका बच्चा ये बाते समझेगा तो वह बिना चिढ़े या परेशान हुए तर्कों को हैंडल कर सकेगा। 

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गलतियों को स्वीकार करना सिखाएं

आप जब किसी से लड़ते हैं, तो क्या सॉरी कहते हैं? बड़ों के लिए भी यह सबसे कठिन चीजों में से एक है, लेकिन सॉरी कहने से बहुत सारे तर्कों से बचा जा सकता है।  आपका बच्चा जब शांत हो, उसका गुस्सा ठंडा हो गया हो, तब उसे गलतियों को स्वीकार करने का महत्व सिखाएं। मगर उन्हें सिखाने से पहले आप इन बातों का ध्यान रखें, जब आप ऐसा करेंगे तो बच्चा भी आपको देखादेखी यही सिखेगा। बच्चों के रोल मॉडल बनें।

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समस्या का समाधान सिखाएं

make them solve problem

अपने बच्चे के साथ बातचीत करें। खुले दिमाग से उसकी सभी बातों को सुनें और समझें। उनके ऑब्जेक्शन पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की बजाय उनके प्रति सहानुभूति दिखाएं। अगर आप उनकी किसी बात से असहमत भी हैं, तो तुरंत उनसे न कहें। उन्हें पूरा समय दें। उनसे ऐसी अन्य चुनौतियों के बारे में बात करें और वे इससे कैसे आगे बढ़ सकते हैं, इसका कोई समाधान निकालने पर चर्चा करें।

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रिलैक्सेशन स्किल्स सिखाएं

कुछ बच्चे गुस्से में तोड़-फोड़ करते हैं। चीजें पटकते हैं, ऐसा इसिलए होता है क्योंकि वह अपने इमोशन को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं। ऐसे में आप उन्हें कुछ रिलैक्स करने वाली स्किल्स सिखाएं। उन्हें समझाएं कि अगर उन्हें कभी गुस्सा आए तो वे कैसे इसे हैंडल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, प्रतिक्रिया देने से पहले वे गहरी सांसें ले सकते हैं या फिर कुछ समय के लिए उस स्थिति से खुद को दूर कर लें।

अपने बच्चों को debate और arguments का अंतर समझाएं। अपनी राय के जरिए टकराव को कैसे हल किया जाता है यह बताएं और इन बिंदुओं पर गौर जरूर करें। ऐसी अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी के साथ।

 

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