‘एक था राजा, एक थी रानी, दोनों मर गए खत्म कहानी।’ बेशक कई कहानियां राजा और रानी के मरने के साथ ही खत्म हो जाती हैं, मगर, कुछ कहानियां अनंत काल तक याद रह जाती हैं। मुगल बादशाह शाहजहां और उनकी बेगम मुमताज महल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यह कहानी जितनी प्रचलित है उतनी ही विवादित भी है। इस कहानी को लेकर सबसे बड़ा विवाद तो यही हैं कि बादशाह शाहजहां और मुमताज की कहानी में प्रेम है या नफरत। हाला कि उत्तरप्रदेश के आगरा में विशाल और खूबसूरत संगमरमर के पत्थर से बने ताज को देख कर हर कोई इसे शाहजहां और मुमताज के प्रेम का प्रतीक ही मानता है। इतिहास की मानें तो शाहजहां ने ताजमहल बनवाया ही इसलिए था क्योंकि वह चाहते थे कि उनकी सबसे प्रिय पत्नी मुमताज महल की कब्र दुनिया के सबसे खूबसूरत स्थान पर हो। वास्तव में ताजमहल दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक है। ताजमहल की सुंदरता की तुलना आजतक कोई दूसरी इमारत नहीं कर पाई है। मगर, ताजमहल के पत्थरों में एक कहानी और दफन है। यह कहानी जुड़ी है मुमताज महल की दुखभरी मौत और मौत के बाद उसकी असली कब्र से। चलिए जानते हैं मुमताज महल की कहानी। 

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  mumtaz mahal burhanpur

  • इतिहास के पन्ने पलटे जाएं तो पता चलता है कि मुगल बादशाह शाहजहां के शासन काल को भारत के इतिहास का गोल्डन पीरियड कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शाहजहां के शासन में प्रजा बहुत खुश थी। भारत का सबसे ज्यादा विकास और भारत में सबसे ज्यादा इमारतों का निर्माण भी इसी काल में हुआ। शाहजहां ने ही ताजमहल का निर्माण कराया था। इस महल का निर्माण उसने अपनी वाइफ मुमताज महल की 17 जून 1631 में हुई मौत के बाद उसकी कब्र को दफनाने के लिए करवाया था। यह मुगलकालिन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसकी वास्तुकला में फारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी शैली की झलक नजर आती है। 
  • इतिहासकारों की मानें तो जब मुमताज महल की प्रेग्नेंसी का 8वां महीना चल रहा था तब लोधियों ने साउथ इंडिया पर आक्रमण करने के लिए झंडा उठा लिया था। ऐसे वक्त में शाहजहां को आगरा से 787 किलोमीटर दूर जाकर बसेरा करना पड़ा। बादशाह के साथ मुमताज ने भी यह लंबा सफर तय किया। इस दौरान दर्द बढ़ने के कारण बच्चे को जन्म देते ही मुमताज महल की मौत हो गई थी। 
  • अपने 14वें बच्चे को जन्म देने के दौरान मुमताज महल ने अपने प्राण त्याग दिए थे। तब बादशाह ने बुरहानपुर में ही एक ताल खुदवाया और वहां दीए रखने की जगह बनवाई। वहीं पर उसने मुमताज महल के शरीर को दफना दिया था। इसके लिए शाहजहां ने पहले बुरहानपुर में ही मुमताज की कब्र पर ताजमहल बनवाने के लिए ईरान, मिस्त्र और इटली के बड़े शिल्पकारो को बुलवाया। मगर, उन्होंने ताप्ती नदी के पास ऐसी किसी भी तरह की इमारत बनाने से मना कर दिया। इसके बाद शाहजहां ने आगरा में ताजमहल का निर्माण करवाया। 
 
taj mahal the true story
  • ‘अबुस्सलाम’ नाम की किताब में इस बात का जिक्र मिलता है कि जब यह तय हुआ कि ताजमहल आगरा में बनेगा तो मुमताज महल के शरीर पर यूनानी हकीमों से शव को संरक्षित रखने वाला लेप लगवाया गया। इससे मुमताज महल का शव 6 माह तक वैसा का वैसा ही रह सकता था और खराब नहीं होता। इसके बाद ममी के रूप में मुमताज की लाश को दफना दिया गया। जबकि ताजमहल को बनवाने में 22 साल का वक्त लगा था। इस इमारत को बनाने में 20 हजार से भी ज्यादा मजदूर लगे थे, जो न केवल भारतीय थे बल्कि फारस और तुर्की भी थे। 
  • बेशक ताजमहल को बनवाने के लिए राजस्थान से संगमरमर के पत्थर मंगवाए गए थे मगर, इस इमारत में केवल संगमरमर ही नहीं बल्कि 28 तरह के अलग-अलग पत्थर लगाए गए हैं। आपको बता दें कि ताजमहल में चीन से हरिताश्म और क्रिस्टल, तिब्बत से फीरोजा, अफगानिस्तान से लौपिज लजूली, श्रीलंका से नीलम और अरम से इंद्रगोप पत्थर मंगवा कर लगाए गए थे। 
  • ताजमहल के निमार्ण के दौरान लगे वक्त ने बादशाह को भी बूढ़ा बना दिया था। ताजमहल पर इतनी सारा धन खर्च करने के बाद शाहजहां अपनी कब्र के लिए ताजमहल की ठीक सामन काले पत्थर का ताजमहल बनवाना चाहता था। इस बात की जानकारी जब शाहजहां के पुत्र औरंगजेब को लगी तो उसने अपने पिता के फिजूल खर्च को रोकने के लिए उन्हें आगरा के लालकिले में कैद करवा दिया।