हिंदू धर्म में सभी व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है। यही नहीं प्रत्येक तिथि का भी अलग मतलब और महत्व है। ऐसी ही तिथियों में से त्रयोदशी तिथि को बेहद शुभ माना जाता है। इस तिथि में प्रदोष व्रत रखा जाता है और पूरे विधि विधान से भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती है।

यह तिथि पूर्ण रूप से भगवान शंकर को समर्पित होती है। हर महीने में दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं पहला कृष्ण पक्ष में दूसरा शुक्ल पक्ष में। इस प्रकार पूरे साल में 24 प्रदोष व्रत रखे जाते हैं जिनका अलग महत्त्व बताया गया है। आइए नई दिल्ली के पंडित एस्ट्रोलॉजी और वास्तु विशेषज्ञ, प्रशांत मिश्रा जी से जानें सितबंर के महीने में कब पड़ेगा पहला प्रदोष का व्रत और इस व्रत का क्या महत्त्व है।

सितंबर महीने के प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त

pradosh vrat shubh muhurat

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हर तिथि किसी न किसी भगवान को समर्पित होती है। उसी प्रकार त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को पूरी तरह से समर्पित  मानी जाती है। इस दिन भगवान शिव का माता पार्वती समेत पूजन करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस तिथि को ही प्रदोष का व्रत रखा जाता है। वैसे प्रदोष व्रत के लिए त्रयोदशी तिथि में प्रदोष काल होना आवश्यक है और इसी काल में शिव पूजन किया जाता है। सितबंर माह में दो प्रदोष व्रत रखे जाएंगे जिनमें से पहला कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में पड़ेगा।

  • सितंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में त्रियोदशी तिथि 4 सितबंर, शनिवार को पड़ेगा। इस दिन शनिवार पड़ रहा है, इसलिए इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
  • त्रयोदशी   तिथि का आरंभ 4 सितंबर की सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर
  • त्रयोदशी तिथि का समापन  5 सितंबर, रविवार को 8 बजकर 21 मिनट पर
  • प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में ही की जाती है और प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहले शुरू हो जाता है।
  • इस काल में ही इस व्रत की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 2 घंटे और 16 मिनट का है।

सितंबर प्रदोष व्रत पूजा विधि

shivling pujan

  • प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के समेत माता पार्वती की पूजा की जाती है।
  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करके शिव पूजन करें।
  • अगर आप व्रत रखते हैं तो व्रत का संकल्प लें और इसके बाद भगवान शिव का या शिवलिंग को जलाभिषेक कराएं।
  • शिवलिंग पर बेल पत्र, भांग, धतूरा और सफ़ेद फूल अर्पित करके चन्दन लगाएं।
  • यदि शिव प्रतिमा की पूजा करते हैं तो उसे स्नान करें और चन्दन  से सुसज्जित करें।
  • भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती और गणेश जी की पूजा भी करें।
  • प्रदोष काल में प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। कथा के बाद आरती करें और शिव चालीसा का पाठ करें।
  • शिव जी को भोग अर्पित करें और भोग सभी को वितरित करके स्वयं भी ग्रहण करें।
  • शिव जी को भोग के रूप में खीर अत्यंत प्रिय है। इसलिए खीर का भोग अर्पित करें।

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सितंबर शनि प्रदोष व्रत का महत्व

pradosh vrat puja

सितंबर के महीने में प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ रहा है इसलिए इस दिन भगवान् शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ लाभकारी होगा। हनुमान जी को शिव जी का ही अवतार माना जाता है। इसलिए शनि प्रदोष में हनुमान जी की पूजा भी की जाती है। इसके अलावा प्रदोष व्रत में पूरे श्रद्धा भाव से पूजन और व्रत का पालन करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और यह व्रत संतान के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

इस प्रकार प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में विधि विधान से शिव पूजन करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलने के साथ मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

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