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Sawan Skanda Sashti 2022: सावन में शिव जी के साथ कार्तिकेय की भी होती है पूजा, जानें स्कंद षष्ठी की तिथि और महत्व

सावन के महीने में पड़ने वाली स्कंद षष्ठी की तिथि विशेष रूप से मायने रखती है। आइए जानें इस साल यह पर्व कब मनाया जाएगा।   
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Published -30 Jul 2022, 14:08 ISTUpdated -30 Jul 2022, 14:23 IST
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skand shashti  vrat

सावन के महीने का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। इस महीने में शिव पूजन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। ऐसा ,माना जाता है कि इस पूरे महीने में शिव पूजन करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

सावन में न सिर्फ भगवान् शिव की बल्कि गणपति और कार्तिकेय की पूजा का भी विधान है। जहां चतुर्थी तिथि गणपति को समर्पित होती है, वहीं षष्ठी तिथि में कार्तिकेय की पूजा की जाती है।

कार्तिकेय भगवान शिव जी के बड़े पुत्र के रूप में पूजे जाते हैं और स्कंद षष्ठी के दिन इनका पूजन किया जाता है। दरअसल कार्तिकेय के कई नामों में से एक नाम स्कंद है और उनके अन्य नाम मुरुगन, कार्तिकेय और सुब्रमण्यम हैं। आइए अयोध्या के पंडित राधे शरण शास्त्री शर्मा जी से जानें इस साल सावन में किस दिन मनाई जाएगी स्कंद षष्ठी और इसका क्या महत्व है। 

सावन स्कंद षष्ठी व्रत तिथि 

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  • सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि आरंभ:  03 अगस्त, प्रात: 05:41 मिनट से 
  • श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि समापन: 04 अगस्त, प्रात: 05: 40 मिनट पर 
  • उदयातिथि के अनुसार सावन स्कंद षष्ठी व्रत 03 अगस्त को रखा जाएगा। 

स्कंद षष्ठी पूजा का शुभ मुहर्त 

  • 3 अगस्त, बुधवार को सिद्ध योग: 3 अगस्त, सुबह से लेकर सायं 05: 49 मिनट तक 
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: 3 अगस्त, बुधवार, प्रात: 05: 43 मिनट से लेकर शाम 06: 24 मिनट तक
  • अमृत सिद्धि योग: 3 अगस्त, बुधवार, प्रातः 05: 43 मिनट से लेकर प्रातः 09:51 मिनट तक 
  • अमृत सिद्धि योग: सायं 06:24 मिनट से अगले दिन 04 अगस्त  प्रात: 05:44 मिनट तक

स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व 

skand shashthi significance

ऐसा माना जाता है कि कार्तिकेय भगवान की पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि स्कंद षष्ठी के व्रत का पालन करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और सभी समस्याओं का समाधान होता है।

मुख्य रूप से दक्षिण भारत में भगवान् कार्तिकेय की पूजा की जाती है और जो लोग शिव जी के उपासक हैं वो कार्तिकेय जी की पूजा भी विधि विधान के साथ करते हैं। इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति के जीवन से कई कष्टों का निवारण होता है और सभी पापों से मुक्ति के द्वार खुलते हैं। 

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स्कंद षष्ठी व्रत पूजा विधि 

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  • यदि आप स्कंद षष्ठी का व्रत करते हैं तो प्रातः जल्दी उठें और दैनिक क्रियाओं से मुक्त होकर पूजन करें। 
  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान कार्तिकेय की तस्वीर रखें। 
  • साथ में शिव परिवार की मूर्ति (घर पर रखें भगवान शिव की ऐसी मूर्तियां) या तस्वीर रखें और पूजन करें। 
  • कार्तिकेय जी की तस्वीर के सामने कलश रखें और व्रत का संकल्प लें। 
  • पूजन शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करें। 
  • पूजन के समय दीपक प्रज्वलित करें और मंदिर में ज्योत जगाए रखें। 
  • भगवान कार्तिकेय पर जल अर्पित करें और पूजन करें। 

मान्यता है कि स्कंद षष्ठी का व्रत रखने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और लाभ मिलता है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: freepik

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