हिंदू धर्म में सभी व्रतों का अलग महत्त्व है। ऐसे ही व्रत और उपवासों में से एक है प्रदोष का व्रत। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान् शिव को समर्पित है और इस दिन शिव जी की आराधना करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती यही। प्रत्येक महीने में दो प्रदोष व्रत होते हैं पहला कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। इस प्रकार पूरे साल में 24 प्रदोष व्रत होते हैं और सभी व्रतों का अलग महत्त्व है।

हिन्दू धर्म में सावन के महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का अलग महत्त्व बताया गया है क्योंकि इस दिन मुख्य रूप से शिव पूजन करना फलदायी माना जाता है। आइए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें साल 2021 में सावन के महीने में कब पड़ेगा प्रदोष का व्रत और इस व्रत का क्या महत्त्व है। 

सावन प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त 

sawan pradosh tithi

  • इस साल सावन का पहला प्रदोष व्रत 5 अगस्त 2021, गुरूवार को पड़ेगा 
  • 5 अगस्त को गुरुवार का दिन है इसलिए इस प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
  • कृष्ण पक्ष त्रयोदशी प्रारम्भ - 05 अगस्त 2021, सायं  05:09  
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त - 06 अगस्त सायं 06:28
  • प्रदोष काल-  05 अगस्त सायं 07:09 से 09:16 तक 

क्या होता है प्रदोष काल 

प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में ही पूजा का विशेष महत्व होता है। प्रदोष काल संध्या के समय सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले शुरू हो जाता है। कहा जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। किसी भी मान्यता को पूर्ति के लिए शिव पूजन अगर प्रदोष काल में किया जाता है तो ये विशेष रूप से फलदायी होता है। 

प्रदोष व्रत पूजा की विधि

pooja  vidhi

  • प्रदोष वाले दिन प्रातः जल्दी उठाकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। 
  • शिव मूर्ति या शिवलिंग को स्नान कराएं। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • यदि आप व्रत रखें तो दिनभर फलाहार का पालन करें। 
  • भगवान भोलेनाथ का गंगा जल और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • भगवान भोलेनाथ को पुष्प अर्पित करें और माता पार्वती समेत पूजन करें। 
  • प्रदोष काल में शिव जी पूजा करें। प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और प्रदोष काल में आरती करके प्रसाद चढ़ाएं। 
  • इसी प्रसाद को स्वयं भी ग्रहण करके व्रत का पारण करें। 

Recommended Video

सावन प्रदोष व्रत का महत्व

shivling pradosh vrat

सावन के महीने में मुख्य रूप से भगवान शिव की उपासना पूरे उत्साह के साथ की जाती हैृ। विशेष दिनों में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सावन का प्रदोष व्रत उनमें से ही एक है। इस वर्ष सावन के महीने में दोनों प्रदोष व्रत गुरु प्रदोष और शुक्र प्रदोष होने के कारण विशेष संयोग का निर्माण कर रहे हैं। सावन के प्रदोष व्रत में शिव पूजन करने से कई व्रतों के बाराबर फल प्राप्त होता है और समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। 

उपर्युक्त तरीके से सावन प्रदोष में शिव पूजन करने और व्रत उपवास करने से व्यक्ति को कई अच्छे फलों की प्राप्ति होती है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है। 

आपको यह आर्टिेकल कैसा लगा? हमें फेसबुक पर कमेंट करके जरूर बताएं। इस तरह की और जानकारी पाने के लिए हरजिंदगी से जुड़ी रहें। 

Image Credit: freepik and pinterest