वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ ने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। उनकी तबियत कुछ दिनों से नाजुक बताई जा रही थी। उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बीते दिनों उनकी बेटी और कॉमेडियन मल्लिका दुआ ने सोशल मीडिया के जरिए उनकी नाजुक हालत की जानकारी दी थीं। 'उन्होंने बताया कि पिता की हालत नाजुक है और इस वक्त आईसीयू में भर्ती हैं। बता दें कि विनोद दुआ को इस साल कई बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उनकी सेहत कोविड से संक्रमित होने के बाद बार-बार खराब होती रही थी।

वहीं कोविड -19 की दूसरी लहर में वो और उनकी पत्नी दोनों संक्रमित पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई दिनों तक इलाज चलने के बाद उनकी पत्नी चिन्ना दुआ का जून में निधन हो गया था। पत्नी के निधन के 6 महीने बाद विनोद दुआ ने भी दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। बता दें कि विनोद दुआ दूरदर्शन और एनडीटीवी कई बड़े समाचार चैनलों के साथ काम कर चुके हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में विनोद दुआ जाना माना नाम है।

मल्लिका दुआ ने दी निधन की जानकारी

mallika dua post

कॉमेडियन मल्लिका दुआ ने कुछ दिन पहले ही पिता विनोद दुआ की तबियत खराब होने की जानकारी दी थी। उस वक्त उन्होंने भावुक पोस्ट लिखते हुए कहा था कि 'उनके पिता की हालत गंभीर है, उनके लिए दुआ करें कि उन्हें कम से कम तकलीफ हो।' इसके बाद से ही विनोद दुआ लगातार डॉक्टर की निगरानी में थे। वहीं आज शनिवार को कुछ मिनट पहले ही मल्लिका ने पिता के निधन की जानकारी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए दी है। उन्होंने लिखा, 'हमारे निर्भीक और असाधारण पिता विनोद दुआ का निधन हो गया है। उन्होंने शानदार तरीके से अपनी जिंदगी जी है, दिल्ली की एक शरणार्थी कॉलोनी में पढ़े-बढ़े और 42 साल तक पत्रकारिता की दुनिया में नाम कमाया है। वह हमेशा सच के लिए आवाज उठाते रहे हैं। अब वह हमारी मां के साथ हैं। उनकी पत्नी चिन्ना स्वर्ग में हैं, जहां वे गाएंगे, खाना बनाएंगे और एक साथ ट्रैवल करेंगे।' वहीं इसके साथ ही मल्लिका ने बताया कि पिता का अंतिम संस्कार कल 12 बजे (15.12.21) लोधी श्मशान घाट में होगा।

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विनोद दुआ का प्रारंभिक जीवन

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विनोद दुआ की परवरिश दिल्ली की रिफ्यूजी कॉलोनियों में हुई थी। उनके माता-पिता सराइकी हिंदू थे, जो 1947 में भारत की आजादी के बाद डेरा इस्माइल खान, खैबर पख्तूनख्वा से आए थे। विनोद दुआ शुरुआत से ही बोलने और लिखने में माहिर थे। अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों में वह कई सिंगिंग और डिबेट कॉम्पिटिशन में भाग लिया करते थे। 1980 में वह थियेटर से भी जुड़े और कई साल तक काम किया। इस दौरान वह स्ट्रीट थिएटर ग्रुप, थिएटर यूनियन के सदस्य भी रहे थे, जो दहेज जैसे सामाजिक मुद्दों के खिलाफ नाटक प्रदर्शन किया करते थे। शिक्षा की बात करें तो उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंस राज कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में डिग्री हासिल की थी। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से साहित्य में मास्टर किया। नवंबर 1974 में, विनोद ने युवा मंच में अपना पहला टेलीविजन प्रदर्शन किया था, जो एक हिंदी भाषा का युवा कार्यक्रम था, जिसे दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया था।

मीडिया के क्षेत्र में खूब कमाया नाम

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67 वर्षीय विनोद दुआ मीडिया के क्षेत्र में एक जाना माना नाम थे। दूरदर्शन के अलावा उन्होंने कई जाने माने टीवी चैनल और ऑनलाइन पोर्टलों के साथ काम किया था। अपने करियर में उन्होंने एनडीटीवी के साथ काफी समय तक काम किया था। 'खबरदार इंडिया', 'विनोद दुआ लाइव' जैसे कार्यक्रम उनके करियर के शानदार कामों में से एक रहा है। इसके अलावा 'जायका इंडिया' भी उनके सबसे चर्चित कार्यक्रमों में से एक रहा था। हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने वाले विनोद दुआ दूरदर्शन में चुनाव विश्लेषण के लिए भी जाने जाते थे। दूरदर्शन में काम करने के दौरान वह 'जनवाणी' कार्यक्रम से लोगों के बीच खास जगह बनाई थी। टीवी पर उनके बोलने की कला और बात रखने के अंदाज को लोग काफी पसंद करते थे। 

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माता-पिता के बेहद गरीब हैं मल्लिका दुआ

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विनोद दुआ अपनी फैमिली से काफी करीब थे। उनकी दो बेटियां हैं मल्लिका दुआ और बकुल दुआ। मल्लिका कॉमेडियन होने के साथ-साथ एक एक्टर हैं, जबकि उनकी दूसरी बेटी बकुल दुआ एक साइकोलॉजिस्ट हैं। मल्लिका अक्सर अपने माता-पिता के साथ क्यूट वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती थीं। वहीं विनोद दुआ की पत्नी चिन्ना दुआ का इसी साल जून में निधन हो गया था। बता दें कि उनकी पत्नी डॉ पद्मावती दुआ कोरोना संक्रमित होने की वजह से हुआ था। उनकी पत्नी एक सोशल इन्फ्लुएंसर होने के साथ-साथ डॉक्टर भी थी। पत्नी के निधन के बाद विनोद कई बार अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके थे। 

मिल चुके हैं कई सम्मानित पुरस्कार

विनोद दुआ अपनी निडर पत्रकारिता की वजह से कई विशिष्ट सम्मानों से भी नवाजे जा चुके हैं। साल 2008 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए साल 1996 में रामनाथ गोयनका पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। यह पुरस्कार पाने वाले वह पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मी थे। साथ ही, पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके काम को देखते हुए  2017 में मुंबई प्रेस क्लब ने उन्हें रेडइंक अवॉर्ड देकर सम्मानित किया था।
 

विनोद दुआ ने भले ही दुनिया को अलविदा कह दिया हो लेकिन उनके निडर पत्रकारिता को दुनिया हमेशा याद रखेगी। हर जिंदगी की अन्य खबरों को पढ़ने के लिए हमारे साथ जुड़ रहें।