हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। महीने में दो एकादशी तिथियां होती हैं। पहली एकादशी तिथि कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष में पड़ती है। एकादशी तिथि को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है और इस दिन पूरे विधि विधान से भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति एकादशी तिथि को विधि विधान के साथ व्रत करता है और विष्णु पूजन करता है उसकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है। 

वैसे हिन्दू धर्म में प्रत्येक एकादशी तिथि का अलग ही महत्व है लेकिन कार्तिक के महीने में पड़ने वाली एकादशी तिथि और ज्यादा मायने रखती है। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष को पड़ने वाली एकादशी तिथि को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है और इसका शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। आइए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड, पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें इस साल कब है रमा एकादशी, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्त्व। 

रमा एकादशी की तिथि और महत्व 

vishnu and lakshmi ji pujan

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। इस साल रमा एकादशी 01 नवंबर, सोमवार को है। 

  • एकादशी तिथि का प्रारंभ 31 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 
  • एकादशी तिथि समाप्त 01 नवंबर, दोपहर 01 बजकर 21 मिनट तक 
  • उदया तिथि के अनुसार रमा एकादशी 01 नवंबर, सोमवार के दिन है। इसलिए इसी दिन व्रत करना शुभ माना जाएगा। 
  • रमा एकादशी इंद्र योग रात 09 बजकर 05 मिनट तक है। ऐसे में इस वर्ष रमा एकादशी का व्रत इंद्र योग में रखा जाएगा।
  • चूंकि पूजा एवं मांगलिक कार्यों के लिए राहुकाल को वर्जित माना गया है। ऐसे में आप रमा एकादशी की पूजा राहुकाल को छोड़कर दिन में कभी भी कर सकते हैं।

रमा एकादशी का महत्त्व 

दिवाली के पर्व से पूर्व माता लक्ष्मी की पूजा करने के लिए रमा एकादशी सबसे उत्तम दिन होता है। चूंकि माता लक्ष्मी का एक नाम रमा भी है इसलिए उनके नाम से ही रमा एकादशी मनाया जाता है। रमा एकादशी पर भगवान विष्णु समेत रमा यानी कि माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, इसलिए इसे रमा एकादशी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन पूरे मनोयोग ये भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा और व्रत करता है उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और आर्थिक लाभ मिलता है। इस दिन व्रत उपवास करने से घर से दरिद्र दूर होता है और माता लक्ष्मी की कृपा दृष्टि बनी रहती है। 

रमा एकादशी की पूजा विधि

ekadashi rama

  • इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि करके साफ़ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की सफाई करें और सभी भगवानों को नए वस्त्रों से सुसज्जित करें। 
  • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें और भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान विष्णु को मुख्य रूप से पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
  • यदि आप व्रत का पालन करते हैं तो इस दिन फलाहार व्रत रखें। 
  • यदि आप व्रत नहीं करते हों तब भी आपको इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। 
  • विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर को चन्दन लगाएं और माता लक्ष्मी समेत पूजन करें। 
  • विष्णु जी और माता लक्ष्मी (दिवाली में ऐसे करें लक्ष्मी पूजन) की आरती करें और भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाएं। 
  • भगवान विष्णु के भोग में तुलसी जरूर अर्पित करें। मान्यतानुसार बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं।

उपरोक्त विधि के अनुसार यदि आप विष्णु भगवान का पूजन माता लक्ष्मी समेत करते हैं तो आपको समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। 

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: freepik and wallpapercave