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तीन बहनों की कहानी जो रहीं एक साथ, शादी भी हुई एक साथ और साथ ही लगा लिया मौत को गले

सुसाइड एक बहुत ही गंभीर घटना है और एक साथ एक ही घर की तीन बहुओं ने जब ये किया तो उसके पीछे की वजह का सबसे सामने आना भी जरूरी है। 
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Published -01 Jun 2022, 14:51 ISTUpdated -01 Jun 2022, 15:14 IST
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rajasthan mass suicide

जिंदगी बहुत हसीन होती है और हर कोई अपनी जिंदगी को कुछ खास तरह से जीना चाहता है, लेकिन कई बार सामाजिक बंदिशें और दुख इतने ज्यादा हो जाते हैं कि जिंदगी बेहद गमगीन लगने लगती है। समाज की बंदिशें हमेशा से ही कई लोगों के पैरों में बेड़ियां डालती आई हैं और इसके कारण कई हंसती खेलती जिंदगियां बर्बाद हो जाती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ राजस्थान में जहां एक ही घर की तीन बेटियों ने अपनी जान दे दी। 

ये कहानी है तीन बहनों की जो एक ही घर में पैदा हुईं, एक ही साथ रहीं, एक ही ससुराल मिला जहां तीन भाइयों से शादी हो गई और एक ही साथ इन्होंने सुसाइड कर लिया। 

बच्चों के साथ किया तीनों ने सुसाइड-

राजस्थान के जयपुर जिले में रहने वाली तीनों बहनें कालू मीना, ममता मीना और कमलेश मीना 25, 23 और 20 साल की थीं। उनके साथ दो बच्चे भी थे जिसमें से एक की उम्र 4 साल थी और दूसरे की उम्र 1 महीना भी नहीं थी। 

दो छोटी बहनें ममता और कमलेश प्रेग्नेंट भी थीं। ये तीनों ही तीन भाइयों से ब्याही थीं और जिस तरह की स्थिति उनके साथ पैदा हुई वो चौंकाने वाली थी। 

rajasthan and suicide well

इस घटना को आम नहीं माना जा सकता है जिसमें दो मासूमों के साथ तीन बहनों ने आत्महत्या कर ली। दो बहनें प्रेग्नेंट थीं और उनमें से एक की डिलीवरी डेट बहुत ही करीब थी। 

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पढ़ाई, दहेज और प्रताड़ना बना जिंदगी खत्म करने की वजह-

इन तीनों की ही जिंदगी शादी और ससुराल के इर्द-गिर्द घूमती रह गई। 2005 में तीन बच्चियों की शादी घर वालों ने जबरन कर दी। इन तीनों का ही बाल विवाह हुआ था और तीनों ही पढ़ाई में अच्छी थीं। शादी के बाद भी तीनों ने पढ़ना नहीं छोड़ा था और रिपोर्ट के मुताबिक छोटी बहन कमलेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी में दाखिला पा चुकी थी, बीच वाली बहन ममता को पुलिस में नौकरी मिल गई थी, बड़ी बहन कालू भी बीए फाइनल में थी। जहां ये महिलाएं अपने सपनों को साकार करने की पूरी कोशिश करती थीं वहीं इनके पति जो मुश्किल से प्राइमरी तक पढ़े थे वो इन्हें रोज़ाना मारते थे। (घरेलू हिंसा होने पर कैसे मांगे मदद)

पति समय के साथ शराबी होते चले गए और अपनी-अपनी पत्नियों को पीटना इनकी आदत बन गई। बात इतनी बढ़ जाती कि गर्भवती होने के बाद भी रोजाना इन्हें पीटा जाता। 

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सारी बंदिशों के बाद भी सफलता की सीढ़ियां चढ़ने वाली इन महिलाओं की आखिरकार हिम्मत टूट ही गई। 25 मई की दोपहर तीनों अपने घर से गायब हो गईं और बच्चों को साथ लेकर गईं। घर वालों ने ढूंढा और ये नहीं मिलीं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तीनों में से सबसे छोटी बहन कमलेश ने अपने पिता को फोन करके 25 मई को ही बताया था कि इन तीनों को अपनी जिंदगी का डर है। इसी रिपोर्ट में पिता का स्टेटमेंट भी है जो कहता है कि जब वो अपनी बेटियों को ढूंढने गए तब उन्हें कहा गया कि, 'बेटियां मर गईं', 'तुम भी जाओ मर जाओ'। 

एक जगह के सीसीटीवी की फुटेज में तीनों को जाते दिखाया गया है। इसके बाद पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई और तीन दिन तक इन्हें ढूंढा गया। पर ये तीनों नहीं मिलीं और 28 मई को कुंए में तीनों बहनों सहित दो बच्चों की लाश मिली।  

पुलिस की शिनाख्त में घरेलू हिंसा का मामला सामने आया है और तीनों पतियों सहित उनकी मां और बहन को गिरफ्तार कर लिया गया है।  

कई बार हिंसा के कारण हुई परेशानियां- 

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2022 अप्रैल में कालू देवी जो सबसे बड़ी बहन थी उन्हें अस्पताल में एडमिट करवाया गया था क्योंकि उन्हें ससुराल वालों ने इतनी बुरी तरह से मारा था कि अस्पताल जाने की नौबत आ गई थी।  

इन बहनों को बीते कुछ समय से पढ़ाई छोड़ने और खेती में हाथ बटाने के लिए जोर दिया जा रहा था।  

जितनी दुखद ये घटना है उतना ही दुखद इस बात का अहसास है कि तीनों ने अपने बच्चों को भी इस दुनिया से ले जाना सही समझा। सुसाइड करना एक बेहद संगीन घटना है और हर किसी को जीने का अधिकार मिलना चाहिए।  

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अगर कोई सुसाइडल महसूस कर रहा है तो उसे क्या करना चाहिए? 

हमारे आस-पास कई ऐसे लोग मौजूद होते हैं जिन्हें अपनी जिंदगी के कई पहलू अच्छे नहीं लगते। कई लोग डिप्रेशन में हैं, लेकिन अगर आपके साथ ऐसा कोई है या फिर आपको ऐसा लग रहा है तो मदद मांगनी चाहिए। जिंदगी खत्म करने का फैसला हमेशा गलत होता है और ऐसी गंभीर स्थिति में आपकी मदद करने के लिए कई सरकारी और प्राइवेट एनजीओ उपलब्ध हैं।  

suicidal thoughs and medical help

iCall की मदद ली जा सकती है। ये संस्था डिप्रेशन के शिकार लोगों की मदद करती है और साथ ही साथ कई तरह की सलाह उपलब्ध करवाती है।  

कब उपलब्ध है: सोम-शनि, 10 AM—8 PM. भाषा- हिंदी, अंग्रेजी 

नंबर- 9152987821 

डिप्रेशन के समय आपकी मदद कर सकते हैं ये नंबर 


साल दर साल ना जाने कितने ही ऐसे मामले सामने आते हैं जहां दहेज के कारण महिलाओं को इस तरह के कदम उठाने पड़ते हैं। हमारा समाज क्यों भला लोगों को इतना हक देता है कि कोई अपनी पत्नी या पति पर इस तरह की प्रताड़ना दे सके। किसी भी क्राइम रिपोर्ट को देख लीजिए महिलाओं के ऊपर होने वाले अत्याचारों की संख्या में हर साल इजाफा ही होता है। अगर हम खुद इसके खिलाफ आवाज़ नहीं उठाएंगे तो कभी भी ये कुप्रथा खत्म नहीं हो पाएगी। अगर आपके आस-पास ऐसा कुछ हो रहा है तो शांत ना बैठें। पुलिस के पास जाएं और पीड़ितों की मदद करने की कोशिश करें। एक सभ्य समाज हमसे ही बनता है, इसकी पहल कहीं से तो करनी ही होगी।  

Image Credit: ANI News/ Srivatsan (Journalist) twitter account/ Freepik

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