हिंदू धर्म में राधा रानी को श्री कृष्ण के साथ हमेशा से याद किया जाता रहा है। यूं कहा जाए कि राधा के बिना श्याम का नाम अधूरा ही है। इसी वजह से श्री कृष्ण के जन्मोत्सव यानी कि कृष्ण जन्माष्टमी के कुछ ही दिनों बाद राधा रानी का जन्मदिन मनाया जाता है। जहां एक तरफ भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तिथि पर कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है तो वहीं शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि तिथि को राधा जी के जन्मदिवस के रूप में राधा अष्टमी मनाई जाती है। 

इस दिन मथुरा के राधारानी मंदिर समेत पूरे देश में बड़ी ही धूम-धाम से जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन पूरे ब्रजधाम और खासतौर पर बरसाने में विशेष धूम रहती है। मान्यता है कि राधाष्टमी पर राधा जी का पूजन किए बिना कृष्ण जन्माष्टमी का पूजन अधूरा रहता है। आइए नई दिल्ली के पंडित एस्ट्रोलॉजी और वास्तु विशेषज्ञ, प्रशांत मिश्रा जी से जानें इस साल कब मनाई जाएगी राधाष्टमी और इसका क्या महत्व है। 

राधा अष्टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त

radha ashtami

हिन्दू मान्यताओं के हिसाब से भाद्रपद मास यानी भादों का पूरा महीना पूरी तरह से भगवान कृष्ण और राधा जी के पूजन को समर्पित माना जाता है। इस माह में कृष्ण जन्माष्टमी के पंद्रह दिन बाद राधा अष्टमी मनाई जाती है। 

  • इस साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितम्बर 2021, मंगलवार के दिन मनाई जाएगी। 
  • अष्टमी तिथि आरंभ -13 सितंबर, सोमवार  को दिन में 03.11 बजे से 14 सितंबर को 01.09 बजे तक रहेगी।
  • उदया तिथि में अष्टमी तिथि 14 सितंबर के दिन है इसलिए इसी दिन राधा जी का जन्मदिन मनाया जाएगा। 

राधा अष्टमी में कैसे करें पूजन 

how to perform puja

  • इस दिन प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। 
  • एक स्वच्छ आसन पर राधा-कृष्ण के संयुक्त चित्र या मूर्ति को को स्थापित करें। 
  • सबसे पहले राधा-कृष्ण की मूर्ति को पंचामृत (लड्डू गोपाल के पंचामृत स्नान का महत्त्व) से स्नान कराएं और नए वस्त्रों से सुसज्जित करें। 
  • भगवान को धूप,दीप,,नैवेद्य आदि अर्पित करें। 
  • श्री कृष्ण का राधा जी समेत पूरे श्रद्धा भाव से पूजन करें। 
  • इस दिन राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत का पाठ जरूर करें। 

Recommended Video

राधा अष्टमी का महत्व 

राधाष्टमी का पर्व राधा जी के जन्म से संबंधित है। श्री कृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के15 दिन बाद ब्रज के रावल गांव में राधा जी का जन्म हुआ था। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति जन्माष्टमी का व्रत रखता है उसे राधा अष्टमी का व्रत भी रखना चाहिए अन्यथा व्रत का सम्पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। स्कंद पुराण के अनुसार राधा जी भगवान् श्रीकृष्ण की आत्मा हैं। इसलिये उन्हें राधारमण कहकर पुकारा जाता है। ऐसा माना जाता है कि राधा अष्टमी के दिन राधा जी का व्रत और पूजन करने से सुख, सौभाग्य और संतान प्राप्ति होती है तथा मोक्ष का द्वार भी खुल जाता है। इस व्रत को रखने वाले व्यक्ति पर श्री कृष्ण की विशेष कृपा दृष्टि प्राप्त होती है। इसलिए पूरे श्रद्धा भाव से इस दिन राधा रानी का श्री कृष्ण जी समेत पूजन करना चाहिए। 

इसे जरूर पढ़ें:ज्योतिष एक्सपर्ट से जानें कब है गणेश चतुर्थी का त्योहार, पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

इस प्रकार राधा अष्टमी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व है और उपर्युक्त तरीके से इस दिन पूजन करना फलदायी माना जाता है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: freepik and wallpaper