हिन्दू धर्म के अनुसार प्रदोष व्रत का विशेष महत्त्व है। साल में पूरे 24 प्रदोष व्रत होते हैं और एक माह में 2 प्रदोष व्रत रखने का विधान है। महीने का पहला प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष में और दूसरा प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष में रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह व्रत रखने से भगवान  शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस दिन मुख्य रूप से भगवान् शिव का  माता पार्वती समेत पूजन किया जाता है।

फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का विशेष महत्त्व है। आइए अयोध्या के जाने माने पंडित राधे शरण शास्त्री जी से जानें किस दिन है फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में प्रदश व्रत और क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त। 

फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रदोष व्रत तिथि 

shiv pujan pradosh

प्रदोष व्रत मुख्य रूप से त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस माह यानी कि फाल्गुन माह में त्रयोदशी तिथि 26 मार्च को है इसलिए प्रदोष व्रत 26 मार्च, दिन शुक्रवार को रखा जाएगा । प्रदोष व्रत का नाम उस दिन पड़ रहे दिन के अनुसार होता है इस बार 26 मार्च शुक्रवार को है इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ शिवजी का पूजन करना लाभकारी होता है। 

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प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

shiv pujan muhurat

  • त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ- 26 मार्च, शुक्रवार को सुबह 08 बजकर 21 मिनट से
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त- 27 मार्च, शनिवार को सुबह 06 बजकर 11 मिनट से
  • प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त- सायं 6 बजकर 36 मिनट से रात्रि 8 बजकर 56 मिनट तक

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

significance pradosh vrat

महीने में जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है तब इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन शिव जी का पूजन करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। इस व्रत के नाम से ही पता चलता है कि ये सभी दोषों से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत का सम्बन्ध भगवान् शिव के साथ चंद्र देव से भी जुड़ा हुआ है। प्रदोष व्रत की कथानुसार सबसे पहले चंद्रदेव ने ही प्रदोष व्रत किया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रजापति दक्ष ने चंद्रदेव को क्षय रोग का श्राप दिया था और वह इस रोग से ग्रस्त हो गए थे। इससे मुक्ति पाने के लिए उन्होंने हर महीने त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत किया था और उन्हें सभी रोगों और पापों से मुक्ति मिली थी। प्रदोष व्रत में भगवान् शिव का माता पार्वती समेत पूजन करने से संतान इच्छा की पूर्ति होने के साथ संतान का स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है। 

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कैसे करें पूजन 

pujan vidhi pradosh

  • प्रदोष व्रत में प्रातः जल्दी उठकर स्नान करके स्वस्छ वस्त्र धारण करें। 
  • पूजा के स्थान को अच्छी तरह से साफ़ करें और शिव जी की मूर्ति या शिवलिंग को स्नान कराएं। 
  • भगवान शिव को चंदन लगाएं और नए वस्त्रों से सुसज्जित करें। 
  • शिव प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर फूल, धतूरा और भांग चढ़ाएं या ताजे फलों का भोग अर्पित करें।  
  • प्रातः काल का पूजन करने के पश्चात पूरे दिन बिनाअनाज खाए हुए व्रत का पालन करें। 
  • प्रदोष काल में शिव पूजन करें, प्रदोष व्रत की कथा सुनें व पढ़ें और सफ़ेद चीज़ों का भोग अर्पित करें। 
  • शिव जी की आरती करने के बाद भोग सभी को वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें। 
  • भोग में खीर या हलवा बनाकर शिव जी अर्पित करना लाभकारी होता है। 

पूरे श्रद्धा भाव से प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजन करने से समस्त इच्छाओं की पूर्ति होने के साथ पापों से मुक्ति भी मिलती है। 

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Image Credit:pintrest