हिन्दू धर्म के अनुसार एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है। एक महीने में दो एकादशी तिथियां होती हैं। पहली कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। इस प्रकार पूरे साल में 24 एकादशी तिथियां होती हैं। इन सभी तिथियों का अपना अलग महत्त्व है और इन्हें विशेष रूप से विष्णु पूजन के लिए जाना जाता है। हर एक तिथि में पूरे श्रद्धा भाव से विष्णु जी का व्रत एवं पूजन किया जाता है जिनका फल भी अलग-अलग तरीके से मिलता है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति पूरे मॉनयोग से और श्रद्धा भाव से व्रत एवं पूजन करता है उसे सभी पापों से मुक्ति मिलने के साथ उसकी मनोकामनाओं की पूर्ति भी होती है। ऐसी ही एकादशी तिथियों में से एक है भाद्रपक्ष मॉस के शुक्ल पक्ष की एकदशी तिथि, इसे परिवर्तनी एकदशी या पद्मा एकादशी के नाम से जाना जाता है। आइए नई दिल्ली के पंडित एस्ट्रोलॉजी और वास्तु विशेषज्ञ, प्रशांत मिश्रा जी से जानें इस साल कब है यह व्रत और इसका क्या महत्त्व है।

परिवर्तनी एकादशी व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त

ekadashi vrat shubh muhurat

हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी या परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि परिवर्तनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु निद्रासन में अपनी करवट बदलते हैं। इस साल भाद्रपाद माह के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि 17 सितंबर, शुक्रवार के दिन पड़ेगी और इसी दिन यह व्रत करना फलदायी होगा।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ - 16 सितंबर, गुरुवार को प्रातः 09 बजकर 39 मिनट से
  • एकादशी तिथि समाप्त - 17 सितंबर की प्रातः 08 बजकर 08 मिनट तक 
  • चूंकि उदया तिथि में एकादशी तिथि 17 सितंबर को है इसलिए इसी दिन यह व्रत करना फलदायी होगा।

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परिवर्तनी एकादशी व्रत का महत्व

हिन्दू धर्म में ऐसे मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान् विष्णु 4 महीने की योग निद्रा में चले जाते हैं और परिवर्तनी एकादशी के दिन करवट बदलते हैं। इसलिए ऐसा माना जाता है कि इस दिन विष्णु जी की श्रद्धा भाव से पूजा करने से यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा सुनी जाती है और  इस व्रत को करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा दृष्टि भक्तों पर बनी रहती है।

परिवर्तिनी एकादशी में कैसे करें पूजन

lord vishnu pujan

  • जो लोग इस एकादशी का व्रत करते हैं उन्हें प्रातः जल्दी उठाकर स्नान आदि से निवृत्त होकर विष्णु जी का पूजन करना चाहिए।
  • इस दिन विष्णु जी के वामन अवतार को ध्यान में रखते हुए उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं जिसमें दही, दूध, घी, शक्कर, शहद आदि मिला हुआ हो।
  • इसके पश्चात गंगा जल से स्नान करवा कर भगवान विष्णु को कुमकुम और चन्दन लगाएं।
  • इस दिन विष्णु जी के वामन अवतार की कथा सुनने और दूसरों को सुनाने का विशेष महत्त्व है।
  • यदि आप व्रत का पालन करते हैं तो इस दिन फलाहार रहन करें और नमक का सेवन न करें।
  • जो लोग व्रत नहीं करते हैं उन्हें भी इस व्रत वाले दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्त्व है इसलिए पूजा के समय तुलसी माता के सामने दीप प्रज्जवलित करें।
  • विष्णु जी को भोग अर्पित करते समय तुलसी दल अवश्य रखें।
  • विष्णु भगवान् की कथा सुनने के बाद आरती करें और भोग लगाकर सभी लोगों को खिलाएं।

इस प्रकार पूरे मनोयोग से विष्णु पूजन करने और श्रद्धा भाव से उनके वामन अवतार की कथा सुनने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसलिए यदि आप यह व्रत करते हैं तो भगवान् की विशेष कृपा दृष्टि बनी रहती है।

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