हिंदू धर्म में एकदशी तिथि का विशेष महत्त्व है। एक महीने में दो बार एकादशी तिथियां होती हैं पहली कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में ,वहीं पूरे साल में 24 एकादशी तिथियां होती हैं। प्रत्येक एकादशी अपने आप में विशेष महत्त्व रखती है क्योंकि हर एकादशी में अलग तरीके से व्रत व पूजन किया जाता है। एकादशी व्रत में मुख्य रूप से भगवान् विष्णु का पूजन अर्चन किया जाता है। 

ऐसी मान्यता है कि जो मनुष्य एकादशी तिथियों में व्रत और विष्णु पूजन करता है उसकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए इस व्रत का शास्त्रों में भी विशेष महत्त्व बताया गया है। इसी तरह अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी  तिथि का भी विशेष महत्व है जिसे पापाकुंशा एकादशी भी कहा जाता है। आइए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें इस साल कब मनाई जाएगी पापाकुंशा एकादशी, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्त्व। 

पापाकुंशा एकादशी की तिथि और मुहूर्त 

papankusha ekadashi shubh muhurt

  • इस साल अश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 16 अक्टूबर दिन शनिवार को पड़ेगी। इसलिए इसी दिन एकादशी का व्रत रखा जाएगा। 
  • अश्विन मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि आरंभ-15 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को शाम 06 बजकर 02 मिनट से 
  • अश्विन मास शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि समाप्त-16 अक्टूबर 2021 दिन शनिवार को शाम 05 बजकर 37 मिनट पर  
  • चूंकि उदया तिथि में एकादशी 16 अक्टूबर को है इसलिए इसी दिन व्रत और विष्णु जी का पूजन फलदायी होगा। 
  • पारण के दिन द्वादशी तिथि समाप्ति समय- 17 अक्टूबर 2021 दिन रविवार को शाम  05 बजकर 39 मिनट पर 
  • एकदाशी व्रत पारण का समय-प्रातः 06 बजकर 23 मिनट से 08 बजकर 40 मिनट

पापाकुंशा एकादशी का महत्व

ऐसा  माना जाता है कि महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्टिर और अर्जुन को एकादशी व्रत के महत्व बारे में बताया था। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को सच्चे मन से करने से यज्ञ व तप के समान फल मिलता है। इसके साथ ही मनुष्यों के पापकर्मों का भी नाश इस व्रत के द्वारा होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के दिन मौन रहकर भगवद् स्मरण करना चाहिए इसके साथ ही भजन-कीर्तन करने का विधान भी है। पापाकुंशा एकादशी में मुख्य रूप से भगवान श्री हरि विष्णु (भगवान विष्णु से जुड़े 10 सवाल)के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के दौरान भगवान विष्णु की आराधना करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

पापाकुंशा एकादशी पूजा विधि 

puja vidhi ekadashi

  • इस व्रत में भी अन्य सभी व्रतों की तरह प्रातः जल्दी उठें एवं स्नान आदि से मुक्ति पाकर साफ़ वस्त्र धारण करें। 
  • घर के मंदिर की सफाई करें और सभी भगवानों को स्नान कराकर नए वस्त्र धारण कराएं। 
  • एक चौकी पर साफ़ कपड़ा बिछाएं और भगवान् विष्णु की तस्वीर या मूर्ति रखें। 
  • विष्णु जी की तस्वीर को साफ़ करके उस पर चंदन लगाएं और इसमें पीले फूल चढ़ाएं। 
  • धूप दीप प्रज्ज्वलित करके विष्णु भगवान् के सामने बैठकर पूजन करें। 
  • विष्णु जी को पीले वस्त्रों से सुसज्जित करके पीले फूलों के साथ भोग अर्पित करें। 
  • विष्णु जी का माता लक्ष्मी समेत पूजन करें और आरती करें। 
  • पूरे दिन व्रत का पालन करें और द्वादशी तिथि के दिन विधि विधान से व्रत का पारण करें। 

इस प्रकार एकादशी तिथि के दिन पूरे विधि विधान से विष्णु पूजन करना विशेष रूप से फलदायी होता है और इससे सभी पापों से मुक्ति मिलती है। 

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Image Credit: freepik