लंचबॉक्स फेम निमृत कौर ने बहुत कम वक्त में बॉलीवुड में बड़ा मुकाम हासिल किया है। 'एयरलिफ्ट', 'एनकाउंटर' और 'लव-शव ते चिकन खुराना' जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी निमृत कौर 'Homeland' और 'Wayward Pines' जैसे इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स में भी नजर आईं। टैलेंटेड एक्ट्रेस निमृत कौर ने रक्षाबंधन पर HerZindagi की खास मुहिम #BandhanNahiAzaadi के लिए खास बातचीत। आइए जानें उनके विचारों के बारे में- 

HZ: क्या अब रक्षाबंधन के बारे में नए नजरिए से सोचने का वक्त आ गया है? 

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रक्षाबंधन हमारा पारंपरिक त्योहार है। यह त्योहार भाई-बहन के प्यार का जश्न मनाता है। इस त्योहार के साथ बहुत सारा स्नेह और इमोशन्स जुड़े हुए हैं। इस त्योहार के मौके पर अगर ये कहा जाए कि हमें किसी की रक्षा की जरूरत नहीं हैं तो यह थोड़ा ज्यादा कठोर बात हो जाएगी। मेरा भाई नहीं है, इसीलिए मैं इस फीलिंग के साथ बड़ी नहीं हुई। लेकिन मुझे लगता है कि महिलाओं को हमेशा अपनी देखभाल के लिए खुद को इमोशनली, फिजिकली, मेंटली, स्पिरिचुअली तैयार रहना चाहिए। लड़कियों को देखभाल के लिए किसी और पर निर्भर रहने की जरूरत है-इस विचार के साथ बेटियों की परवरिश नहीं होनी चाहिए। अगर रक्षाबंधन के त्योहार को किसी को कमजोर करके दिखाने की कोशिश की जाती है, तो हमें इसकी जरूरत नहीं है। लेकिन अगर यह प्यार और सपोर्ट देता है, तो अपनी परंपरा को निभाने में कोई हर्ज नहीं है। इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं हो सकता। ये कह देना कि हमें रक्षाबंधन की जरूरत नहीं है, ये थोड़ी किताबी बात हो जाएगी। 

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HZ: आपकी नजर में महिलाओं की आजादी के क्या मायने हैं?

मेरे लिए आजादी का मतलब है शिक्षा पाना, क्योंकि शिक्षा ही सही मायने में महिलाओं को आजाद करती है। मेरा मानना है कि शिक्षा हमारा मूल और संवैधानिक अधिकार है। शिक्षा दुनिया की हर लड़की को मिलनी चाहिए, यह कुछ लोगों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह आज के समय की अहम जरूरत है। शिक्षा से महिलाएं खुद को सही मायने में ग्रो कर सकती हैं और जो चाहती हैं, उसे हासिल कर पाती हैं।  

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HZ: आपको क्या लगता है कि आजादी पाने की राह में कौन से बंधन हैं?

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कई बार मुझे अपनी महत्वाकांक्षाओं से थोड़ा डर लगता है। हर महिला एक खास तरह के माहौल में पली-बढ़ी होती है और उसी के अनुसार उसकी सोच होती है। कई बार मन में यह सवाल उठता है कि जो हमें मिला है, क्या हमें उसी में संतुष्ट हो जाना चाहिए, क्योंकि हमें नहीं पता कि भविष्य में क्या होने वाला है। लेकिन साथ ही मैं ये भी कहूंगी कि ख्वाब देखने में डरना नहीं चाहिए। 

HZ: महिलाएं इमोशनल बंधनों से कैसे आजाद हो सकती हैं?

मुझे परिवार से इमोशनल लेवल पर किसी तरह की तकलीफ नहीं हुई, क्योंकि परिवार में सभी मेरे लिए सपोर्टिव रहे। लेकिन बाहरी दुनिया में ऐसे बहुत से लोग मिले, जिन्होंने खुद को मेरा शुभचिंतक बताया, लेकिन मेरे आगे बढ़ने में उन्होंने मुश्किलें खड़ी कीं। मुझे कहा गया, 'तुम तो सर्विस बैकग्राउंड वाली पृष्ठभूमि से आती हो, बॉलीवुड में कैसे काम करोगी। बहुत सारे लोग मुंबई जाते हैं और भीड़ में खो जाते हैं।' लोगों के भीतर जो डर थे, उनसे उन्होंने मुझे डराने की कोशिश की। लंबे समय तक मुझे इस तरह की नेगेटिविटी का सामना करना पड़ा, बहुत से करीबी लोगों ने मुझे हतोत्साहित करने की कोशिश की, कहा कि मैं कैसे मुंबई में मैनेज करूंगी। बहुत सारे लोग इसे अच्छा नहीं समझते, क्योंकि उन्हें इसके बारे में पता नहीं होता। लेकिन इन चीजों की परवाह किए बगैर मैंने अपनी मेहनत जारी रखी

HZ: जब आपने बॉलीवुड में खुद को स्थापित किया तो क्या आपको यहां भी संघषों का सामना करना पड़ा?

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जहां तक पुरुषों और महिलाओं को समान वेतन मिलने की बात है, मुझे नहीं लगता कि मेरे साथ कभी इस तरह का भेदभाव हुआ। लेकिन ये जरूर है कि काम करते हुए कई तरह की चीजें सुनने को मिलीं जैसे कि तुम्हें टीनेज में इंडस्ट्री में आ जाना चाहिए था। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोगों को पता नहीं होता कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है और दूसरा यह कि वे अपनी चली आ रही चीजों से इतर कुछ नया नहीं सोच पाते, इसीलिए वे घिसी-पिटी बातें करते हैं। ये महज एक नजरिया है और मैं इसे नहीं मानती। मैं दूसरे लोगों के सोचने के हिसाब से नहीं चल सकती हूं।  

HZ: क्या महिलाओं को सशक्त होने की जरूरत है?

महिलाएं जागरूक हैं और उन्हें पता है कि वे क्या करना चाहती हैं। महिलाओं को उन लोगों से काफी प्रोत्साहन मिल रहा है, जिनमें अपने विचार जाहिर करने का साहस है। चाहें वे महिलाओं के मुद्दे हों या नागरिकों के, इनसे महिलाओं को बहुत साहस मिलता है। आज महिलाएं सांसद हैं, वकील हैं, टीचर हैं, सोशल सर्विस में हैं, महिलाएं इतनी कमाल की चीजें कर रही हैं कि लोग उनसे इंस्पिरेशन ले रहे हैं और इसका बहुत बड़ा क्रेडिट सोशल मीडिया को जाता है। आज ही महिलाएं काफी साहसी हैं और मुझे इस बात की खुशी है। 

HZ: क्या आपको कभी इस बात का अहसास कराने की कोशिश की गई कि आप महिला हैं तो आपके लिए चीजें आसान हैं?

नहीं, ऐसा मेरे साथ कभी नहीं हुआ। मैंने बहुत साधारण जिंदगी जी है और हर स्तर पर खुद को प्रूव करने की कोशिश की है। लोगों ने यही सोचा कि अगर ये सफल हो सकती है तो हम क्यों नहीं। मैं सर्विस बैकग्राउंड से आती हूं और मैंने अपने लिए जो सपना देखा, उसे हासिल किया। 

HZ: क्या कुछ बंधन हैं, जिन्हें महिलाओं को अपने साथ रखना चाहिए?

मुझे लगता है कि सड़क पर चलते हुए महिलाओं को स्पीड लिमिट का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जब मैं ड्राइव करती हूं और तेज चलाती हूं तो मेरा ड्राइवर मुझे धीरे चलाने के लिए कहता है।

स्‍वतंत्रता दिवस और रक्षा बंधन के अवसर पर HerZindagi महिलाओं के लिए एक exclusive वर्कशॉप प्रस्‍तुत कर रहा है। हमारे #BandhanNahiAzaadi अभियान का हिस्सा बनने के लिए आज ही फ्री रजिस्ट्रेशन करें। सभी प्रतिभागियों को मिलेगा आकर्षक इनाम।