हमें यह सोचने पर मजबूर किया जाता है कि एक महिला का उद्देश्य सिर्फ जन्म देना है। हमारा परिवार, हमारी फिल्में और हमारा समाज उस महिला को अपराध बोध से दबा देता है, जो मां नहीं बन सकती। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इस देश में हर चार में से एक कपल इनफर्टिलिटी की समस्या से गुजर रहा है। यह एक ऐसी समस्या है, जिसने दुनिया भर के 15 प्रतिशत को प्रभावित किया है और इस बारे में हमारे समाज में बात की भी जाती है, तो दबी आवाज में की जाती है। यह साल 2021 है और आज भी इसका दंश सिर्फ एक महिला को भुगतना पड़ता है। इनफर्टिलिटी से जुड़ी शर्मिंदगी उसी को सहनी पड़ती है। गुड़गांव के सीके बिड़ला हॉस्टिपटल में इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर प्राची बेनारा से जानिए इनफर्टिलिटी से जुड़ी अहम जानकारी। 

डॉ. बेनारा कहती हैं, 'यह एक ऐसी भावना है, जिससे मैं अपने एक दशक से अधिक करियर में कई बार रूबरू हुई हूं। मनुष्य बायोलॉजिकल तरीके से प्रजनन करता है, लेकिन जब यह नेचुरल तरीका काम नहीं करता, तो निराशा होती है। लेकिन इनफर्टिलिटी की समस्या ने महिलाओं पर अत्यधिक बोझ डाल दिया है, जबकि वास्तव में पुरुष भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये दोष अक्सर महिलाओं के ऊपर इसलिए मढ़ दिए जाते हैं, क्योंकि प्रेग्नेंसी और चाइल्डबर्थ से एक महिला ही गुजरती है।'

सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं है इनफर्टिलिटी

infertility in couples

एक महिला के लिए, इनफर्टिलिटी सामाजिक बहिष्कार के साथ आता है। कभी-कभी तो इस वजह से तलाक, लो सेल्फ-वर्थ, मानसिक विकार और यहां तक कि आत्महत्या जैसी स्थितियां भी पैदा हो जाती हैं। दरअसल, समस्या यह है कि इनफर्टिलिटी एक ऐसी चीज है जिसके बारे में बहुत से लोग तब तक नहीं जानते, जब तक कि वे सीधे तौर पर इससे रूबरू नहीं होते। वहीं जब वे इसका सामना करते भी हैं, तो इसे ऑटोमेटिकली ‘महिलाओं की समस्या’ मान लिया जाता है। हालांकि कुछ रिसर्च अलग कहानी बयां करती हैं। सभी इनफर्टिलिटी के मामलों में, 40 प्रतिशत पुरुषों को, 40 प्रतिशत महिलाओं को और 20 प्रतिशत दोनों पुरुष और महिलाओं को इस समस्या का जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। चूंकि, पिछले कुछ समय से ही पुरुष इनफर्टिलिटी के बारे में बातें होने लगी हैं, तो कंसेप्शन का सारा दोष महिला के खाते में जाता है।

इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि कई सारे कपल्स इनफर्टिलिटी की समस्या के लिए मदद मांगने से हिचकिचाते हैं। आईवीएफ, आईयूआई जैसे लोकप्रिय इनफर्टिलिटी प्रोसीजर्स को अब भी वर्जित माना जाता है। बहुत से लोग दवा और विज्ञान के ऊपर घरेलू उपचार और हैक्स की मदद लेना पसंद करते हैं और अक्सर अपना कीमती समय गंवा देते हैं। डॉ. बेनारा कहती हैं, ‘मैंने मेरे क्लिनिक में आने वाले कई लोगों में असफलता की एक निराधार भावना देखी है। हालांकि, काउंसलिंग के जरिए, मैं अपने मरीजों में फैक्ट्स और विज्ञान की समझ पैदा कर, अपने छोटे-छोटे तरीकों से इससे जुड़ी रूढ़ियों को चुनौती दे रही हूं।’

क्या है इनफर्टिलिटी और इसके कारण?

इनफर्टिलिटी क्या है, इसके क्या कारण हैं और मॉर्डन मेडिसिन क्या उपचार प्रदान करती है, ये जानना वाकई दिलचस्प है। सबसे पहले तो कपल्स को बिल्कुल भी पैनिक नहीं करना चाहिए, अगर वे कुछ समय से कंसीव करने का ट्राई कर रहे हों और कंसीव नहीं कर पा रहे हों। इसकी परिभाषा के मुताबिक, इनफर्टिलिटी वो समस्या है, जिसमें 12 महीनों तक अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स के भी आप नेचुरली कंसीव नहीं कर पाते हैं। महिलाओं में इनफर्टिलिटी इन कारणों से हो सकती है-

  • फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज जैसी किसी समस्या की वजह से। अगर आप फीमेल रिप्रोडक्टिव सिस्टम के बारे में जानते हैं, तो आप अच्छे से समझ सकते हैं कि ट्यूब में रुकावट, स्पर्म और एग को मिलने नहीं देती। इसी कारण से गर्भधारण नहीं हो पाता। फैलोपियन ट्यूब में अवरोध, एक अनुपचारित सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STIs), असुरक्षित गर्भपात, पोस्टपार्टम सेप्सिस या फिर एब्डोमिनल/पेल्विक सर्जरी की जटिलताओं के कारण हो सकता है।
  • पॉलिप, फाइब्रॉइड्स और अन्य यूट्राइन डिसऑर्डर की वजह से भी महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • इसी तरह, पीसीओस डिसऑर्डर या लो ओवेरियन रिजर्व जैसे विकार की वजह से भी गर्भधारण में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
  • एंडोक्राइन सिस्टम डिसऑर्डर के कारण रिप्रोडक्टिव हार्मोन में होने वाले असंतुलन से भी इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है।

इसी तरह पुरुषों में इनफर्टिलिटी के कुछ अन्य कारण होते हैं। जैसे कि-

  • रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट में किसी तरह की ब्लॉकेज के कारण सीमेन इजैक्युलेशन में समस्या होने से ऐसा हो सकता है।
  • हार्मोन में किसी तरह एब्नार्मेलिटी भी इसका कारण हो सकता है।
  • कम या बिगड़ा हुआ स्पर्म प्रोडक्शन भी एक कारण है।
  • अगर स्पर्म काउंट अच्छा भी हो, तो भी एब्नार्मल स्पर्म फंक्शन और स्पर्म की खराब गुणवत्ता भी फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती है।

न सिर्फ फिजियोलॉजी, बल्कि पर्यावरण और जीवन शैली भी आपकी फर्टिलिटी को प्रभावित करती है। तनाव, मोटापा, स्मोकिंग, अल्कोहल का ज्यादा सेवन जैसी चीजें भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

इनफर्टिलिटी के लिए भी मेडिकल हेल्प जरूरी

infertility condition in women

डॉ. बेनारा कहती हैं, ‘एक इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट होने के नाते मैं यही कहूंगी कि ज्ञान ही शक्ति है। मेरा मानना है कि प्रजनन परीक्षण अधिक सुलभ होना चाहिए और एडल्ट्स खुद को इस बारे में शिक्षित करें। इसके बारे में जानें। हालांकि, गर्भावस्था और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज की रोकथाम के बारे में जागरूकता में वृद्धि तो हुई है पर अब समय आ गया है कि आप अपनी फर्टिलिटी के बारे में भी जागरूक हों। जब आप अपने फर्टाइल दिनों के बारे में, अपनी  रिप्रोडक्टिव साइकिल के बारे में जानेंगी, तभी ‘ज्ञान ही शक्ति है’ जैसे वाक्य सार्थक होंगे। एग और स्पर्म बैंकिंग जैसे विकल्पों के बारे में जानें और पढ़ें। हेल्थ सेक्टर और समाज से मेरा यही विनम्र निवेदन है कि दूसरों को जज करना बंद करें और सुनना शुरू करें। जैसे आप पेट दर्द या बुखार में डॉक्टर से मेडिकल हेल्प लेते हैं। वैसे ही इनफर्टिलिटी के लिए मेडिकल हेल्प लेना भी तमाम वर्जनाओं और शर्म से मुक्त होना चाहिए।’

आज, मेडिकल के क्षेत्र में जिस तरह की प्रगति हमने की है, मेरे जैसे विशेषज्ञ ऐसे कई वैकल्पिक तरीके आपको बता सकते हैं, जो कई लोगों की इनफर्टिलिटी जर्नी को बदल सकते हैं। एक डॉक्टर होने के नाते मैंने ऐसे परिवार भी देखे हैं, जो साथ आते हैं और बिल्कुल कम इंटरवेंशन और दवाओं के साथ कंसेप्शन का उनका सपना सच्चाई में तब्दील होते देर नहीं लगती। वहीं, अन्य लोगों के लिए बच्चे होने का सपना आईवीएफ जैसे प्रोसीजर के जरिए पूरा हो सकता है। इसके लिए आपको बस एक विशेषज्ञ की जरूरत, परिवार का समर्थन, प्यार और विश्वास की आवश्यकता होती है।

(इस क्षेत्र में 11 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, डॉ प्राची बेनारा को कई सम्मान से नवाजा जा चुका है- एमबीबीएस, एमएस (ओबीजी), डीएनबी (ओबीजी), एमआरसीओजी (पार्ट 2, लंदन), ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी सर्टिफिकेशन (यूके), यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स (यूके) से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रिप्रोडक्टिव एंड सेक्सुअल हेल्थ, ऑब्जर्वर इन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी अस्पताल एनएचएस (यूके)। वह वर्तमान में गुड़गांव में फर्टिलिटी और आईवीएफ सेंटर, सीके बिड़ला हॉस्पिटल के साथ काम कर रही हैं।)

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