मोहम्मद जहूर खय्याम हाश्मी यानी गुजरे जमाने के सबसे सफल म्यूजिक डायरेक्टर में से एक खय्याम साहब अब हमारे बीच नहीं रहे। खय्याम साहब का नाम याद आते ही मुझे याद आता है 'मैं पल दो पल का शायर हूं', वो गाना जो न सिर्फ मेरे पसंदीदा गानों में से एक है बल्कि खय्याम के कई गाने चार दशकों तक हज़ारों लोगों के फेवरेट रहे हैं।  

18 फरवरी 1927 को जन्मे खय्याम की 19 अगस्त 2019 को लंग इन्फेक्शन के कारण जुलाई में अस्पताल में भर्ती करवाया गया और कल रात 9.30 बजे उन्हें कार्डिएक अरेस्ट हो गया। खय्याम को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, पद्मभूषण, संगीत नाटक एकेडमी जैसे प्रतिष्ठित पुरुस्कार मिल चुके हैं। उनका करियर 1953 से 1990 तक 4 दशकों में भी नहीं खत्म हुआ। फिल्म 'कभी-कभी', 'उमराव जान' जैसी म्यूजिकल हिट्स देने वाले खय्याम को इन दोनों ही फिल्मों के लिए बेस्ट म्यूजिक फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।  

khayyam and sonu nigam

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घर से भागकर सीखा था संगीत-  

खय्याम ने घर से भागकर संगीत सीखा था। वो जालंधर के पास एक छोटे से गांव से भागकर दिल्ली आ गए थे। यहां जैसे-तैसे पढ़ाई खत्म करने के बाद वो संगीत सीखने लाहौर गए जहां उन्होंने बाबा चिश्ती से संगीत सीखा। बॉलीवुड की फिल्में खय्याम को आकर्षित करती थीं और वो संगीत को समझना चाहते थे।  

khayyam and asha bhosle

खय्याम साहब के लाखों फैन्स हैं और उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही नरेंद्र मोदी से लेकर लता मंगेशकर तक सभी ने ट्वीट किए।  

लता मंगेशकर के साथ खय्याम साहब ने सबसे ज्यादा काम किया था और लता जी के ट्वीट से ये बात साफ जाहिर होती है कि उन्हें इसका कितना दुख हुआ है। 

 खय्याम साहब के सभी गाने वैसे तो बेहतरीन हैं पर अगर मुझे 10 गाने चुनने हों तो वो ये होंगे- 

1. मैं पल दो पल का शायर हूं- 

इस गाने को मुकेश ने गाया था और बोल थे साहिर लुधियानवी के। खय्याम का संगीत इस गाने में चार चांद लगाता है। ये गाना खय्याम के सबसे हिट गानों में से एक है। इसे अमिताभ बच्चन पर फिलमाया गया था और फिल्म थी, 'कभी-कभी'। 

2. बहारों मेरा जीवन भी संवारो- 

ये गाना था फिल्म आखिरी खत का जो राजेश खन्ना की पहली फिल्म थी। इस गाने के बोल लिखे थे कैफी आजमी ने और इसे गाया था लता मंगेशकर ने।  

3. कभी-कभी मेरे दिल में- 

अमिताभ बच्चन और राखी गुलज़ार पर फिल्माया गया ये गाना भी खय्याम के सबसे अच्छे म्यूजिक कम्पोजिशन में से एक माना जाता है। 

4. इन आंखों की मस्ती के- 

फिल्म उमराव जान भी खय्याम के करियर की सबसे हिट फिल्म में से एक साबित हुई। इस फिल्म के लिए भी खय्याम को बेस्ट म्यूजिक का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। 'इन आंखों की मस्ती के' गीत अपने आप में सुपरहिट था।  

5. वो सुबह कभी तो आएगी- 

राज कपूर की फिल्म "फिर सुबह होगी' का ये गाना भी अलग कहानी कहता है। दुख के मूड को दिखाता हुआ ये गाना भी खय्याम के हिट गानों में से एक था।  

6. करोगे याद तो हर बात-  

नसीरुद्दीन शाह और स्मिता पाटिल की फिल्म 'बाजार' का ये गाना भी काफी फेमस हुआ था। भूपेंदर सिंह द्वारा इस गाने को गाया गया था।  

7. ऐ दिले नादान-

हेमा मालिनी की फिल्म रज़िया सुल्तान का ये गाना कई लोगों का फेवरेट बन गया था। लता मंगेशकर की आवाज़ में जादू था और उस जमाने में ये रोमांटिक गाना काफी पसंद किया गया था।  

8. आजा रे ओ मेरे दिलबर-

फिल्म थी नूरी और ये समय था फारुख शेख और पूनम डिल्लों की फिल्म का। इस समय लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को म्यूजिक डायरेक्ट करना था, लेकिन किसी विवाद के चलते आखिर में खय्याम का नाम सामने आया।

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9. कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता- 

खय्याम के एल्बम 'आहिस्ता-आहिस्ता' का ये गाना शायद 1981 के सबसे हिट गानों में से एक था। 

10. हज़ार राहें मुड़कर देखीं-

ये गाना है फिल्म 'थोड़ी सी बेवफाई' का। ये अकेली ऐसी फिल्म थी जिसमें खय्याम और गुलज़ार ने साथ में काम किया था।