भारत में ऐसी कई महिलाएं रही हैं जिन्होंने शिक्षा के लिए कई काम किए। जब भी हम और आप शिक्षा की बात करते हैं तो हमेशा डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णा को याद करते हैं लेकिन, साथ ही हमें ऐसी महिला शिक्षकों को भी याद करना चाहिए जिन्होंने भारतीय समाज और महिला शिक्षा प्रणाली का रुख ही बदल दिया। 80-90 के दशक में भारतीय शिक्षा के में क्षेत्र ऐसी कई महिलाएं रही हैं जिन्हें हम आज याद करते हैं। आज इस लेख में मैं आपको उन भारतीय महिलाओं से परिचय कराने जा रहा हूं जिन्होंने बाल-शिक्षा से लेकर समाज में फैले कई महिला अधविश्वास को दूर करने में अहम् योगदान दिया है। तो चलिए शुरू करते हैं इस सफर को-

सावित्री बाई फुले 

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इस सूची में सबसे पहले नाम आता है सावित्री बाई फुले का। भारत की सबसे पहली महिला शिक्षक के तौर पर सावित्री बाई को जाना जाता है। इनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने हमेशा ही लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया और समाज में फैले अध्विश्वसों को दूर करने के लिए लड़ाई लड़ी। 8 साल की उम्र में ही सावित्री बाई फुले की शादी हो गई थी लेकिन, फिर भी शादी के बाद भी शिक्षा और समाज सेवा के काम करती रही। इन्होने साल 1848 में पुणे में बालिका विद्यालय की स्थापना भी की। सावित्री बाई ने बालहत्या, महिला यौन शोषण सुधार और विधवाओं के लिए सुरक्षित घर बनाना जैसे कई कामों में अहम् योगदान दिया।

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दुर्गाबाई देशमुख

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ये बहुत कम लोग को ही पता होगा कि आजाद भारत के समय महिलायों की शिक्षा के लिए बनाई गई पहली योजना 'राष्ट्रीय-शिक्षा समिति' की अध्यक्ष दुर्गाबाई देशमुख ही थी। अध्यक्ष रहते हुए महिला शिक्षा के लिए दुर्गाबाई ने कई अहम् काम किए। यहीं नहीं राष्ट्र के प्रगति में महिलायों की भागीदारी के लिए भी कई नींव रखी। (फ्रीडम फाइटर्स महिला) महिला सशक्तिकरण करने लिए दुर्गाबाई देशमुख ने 'आंध्र महिला सभा' की भी स्थापना की। उन्होंने एक स्कूल की भी स्थापना की जहां महिलाओं को चरखा और कपड़ा कटाने की ट्रेनिंग दी जाती थी।

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महादेवी वर्मा 

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आप में से कई लोग महादेवी वर्मा की किताब ज़रूर पड़ी होंगी। महादेवी वर्मा हिंदी भाषा की एक प्रख्यात लेखिका, कवयित्री और शिक्षाविद थी। मदादेवी वर्मा को एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी याद किया जाता है। उन्होंने ऐसी कई किताब लिखी जिनका भारतीय महिला सशक्तिकरण में अहम् योगदान माना जाता है। उन्होंने अपनी लेखों से कई बार महिला यौन शोषण और उत्पीड़न पर कड़ा प्रहार किया। आज भी महिलाओं के ऊपर लिखी इनकी किताबे आपको मिल जाएगी।

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कादंबनी गांगुली 

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80 के दशक में स्नातक करना किसी भी महिला के लिए आसान काम नहीं था। लेकिन, उस समय कादंबनी गांगुली ने स्तानक कर के यह साबित कर दिया कि एक महिला चाहे तो कुछ भी कर सकती हैं। कादंबनी को देश की पहली महिला फिजिशन के तौर पर भी जाना जाता है। कादंबनी गांगुली का जन्म 18 जुलाई 1861 में बिहार के भागलपुर में हुआ था। (बनना है सशक्त महिला, तो इन बातों को ना करें इग्नोर) उन्होंने कोयला खदानों में काम करने वाली महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए कई काम किए। इस कड़ी में चंद्रमुखी बासु का भी नाम लिया जाता है जिन्होंने महिला शिक्षा सुधार के लिए कई काम किए।

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