हमारे देश में लंबे समय से गोरे रंग को खूबसूरती का पैमाना माना जाता रहा है। गोरे रंग वाली महिलाओं को ज्यादा तवज्जो दिया जाना और सांवले रंग की महिलाओं के साथ भेदभाव की खबरें आज भी सुनने को मिल जाती हैं। अगर मेट्रिमोनियल साइट्स पर दुल्हनों की तस्वीरों की बात करें तो वे भी सिर्फ फेयर कलर्ड  ही नजर आती हैं। ऐसा वर और उनके परिवार वालों की इच्छा की खातिर किया जाता है, लेकिन यह उन महिलाओं के साथ सरासर नाइंसाफी है, जिनकी योग्यता सिर्फ उनके सांवले रंग के कारण नकार दी जाती है। अमेरिका के डलास में रह रही हेतल लखानी ने मेट्रिमोनियल साइट shaadi.com  के स्किन टोन फिल्टर यूज करने पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। इस पर उन्हें सोशल मीडिया में जमकर सपोर्ट मिला और इस वेबसाइट को अपने पक्षपाती रवैये के लिए काफी आलोचना सुनने को मिली। इसी के बाद इस वेबसाइट ने स्किन टोन फिल्टर हटाने का फैसला किया। 

ऑनलाइन पिटीशन से हुई शुरुआत

women petition to remove skin tone filter

बीबीसी के अनुसार हेतल लखानी, जो अमेरिका के डलास में मेगन नागपाल के साथ रहती हैं, ने ऑनलाइन पिटीशन शुरू की, जिसमें मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर कलर फिल्टर हटाए जाने की मांग की गई थी। इस पर shaadi.com की तरफ से कहा गया है कि फिल्टर से किसी तरह का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा था।' यूजर्स जब ये वेबसाइट जॉइन करते थे, तो उन्हें अपनी स्किन टोन बताने के लिए कहा जाता था, ताकि इसके आधार पर पार्टनर की खोज हो सके। लेकिन यह चीज महिलाओं में असंतोष बढ़ाने का काम कर रही थी।

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इन महिलाओं ने मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर उठाए थे सवाल

website removes skin tone filter

मेगन ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि वेबसाइट से सवाल किये जाने पर उन्हें जवाब मिला था - 'ज्यादातर पेरेंट्स इस फिल्टर की मांग करते हैं।' मेट्रिमोनियल वेबसाइट्स अगर दकियानूसी सोच को बढ़ावा देती हैं तो इससे महिलाओं को कभी भी बराबरी का हक नहीं मिल पाएगा। हेतल ने इस बारे में कहा, 'मैंनें लोगों की सोच में बदलाव लाने के लिए इस पिटीशन की शुरुआत की और इस पर मुझे लोगों ने काफी सपोर्ट किया। 14 घंटे के अंदर मुझे 1500 से ज्यादा सिग्नेचर मिल गए। लोगों को इस बात की खुशी हुई कि ऐसे मुद्दों पर बात की जा रही है।'

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हास्यास्पद विज्ञापनों में जाहिर होती है पुरानी सोच

दकियानूसी सोच सिर्फ महिलाओं के रंग तक ही सीमित नहीं है। अक्सर शादी के लिए दिए जाने वाले विज्ञापनों में लड़की के सुंदर, सुशील, घरेलू कामकाज में निपुणता, अमीर घर से होने जैसी मांग भी होती है। इनसे जाहिर होता है कि वर को अपने लिए जीवनसाथी की नहीं, बल्कि एक ऐसे पार्टनर की तलाश है, जो उनकी हर इच्छा के अनुकूल भी हो और जो सारी रेसपॉन्सिबिलटीज भी खुद ही उठा ले।  

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इन एक्ट्रेसेस ने रंगभेद पर जताया था ऐतराज 

अनुष्का शर्मा, प्रियंका चोपड़ा, स्वरा भास्कर, कंगना रनौत जैसी कई एक्ट्रेसेस रंग के आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव किए जाने पर ऐतराज जता चुकी हैं और इसीलिए इन्होंने फेयरनेस क्रीम से जुड़े विज्ञापनों को करने से भी इनकार कर दिया था।

अभय देओल ने भी उठाई थी आवाज

 

बॉलीवुड के चर्चित एक्टर अभय देओल ने रंग को लेकर होने वाले भेदभाव का विषय कुछ वक्त पहले गंभीरता के साथ उठाया था। उन्होंने फेयरनेस क्रीम्स का विज्ञापन करने पर शाहरुख खान, दीपिका पादुकोण, सोनम कपूर जैसे बड़े स्टार्स पर सवाल उठाए थे।

अभय देओल ने अपनी लंबी पोस्ट में फेयरनेस क्रीम बनाने वाली कई कंपनियों का जिक्र किया था और यह भी स्पष्ट किया था कि किस तरह से गोरा बनाने के नाम पर कंपनियां अपना बिजनेस चमका रही हैं। दीपिका पादुकोण, शाहिद कपूर, जॉन अब्राहम जैसे कलाकारों के विज्ञापनों पर उन्होंने ट्वीट में इनकी सच्चाई उजागर की थी। इस पर अभय देओल को सोशल मीडिया में जमकर सपोर्ट मिला था। 

रंग को लेकर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पर ऐतराज जाहिर करना और उस पर सपोर्ट मिलना जाहिर करता है कि लोगों की सोच बदल रही है। इससे महिलाओं को अपनी आवाज बुलंद करने और आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा मिलेगी। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे जरूर शेयर करें। अन्य वुमन इशुज पर अपडेट्स पाने के लिए विजिट करती रहें हरजिंदगी।

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