हिंदू धर्म में हर एक तीज त्योहार का अलग महत्व है। हर एक तिथि को अलग तरीके से मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि हर त्योहार में अलग तरीके से पूजा पाठ करने का विधान है। इसी तरह हिंदुओं में अमावस्या तिथि का भी अलग महत्व बताया गया है। मुख्य रूप से अमावस्या तिथि महीने में एक बार आती है और इस दिन खासतौर पर पितरों को याद किया जाता है। हिंदू पंचांग के हिसाब से हर माह कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या तिथि होती है।

अमावस्या तिथि के दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है और इस दिन अपने पितरों को याद करते हुए दान पुण्य किया जाता है। आइए अयोध्या के जाने माने पंडित राधे शरण शास्त्री जी से जानें कि इस बार मार्गशीर्ष महीने की अमावस्या कब मनाई जाएगी और इसका क्या महत्व है। 

मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त 

amavasya date shubh muhurat

शास्त्रों में अमावस्या तिथि का बहुत अधिक महत्व बताया गया है लेकिन मार्गशीर्ष की अमावस्या को बहुत ही पुण्य फलदायी माना जाता है। इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या तिथि 4 दिसंबर, शनिवार के दिन पड़ेगी। शनिवार के दिन होने की वजह से इसे शनि अमावस्या कहा जाएगा और इस वजह से अमावस्या तिथि का महत्व अधिक बढ़ जाएगा। 

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ -03 दिसंबर शाम 04 बजकर 55 मिनट से शुरू 
  • अमावस्या तिथि समाप्त- 04 दिसंबर दोपहर 01 बजकर 12 मिनट पर
  • उदया तिथि 04 दिसंबर दिन शनिवार को होने के कारण मार्गशीर्ष अमावस्या उसी दिन मनाई जाएगी।  

मार्गशीर्ष अमावस्या 2021 का पंचांग

  • राहुकाल: सुबह 09 बजकर 35 मिनट से सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक.
  • अभिजित मुहूर्त: दिन में 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक.
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से दोपहर 02 बजकर 37 मिनट तक.

मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व 

amavasya december month significance

ऐसा माना जाता है इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करना बेहद शुभफलदायी होता है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान आदि करने से पितृ प्रसन्न होते हैं व अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस दिन पितरों के नाम का दीपक जरूर जलाएं जिससे उन्हें मुक्ति मिल सके। इस बार दिसंबर के महीने में शनि अमावस्या होने के कारण शनिदेव की कृपा पाने के लिए धार्मिक अनुष्ठान करना भी श्रेष्ठ रहेगा। शनिवार का दिन (शनिवार को न करें ये 5 काम) होने पर अमावस्या तिथि का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। शनि अमावस्या होने पर पितरों के साथ शनिदेव को भी प्रसन्न करने के लिए यह दिन अति उत्तम रहता है। पूर्णिमा तिथि की भांति अमावस्या तिथि का भी शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पवित्र नदियों या सरोवर में स्नान व पितरों के निमित्त दान करने का बहुत महत्व माना गया है। ऐसा माना जाता है कि अमावस्या के दिन पितरों को याद करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

इसे जरूर पढ़ें:Panchang December 2021: दिसंबर के महीने में अमावस्या के साथ कौन सी होंगी मुख्य तिथियां, मासिक पंचांग में जानें

Recommended Video

अमावस्या तिथि के दिन क्या करें 

  • इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी में जाकर स्नान करें और अपने पितरों के लिए तर्पण व दान करें। 
  • यदि आप इस दिन व्रत रखें और क्षमता अनुसार दान करें तो आपके लिए लाभदायक हो सकता है। 
  • संध्या के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। इसी के साथ पीपल की परिक्रमा भी करें। 
  • इस दिन मृत पूर्वजों के नाम का दीपक जरूर जलाएं। 

इस प्रकार अमावस्या तिथि का बहुत महत्व है और इस दिन दान पुण्य से मोक्ष की प्राप्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: freepik and unsplash