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जानें उस गुफा के बारे में जहां भगवान शिव ने की थी मोक्ष प्राप्ति के लिए तपस्या

भगवान शिव खुद में ही आदि और अनंत हैं। यही वजह है कि लाखों श्रद्धालु उनकी भक्ति में लीन हो जाते हैं।
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Published -11 May 2022, 19:36 ISTUpdated -11 May 2022, 20:49 IST
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lord shiva cave in champawat

देवों के देव महादेव को ना जाने कितने नामों से पुकारा जाता है। सबकी कामना पूरी करने वाले भगवान शिव की माया अपरम पार है। सृष्टि को बचाने वाले नील कंठ यानी भोले नाथ सभी भक्तों के प्रिय हैं। कहा जाता है अगर आप सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करें तो आपके सारे बिगड़े काम बन जाते हैं। वहीं मात्र उनके दर्शन से ही इंसान को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

उत्तराखंड को देव भूमि कहा जाता है। क्योंकि यहां देवों का वास है। यहां आपको देवी-देवताओं की कई गुफाएं देखने को मिलेंगी। हर गुफा के पीछे कोई न कोई मान्यता जरूर होती है। ऐसे में आज हम आपको उस गुफा के बारे में बताएंगे जहां भगवान शिव ने तपस्या की थी, जिसके बाद उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। चलिए जानते हैं कैसे और कब इस गुफा की खोज हुई। 

पाताल रुद्रेश्वर गुफा

patal rudreswar uttarakhand

यह गुफा चंपावत जिले में मौजूद है। यहां हजारों की संख्या में भक्तों का जमावड़ा लगा रहता है। यह गुफा न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत में प्रसिद्ध है। 40 मीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी इस गुफा की खोज साल 1993 में हुई थी। 

इस तरह हुई गुफा की खोज

patal cave

पाताल रुद्रेश्वर गुफा की खोज की कहानी बेहद ही रोचक है। इसके पीछे मान्यता है कि एक दिन एक बच्चा गायों को चराने गुफा के पास जाता है। फिर वह गुफा के अंदर घुस जाता है। गुफा के अंदर जाते हुए उसे एक गांव का व्यक्ति देख लेता है। वह व्यक्ति तब तक  वहीं खड़ा रहता है, जब तक वह बच्चा गुफा से बाहर नहीं आ जाता है। जैसे ही बच्चा उस गुफा के बाहर आता है, वह व्यक्ति उससे पूछता है कि वह इस गुफा के अंदर क्यों गया था?वह बच्चा बताता है कि उसके सपने में एक रात मां दुर्गा आई थीं। सपने में उन्होनें इस गुफा के बारे में बताया था। साथ ही इस गुफा का रास्ता भी बताया था। इसलिए वह इस गुफा के अंदर गया था। धीरे- धीरे करके बाद में पूरे गांव को इस गुफा के बारे में पता चल गया।  

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गुफा के अंदर का नजारा 

जब गांव के लोगों को इस गुफा के बारे में पता चला तो सभी लोगों ने इसके अंदर जाने की सोची। जब लोग इस गुफा के अंदर गए और जो उन्होनें देखा वह चौंका देने वाला था। गुफा के अंदर 1 नहीं बल्कि 3 छोटी-छोटी अन्य गुफाएं भी थीं। साथ ही इसके अंदर एक कुंड भी था,जहां पर सफेद पत्थर से बने नंदी की मूर्ति थी। इसी कुंड के बीच भगवान शिव की शिवलिंग भी मौजूद थी। इस शिवलिंग पर 5 धाराएं गिर रही थीं। (शिवलिंग का 7 अलग धाराओं से करें अभिषेक)

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क्यों खास है यह गुफा? 

uttarakhand caves

पाताल रुद्रेश्वर गुफा को मोक्ष की गुफा भी कहा जाता है। भगवान के मात्र दर्शन से ही मानव को मोक्ष प्राप्त हो जाता है। लेकिन इस गुफा में तपस्या करने के बाद भगवान शिव को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। यही कारण है कि इस गुफा को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। (शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का तरीका)

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Image Credit: Freepik

 

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