अमेरिकी गायिका और सिविल राइट्स एक्टिविस्ट नीना सिमोन ने एक बार एमहर्स्ट, यूनिवर्सिटी ऑफ मेसाच्युसेट्स में अश्वेतों के मानसम्मान और सिविल राइट्स के लिए रैली करते हुए अश्वेतों की तरह युवा और प्रतिभाशाली होने का नारा दिया था। उनसे हजार मील दूर 6 साल की मिशेल ओबामा अपना बचपन जी रही थीं, उन्हें इस बात का शायद ही इल्म रहा हो कि एक दिन वह पहली अफ्रीकी-अमेरिकी लेडी ऑफ यूएसए बनेंगी। दुनियाभर की लड़कियों के लिए रोल मॉडल और इंस्पिरेशन बनीं मिशेल को भी रंगभेद और लैंगिक असमानता का सामना करना पड़ा, लेकिन वह पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ती रहीं। 

michelle obama inside

मिसेल साउथ शिकागो की एक माइग्रेंट फैमिली से थीं। मिशेल ऐसे माहौल में पली-बढ़ीं, जब सिविल राइट मूवमेंट और जेंडर इक्वालिटी समाज के ज्वलंत मुद्दे थे। अश्वेत महिला के तौर पर मिशेल को टैलेंटेड, हार्ड वर्किंग और एंबिशस होने के बावजूद कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। शुरुआत में लॉ में अपना करियर बनाने के बाद मिशेल जनसेवा के लिए सिटी एडमिनिस्ट्रेटेर बन गईं और इसके बाद कम्यूनिटी आउटरीच वर्कर। आज के समय में उनकी जिंदगी संघर्ष और उत्कृष्टा का बेजोड़ उदाहरण है। महिलाएं उनकी जिंदगी से किस तरह से इंस्पिरेशन ले सकती हैं, आइए जानते हैं-

कड़ी मेहनत से ही मिलती है कामयाबी

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पहाड़ के शिखर तक पहुंचने के लिए आपको कई बाधाओं को पार करना पड़ता है, मिशेल ने भी इसी अंदाज में समाज में अपनी पहचान बनाई। उनका बचपन मुश्किलों भरा था, उनके पिता मल्टिपल स्केलेरॉसिस के शिकार थे, लेकिन वह इस बीमारी से डटकर लड़े, इससे नन्ही मिशेल ने बहुत कुछ सीखा। मिशेल ने बहुत पहले ही यह समझ लिया कि उनके अंदर जीतने का जज्बा है। उन्होंने महसूस किया कि मुश्किलों के बीच भी उनमें आगे बढ़ने का साहस है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, 'सफलता के लिए कोई जादू नहीं होता। इसमें सिर्फ आपकी कड़ी मेहनत, आपकी चॉइसेस और आपकी दृढ़ता ही मायने रखती है। 

कभी ना हार मानने के हौसले को बनाए रखने के लिए उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा था, 'जरूरी नहीं कि आप एक कंफर्टेबल लाइफ जिएं या फिर दुनिया की सारी समस्याएं एक बार में सॉल्व कर लें, लेकिन कभी भी अपने महत्व को कम करके मत आंकें, क्योंकि इतिहास ने हमें दिखाया है कि साहस से कितने ही लोगों को प्रेरित किया जा सकता है और एक उम्मीद हमारी जिंदगी का रुख बदल सकती है। 

कमजोर के उत्थान के लिए करो काम

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अक्सर हमारे काम, बोलने या दूसरों से कनेक्ट करने के तरीके पर हमारा मजाक बनाया जाता है। मुश्किलों के सामने खुद से निराश होने के बजाय हमें हौसला बनाए रखना चाहिए। लॉ में करियर बनाने के लिए मिशेल ने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की, हार्वर्ड लॉ स्कूल से ज्यूरिस डॉक्टर की पदवी हासिल की। ये दोनों ही प्रख्यात आईवी लीग कॉलेज हैं, जहां मिशेल ने अपनी योग्यता साबित की। लेकिन लीगल करियर की शुरुआत करने पर उन्हें रंगभेद का सामना करना पड़ा। 

कॉलेज टाइम में उन्हें खुद के छात्रा होने से ज्यादा एक विजिटर की फीलिंग आती थी, उन्हें कॉलेज के दूसरे स्टूडेंट्स के साथ कनेक्ट करने में भी मुश्किल होती थी। इन चुनौतियों से काफी कुछ सीखा और इसका असर उनके लोक सेवा से जुड़ने और मेयर ऑफ शिकागो को उनके काम में एसिस्ट करने में नजर आया। 

अपने सपनों में करो यकीन

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हर समाज में महिलाओं के लिए चुनौतियां होती हैं। पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की राह में उनके सामने जॉब, सैलरी और लैंगिक असमानता जैसे कई मुश्किलें आती हैं। लेकिन इन मुश्किलों से हमें उबारती है हमारी सोच और हमारा अपने सपनों में यकीन, जो विरोध के माहौल में भी हमें स्ट्रॉन्ग बनाए रखता है। आखिर में यही मायने रखता है कि हम लोगों में भी उम्मीद कायम रखें। 

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शिक्षा है जरूरी

मिशेल ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए काफी संघर्ष किया और कंपटीशन का भी सामना किया। इसी से उन्होंने शिक्षा का महत्व समझा। इसी के मद्देनजर उन्होंने साल 2015 में 'लेट गर्ल्स लर्न' इनीशिएटिव की शुरुआत की, जहां उन्होंने अमेरिकी लोगों को उच्च शिक्षा में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी तरह उन्होंने अमेरिकी टीनेजर्स की शिक्षा के लिए 'बेटर मेक रूम' कैंपेन की शुरुआत की। 

इसके अलावा भी मिशेल ने श्रमिकों से लेकर महिलाओं के अपहरण, घरेलू हिंसा और नस्ल भेद पर खुलकर अपने विचार जाहिर किए। अपने से पहले आईं व्हाइट हाउस की फर्स्ट लेडीज से अलग हटकर उन्होंने लोगों के सामने नई मिसाल पेश की। आज भी बराक ओबामा जब अमेरिका के राष्ट्रपति के अपने समय को याद करते हैं तो वह मिशेल के योगदान को याद करते हैं, वह खुलकर इस बात को कहते हैं कि वह आज जो बन सके, उसकी नींव मिशेल ओबामा ने रखी। जाहिर है अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी मिशेल इसी तरह इंस्पायर करती रहेंगी।