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होमस्कूलिंग से बच्चे को होते हैं यह फायदे व नुकसान, जानिए

होमस्कूलिंग का चलन भारत में काफी बढ़ चुका है। लेकिन इसके अपने कुछ फायदे व नुकसान हैं। जानिए इस लेख में।
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  • Mitali Jain
  • Editorial
Published -11 Jun 2022, 10:55 ISTUpdated -11 Jun 2022, 10:55 IST
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होमस्कूलिंग एक ऐसा कॉन्सेप्ट है, जो लंबे समय से दुनियाभर में अस्तित्व में है और अब भारत में भी कई पैरेंट्स बच्चे को पढ़ाने के लिए होमस्कूलिंग के ऑप्शन पर विचार करने लगे हैं। प्राइवेट स्कूलों की मनमानी व स्कूल में बच्चे की जरूरतों का पूरा ना हो पाना कुछ ऐसे कारण हैं, जिसकी वजह से होमस्कूलिंग के ऑप्शन को काफी पसंद किया जाने लगा है।

यूं तो हर पैरेंट की यह इच्छा होती है कि उनका बच्चा पढ़- लिखकर जीवन में सफलता हासिल करे। लेकिन आज के समय में सिर्फ किताबी ज्ञान ही काफी नहीं होता। इसके अलावा, हर बच्चा एक ही तरह से चीजों को नहीं सीखता है और इसलिए उनके अनुसार चीजों को मॉडिफाई करना पड़ता है। इन्हीं मॉडिफिकेशन में से एक है होमस्कूलिंग। जैसा कि इसके नाम से ही पता चल रहा है कि यह कॉन्सेप्ट घर को ही स्कूल बनाने पर आधारित है। हालांकि, इसके अपने कुछ फायदे व नुकसान भी हैं। जिसके बारे में आज हम आपको इस लेख में बता रहे हैं-

होमस्कूलिंग क्या है?

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होमस्कूलिंग के फायदे व नुकसान पर चर्चा करने से पहले आपको इसके बारे में पर्याप्त रूप से जान लेना चाहिए। भारत में होमस्कूलिंग का मूल रूप से मतलब है कि माता-पिता बच्चे की स्कूली शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। यह कैसे किया जाना चाहिए, इसके बारे में कोई नियम तय नहीं है। ना ही होमस्कूलिंग के दौरान किसी तरह की समय की बाध्यता है।

होमस्कूलिंग के दौरान पैरेंट्स बच्चों को घर पर ही पढ़ाते हैं और इसके लिए वह किताबों के साथ-साथ वीडियोज या अन्य कई मैटीरियल की भी मदद ले सकते हैं। वर्तमान में, भारत में होमस्कूलिंग लीगल है। अर्थात् अगर आप बच्चे के लिए होमस्कूलिंग का ऑप्शन चुनते हैं तो उनकी उम्र के आधार पर कक्षा में दाखिला करवाया जा सकता है और आपको उसे परीक्षाएं भी दिलवानी होंगी, जिसके आधार पर बच्चा आगे बढ़ेगा।

इसे भी पढ़ें: इन आसान टिप्स की मदद से पहचानें अपने बच्चे की प्रतिभा

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होमस्कूलिंग के फायदे

होमस्कूलिंग से कई फायदे मिलते हैं। मसलन-

  • हर बच्चे का पढ़ाई में इंटरस्ट अलग होता है और उनके सीखने का तरीका भी अलग होता है। लेकिन रेग्युलर क्लॉस में हर बच्चे को एक ही तरह से सिखाया जाता है, जबकि होमस्कूलिंग के दौरान आप बच्चे के स्किल्स को पहचानकर उन्हें बेस्ट तरीके से सिखा सकती हैं। (बच्चों को हिंदी सिखाने के लिए टिप्स)
  • होमस्कूलिंग के दौरान बच्चों को किताबी दुनिया से बाहर भी काफी कुछ सीखने को मिलता है, क्योंकि उनके पास समय का कोई अभाव नहीं होता। आप उनकी एक्टिविटीज के अनुसार एक शेड्यूल तैयार कर सकती हैं।
  • एक बच्चा एक विषय में कमजोर हो सकता है लेकिन दूसरे में मजबूत। इसलिए, माता-पिता तदनुसार बच्चों के लिए सामग्री चुन सकते हैं।
  • एक स्कूल में छात्रों की संख्या कितनी भी कम क्यों न हो, लेकिन फिर भी हर बच्चे पर पूरा ध्यान नहीं दिया जा सकता है। दूसरी ओर, घर पर यह संभव है।
  • जिन पैरेंट्स को अपने काम के चक्कर में बार-बार शिफ्ट करना पड़ता है, उनके लिए यह भी एक अच्छा ऑप्शन है, क्योंकि आपका घर ही बच्चे का स्कूल है और ऐसे में बार-बार बच्चे के स्कूल एडमिशन को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
  • होमस्कूलिंग के दौरान बच्चे को पीयर प्रेशर या फिर बुलिंग आदि का सामना नहीं करना पड़ता है। घर पर उन्हें पढ़ाई के लिए एक सुरक्षित वातावरण मिलता है।
  • बच्चों के साथ निरंतर बातचीत से माता-पिता को अपने बच्चे की छिपी प्रतिभा को खोजने में मदद मिलेगी।
  • होमस्कूलिंग स्कूल फीस पर खर्च होने वाले पैसे को भी बचाने का एक बेहतरीन तरीका है।

होमस्कूलिंग के नुकसान

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जहां होमस्कूलिंग से कई फायदे मिलते हैं, वहीं इसकी अपनी कुछ लिमिटेशन भी हैं। जैसे-

  • एक होमस्कूलर आमतौर पर अन्य बच्चों के संपर्क में बहुत अधिक नहीं आते हैं, जिसके कारण उनमें आवश्यक सोशल स्किल्स की कमी हो जाती है। ऐसे बच्चे जल्दी से ग्रुप में एडजस्ट नहीं हो पाते हैं और ना ही दूसरों के सामने अपनी बात रख पाते हैं। (बच्चे को प्यार जताने के लिए टिप्स)
  • होमस्कूलिंग के दौरान सारी मेहनत पैरेंट्स को ही करनी होती है। ऐसे में उन्हें अपना सारा समय बच्चे की पढ़ाई को डेडीकेट करना पड़ता है। यदि दो या तीन बच्चे हैं, तो स्थिति और भी अधिक कठिन हो जाती है। ऐसे में पैरेंट्स के लिए बच्चे की पढ़ाई व अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को बैलेंस कर पाना मुश्किल होता है।
  • पैरेंट्स कुछ विषयों में एक्सपर्ट हो सकते हैं, लेकिन हर विषय में उनकी पकड़ बहुत अच्छी हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। जिसके कारण बच्चा कुछ विषयों में कमजोर रह जाता है।
  • होमस्कूलिंग के दौरान बच्चे स्कूल सीखने के कई अनुभवों से चूक जाते हैं, जैसे कि दोस्त बनाना, टूर पर जाना, ग्रुप एक्टिविटीज का हिस्सा बनना, या खेल दिवस आदि में भाग लेना आदि। यह सभी एक्टिविटीज बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं।
  • जबकि होमस्कूलिंग से माता-पिता के स्कूल की फीस पर खर्च किए गए पैसे की बचत होगी, लेकिन बच्चे की पढ़ाई के लिए उन्हें अपनी नौकरी छोड़नी पड़ सकती है या पार्ट टाइम नौकरी करनी पड़ सकती है जो परिवार की फाइनेंशियल कंडीशन को प्रभावित कर सकती है।

तो अब अगर आप भी बच्चे के लिए होमस्कूलिंग का ऑप्शन चुन रही हैं तो इन छोटी-छोटी बातों का विशेष रूप से ध्यान दें।

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Image Credit- freepik

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