हम सभी के घर में फर्स्ट एड बॉक्स होता ही है, जिसमें हम कुछ जरूरी दवाएं अवश्य रखते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर या फिर किसी मेडिकल इमरजेंसी में उसे इस्तेमाल किया जा सके। हालांकि, कई बार ऐसा भी होता है कि घर में उन दवाईयों की जरूरत ही नहीं पड़तीं, लेकिन ऐसे ही रखे रहने के कारण वह एक्सपायर्ड हो जाती हैं। एक्सपायर्ड मेडिसिन सेहत के लिए कितनी घातक साबित हो सकती हैं, यह तो हम सभी जानते हैं। इसलिए, इसे तुरंत मेडिकल बॉक्स से बाहर निकाल देना चाहिए।

लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि आप इन्हें डस्टबिन में फेंक दें। अगर आप चाहें तो इन एक्सपायर्ड मेडिसिन की मदद से अपने प्लांट्स का बेहद अच्छी तरह ख्याल रख सकती हैं। जी हां, यह एक्सपायर्ड मेडिसिन गार्डन एरिया में बेहद अच्छी तरह काम में आ सकती हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको एक्सपायर्ड मेडिसिन को गार्डन एरिया में इस्तेमाल में लाने के कुछ अमेजिंग आइडियाज आपके साथ शेयर कर रहे हैं-

कम्पोस्ट में डालें एक्सपायर्ड दवाएं

how you can use expired medicine in the garden inside

आप कुछ एक्सपायर हो चुकी दवाओं को अपने कम्पोस्ट पाइल में डाल सकते हैं। मल्टीविटामिन सहित फोलिक एसिड और विटामिन सी को खाद में डाला जा सकता है। वे बीज की शक्ति को बढ़ाते हैं और उन्हें तेजी से अंकुरित होने में मदद करते हैं।

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प्लांट्स को करें फीड

अगर मल्टीविटामिन कैप्सूल एक्सपायर हो गया है तो ऐसे में उसे फेंकने के बजाय, आप उन्हें प्लांट फर्टिलाइजर में एड करें। कैल्शियम से बने सप्लीमेंट्स प्लांट ग्रोथ में मदद करते हैं और नई पत्तियों और टिश्यूज को बनाने में मदद करते हैं। यदि आपके पौधे कमजोर और दुबले-पतले हैं तो ऐसे में आपको पानी में जिंक की कुछ गोलियां डालनी चाहिएं इससे पौधों को स्टार्च को शुगर में बदलने में बहुत मदद मिलेगी। (गार्डन में आप भी ऐसे उगाएं लहसुन)

प्लांट वाटर में शामिल करें

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अगर कुछ मल्टीविटामिन एक्सपायर्ड हो गए हैं तो आप उन्हें डिस्टिल्ड वाटर में घोलें और महीने में एक बार इस पानी को अपने पौधों को डालें। विटामिन बी12 पालक और फलों आदि पौधों में पोषण की मात्रा में सुधार करता है। चूंकि पौधे की जड़ें विटामिन बी 12 को सक्रिय रूप से अवशोषित कर सकती हैं, इसलिए आप गोलियों को पानी में मिला सकते हैं।

फंगल डिसीस से लड़ने में मदद करे

वर्टिसिलियम और फ्यूजेरियम विल्ट आम फंगल रोग हैं जो व्यापक रूप से मिट्टी में फैलते हैं और कुछ ही दिनों में पूरी फसल को मिटा सकते हैं। ऐसे में एस्पिरिन की दवाएं इन फंगल डिसीस से लड़ने में पौधों की मदद कर सकती हैं। बस आपको एस्पिरिन का एक स्प्रे तैयार करना होगा। दरअसल, सैलिसिलिक एसिड एस्पिरिन में सक्रिय घटक है, जब पौधों पर एस्पिरिन के घोल का छिड़काव किया जाता है, तो पौधों में सैलिसिलिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है जो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाती है और पौधों को मिट्टी से होने वाली बीमारियों, फंगल डिसीस और बैक्टीरिया से बचाती है। इस स्प्रे को बनाने के लिए डिस्टिल्ड वाटर में एस्पिरिन टैबलेट को घोलें और फिर इस घोल से स्प्रे करें।

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फूलों को लंबे समय तक रखे फ्रेश

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एक बार जब किसी फूल को पौधे से अलग कर दिया जाता है, तो वह जल्द ही मुरझा जाता है, लेकिन अगर आप अपने कटे हुए फूलों को वास में सजा रही हैं और उसे लंबे समय तक ताजा रखना चाहती हैं तो ऐसे में आप फूलदान के पानी में एस्पिरिन मिलाएं। बस आप एस्पिरिन टैबलेट को कुचल दें और इसे पानी मिला लें। दरअसल, एस्पिरिन में मौजूद सैलिसिलिक एसिड एथिलीन के उत्पादन को कम करता है। कम एथिलीन मौजूद होने से, फूलों के मुरझाने में देरी होती है, और कटे हुए पौधे अधिक समय तक चल सकते हैं।

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