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कोलकाता के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर को बनवाने वाली ये महिला आखिर कौन हैं?

आज हम आपको बंगाल पर राज कर चुकी रानी रश्मोनी के बारे जानकारी दे रहे हैं, जिनका नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज है।
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Published -16 Jun 2022, 18:44 ISTUpdated -16 Jun 2022, 19:00 IST
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हिंदुस्तान पर कई वर्षों तक कई वंश ने शासन किया है, जिनके बारे में यकीनन लोग जानते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में बसे हर राज्य अपनी अलग कहानी है, जहां पर न सिर्फ राजाओं ने शासन किया है बल्कि कई रानियां भी ऐसी रही हैं, जिन्होंने हिंदुस्तान को आजादी दिलाने के लिए पूर्ण योगदान दिया है। बंगाल भी कई मायनों में खास रहा है क्योंकि यहां कई ऐसी महिलाएं रही हैं, जिन्होंने कई सालों तक शासन किया है।

हालांकि, बंगाल की तमाम रानियां प्रेरणादायक शख्सियत हैं, जिन्होंने अपना भाग्य बनाने के लिए उन मानदंडों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। लेकिन इन रानियों में सबसे ऊपर नाम रानी रश्मोनी का आता है क्योंकि उनका नाम कोलकाता के प्रसिद्ध दक्षिणेश्वर काली मंदिर से जुड़ा हुआ है। इसलिए आज हम आपको रानी रश्मोनी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने न सिर्फ बंगाल पर शासन किया बल्कि कई प्रेरणादायक काम भी किए हैं।

कौन थीं रानी रश्मोनी? (West Bengal Queen Rani Rashmoni) 

Rani Rashmoni

बंगाल की रानी रश्मोनी को लोग रश्मोनी दास, रानी रसमनी के नाम से भी जाना जाता है। इनका जन्म सितंबर 1793 में कलकत्ता में हुआ था। कहा जाता है कि रानी रश्मोनी एक केवट समुदाय से संबंध रखती थीं। क्योंकि कहा जाता है कि उनके माता-पिता मछली पकड़ने का काम करते थे। लेकिन इन्होंने अपनी काबिलियत के बल पर अपना नाम कमाया और बंगाल पर राज किया। (भोपाल की रानी शाहजहां बेगम के बारे में जानें)

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बनवाई कई ऐतिहासिक इमारतें- (Who is Rani Rashmoni)

Temple built by rani rashmoni

रानी रश्मोनी का नाम इतिहास के पन्नों में सिर्फ इसलिए दर्ज नहीं है क्योंकि उन्होंने बंगाल पर राज किया। बल्कि उन्होंने कई ऐसे भी काम किए हैं, जो काबिले तारीफ हैं। कहा जाता है कि रानी रश्मोनी को इमारते बनवाने का बहुत शौक था इसलिए उन्होंने कोलकातामें दक्षिणेश्वर काली मंदिर का निर्माण भी करवाया था, जिसका नाम ऐतिहासिक मंदिर में शुमार है। 

कहा जाता है कि इस मंदिर को बनने में कई साल लगे थे क्योंकि इसकी संरचना 1847 में बननी शुरू हुई थी और 1855 में मंदिर का निर्माण पूरा हो गया था। कहा जाता है कि ये मंदिर 25 एकड़ क्षेत्र फैला हुआ है।

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अंग्रेजों के खिलाफ उठाई आवाज- (West Bengal Queen Name) 

Rani Rashmoni bulit temple

बंगाल की रानी रश्मोनी की आज भी मिसाल दी जाती है क्योंकि कहा जाता है कि उन्होंने मछुआरों के लिए अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने का काम किया था। रानी ने टैक्स नियम के खिलाफ आवाज उठाई और इसमें बदलाव करवाया। इतिहास के अनुसार कहा जाता है कि 1994 में रानी की तस्वीर बंगाल के टिकट पर भी छपा करती थी, जिसके साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। (कोलकाता का इतिहास)

उम्मीद है कि आपको रानी रश्मोनी से संबंधित ये जानकारी पसंद आई होगी। अगर आपको लेख अच्छा लगा हो, तो उसे लाइक और शेयर ज़रूर करें। साथ ही, जुड़े रहे हरजिन्दगी के साथ। 

Image Credit- (@wikipedia) 

 

 

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