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    Bharat Matrimony Controversy...दिक्कत होली से नहीं त्यौहार के नाम पर होने वाले फूहड़पन से है

    भारत मैट्रीमोनी वेबसाइट ने होली के पर्व पर एक विज्ञापन रिलीज किया जिसका लगातार विरोध हो रहा है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर इस विज्ञापन में दिखाया क्या गया है। 
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    Updated at - 2023-03-10,19:10 IST
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    Bharat Matrimony Controversy: होली का नाम सुनते ही सबसे पहले 'बुरा ना मानो होली है'  जुमला याद आता है। लेकिन अगर बात बुरा मानने की होगी तो नाराजगी तो जाहिर की जाएगी। वैसे नाराज तो इन दिनों लोग भारत मैट्रीमोनी वेबसाइट के विज्ञापन से भी हैं। दरअसल, वेबसाइट की तरफ से एक विज्ञापन रिलीज किया गया है जिसमें होली के दिन होने वाले हैरेसमेंट से महिलाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को दिखाया गया है।

    आइए सबसे पहले देखते हैं विज्ञापन और समझते हैं कि आखिर लोग इस विज्ञापन का विरोध क्यों कर रहे हैं। 

    होली के नाम पर होने वाले हैरेसमेंट को दिखाता है विज्ञापन

    इस बार की होली कुछ खास थी क्योंकि 8 तारीख को ही महिला दिवस भी मनाया जाता है। ऐसे में भारत मैट्रीमोनी वेबसाइट की तरफ से रिलीज 1 मिनट 15 सेकेंड के विज्ञापन में होली के दौरान होने वाले ट्रामा को दिखाया गया है। विज्ञापन के जरिए संदेश दिया गया है कि हर तीसरी लड़की होली के दिन होने वाली हैरेसमेंट की वजह से इस त्यौहार को नहीं मनाती है। ऐसे में इस बार की होली को सुरक्षित तरीके से मनाए।

    फिर क्या था कुछ लोगों को यह विज्ञापन बिल्कुल भी पसंद नहीं आया और उन्होंने ट्रोलिंग शुरू कर दी। 

    इसे भी पढ़ेंः बुरा ना मानो होली है...यह जुमला नहीं देता आपको बदतमीजी करने का लाइसेंस

    क्यों किया जा रहा है विरोध? 

    कुछ लोगों का कहना है हिंदू धर्म के त्यौहारों पर इस तरह के विज्ञापन को रिलीज करने से उनकी आस्था को ठेस पहुंचती है। हालांकि, यहां मुद्दा किसी धर्म विशेष का नहीं बल्कि महिलाओं के साथ होने वाली छेड़खानी को रोकने और जागरूकता को बढ़ावा देने का है। 

    क्या विज्ञापन में होली खेलने से किया गया है मना? 

    विज्ञापन हैरेसमेंट को रोकने का संदेश दे रहा है ना कि होली ना खेलना का। विज्ञापन के किसी भी भाग में यह नहीं दिखाया गया है कि होली का त्यौहार ना मनाया जाए। ऐसे में लोगों के विरोध करने के लॉजिक को समझना थोड़ा मुश्किल है। 

    होली के त्यौहार पर महिला सुरक्षा की बात क्यों है जरूरी  

    सोशल मीडिया के दौर में लोग अपने मन की बातों को खुलकर सबसे सामने रख देते हैं। ऐसे में होली के कुछ दिनों पहले से ही त्यौहार को खेलते वक्त महिलाओं के साथ होने वाले हैरेसमेंट को रोकने के पोस्ट इंटरनेट पर छाने लग गए थे। ऐसा क्यों? बता दें कि होली के त्यौहार पर कुछ लोग बुरा ना मानो होली कहकर सारी लिमिट क्रॉस कर देते हैं और महिलाओं के साथ सरेआम छेड़छाड़ करते हैं। इन सारी हरकतों को रोकने के लिए ही होली पर महिला सुरक्षा की बातें हो रही थी। 

    इसे भी पढ़ेंः आखिर महिलाओं पर अजीबो-गरीब जोक बनाकर क्यों लगाए जाते हैं ठहाके?

    बुरा मानने की बात होगी तो नाराजगी जाहिर की जाएगी

    celebrating holi without consent

    होली का त्यौहार महिलाओं और पुरुष दोनों का होता है। ऐसे में होली या 365 दिन हमें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि बदतमीजी करने पर बुरा माना जाएगा, नाराजगी जाहिर की जाएगी और आवाज भी उठाई जाएगी। हां, एक बार फिर बता दूं कि दिक्कत होली से नहीं बल्कि त्यौहार के नाम पर होने वाले फूहड़पन से है। 

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