विश्व के सबसे बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स ओलंपिक गेम्स बस शुरू ही होने वाले हैं और इस बार भारत ही ओर से कई महिला प्लेयर भी इन गेम्स में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। बता दें कि ओलंपिक्स में इस बार भारत की तरफ से हिस्सा लेने वाले कुल सदस्यों की संख्या 127 है, जिनमें महिला खिलाड़ियों की संख्या 56 है। इन महिला खिलाड़ियों में टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम में सिमडेगा की सलीमा टेटे का भी सेलेक्शन हुआ है। 27 दिसंबर 2001 को झारखंड के एक छोटे से गांव में जन्मी सलीमा टेटे ने बेहद कम उम्र में ही हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। इतना ही नहीं, महज 15 साल की उम्र में ही उन्हें जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए चुन लिया गया था। वैसे इस बार ओलपिंक के लिए भारतीय महिला हॉकी टीम में झारखंड की एक नहीं बल्कि दो बेटियों का सलेक्शन हुआ है, जिनमें से एक सलीमा टेटे और दूसरी निक्की प्रधान हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको हॉकी प्लेयर सलीमा टेटे व उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातों के बारे में बता रहे हैं-

बचपन से हॉकी खेलने की थी इच्छा

Hockey Player

सलीमा टेटे में हॉकी खेलने का जज्बा बचपन से ही था। सलीमा टेटे के अनुसार, वह सिमडेगा में जहां अभ्यास करती थी, वह मैदान नहीं था, बल्कि मिट्टी का मैदान था। इसलिए हर दिन हॉकी खेलने से पहले उन्हें व उनके दोस्त खुद पत्थरों को हटाते थे, जमीन को जितना हो सके, चिकना बनाने की कोशिश करते थे और टेंपरेरी गोलपोस्टों को फिक्स करते थे। इतना ही नहीं, हॉकी ना होने पर वे लकड़ी की डंड़ियों का उपयोग करते थे। 

पिता से मिली थी प्रेरणा

hockey Salima Tete

सलीमा टेटे के अनुसार, उन्हें हॉकी खेलने की प्रेरणा पिता से मिली थी। उनके गांव में हर कोई हॉकी खेलता है, भले ही उनके पास सुविधाओं का अभाव हैं। उनके पिता ने खेल खेलते थे। इतना ही नहीं, वह सलीमा को पास के गांवों में टूर्नामेंट देखने के लिए ले जाते थे। जिसके कारण एक एक किसान की बेटी हॉकी खेलने का सपना लिए बड़ी हुई।

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पहले गांव का नाम किया रोशन

Salima Tete village

सलीमा टेटे झारखंड के सिमडेगा जिले के एक छोटे से गांव से आती है। भले ही बचपन से उन्हें हॉकी खेलना अच्छा लगता था, लेकिन उन्होंने यह कभी नहीं सोचा था कि वह देश के लिए खेलेंगी। हालांकि, उन्हें अपने सपनों पर विश्वास था। सलीमा टेटे ने एक इंटरव्यू में बताया कि मैं अपने गांव की पहली खिलाड़ी हूं जिसने अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। इस तरह उन्होंने केवल अपने गांव, जिले, राज्य और पूरे देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया।

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पहले भी अपने नाम किए हैं कई मेडल

Tokyo Olympics

सलीमा टेटे एक बार नहीं, बल्कि कई बार अपनी काबिलियत और खेल के प्रति अपने जुनून का लोहा मनवा चुकी हैं। उन्हें सबसे पहले साल 2016 में जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में चुना गया था। उन्होंने साल 2016 में U18 एशिया कप के लिए जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम के बतौर उप-कप्तान खेला था और इस टीम ने कांस्य पदक जीता था। इसके बाद नवंबर 2016 में टेटे को सीनियर महिला टीम में एक कॉम्पीटिशन के लिए भी चुना गया था और फिर वह ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गईं । इसके बाद साल 2019 में यूथ ओलंपिक में, उन्हें जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम का कप्तान बनाया गया और इस टीम ने रजत पदक जीता। इसके बाद साल 2019 में ही उन्हें स्थायी रूप से सीनियर भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए चुना गया। अब यही टीम टोक्यो ओलंपिक में अपने खेल का हुनर दिखाएगी। 

हम आशा करते हैं कि टोक्यो ओलंपिक में भी सलीमा टेटे व उनकी पूरी टीम बेहतरीन खेलों का प्रदर्शन करे और भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन करे। हरजिन्दगी की पूरी टीम उन्हें शुभकामनाएं देती है।

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