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'लड़की के कपड़े छोटे हों तो सेक्शुअल हैरेसमेंट नहीं है', केरल कोर्ट का ये फैसला क्यों है अजीब?

केरल सेशन कोर्ट ने सेक्शुअल हैरेसमेंट पर एक ऐसा फैसला दिया है जिसमें बताया है कि भड़काऊ कपड़े पहनना सेक्शुअल हैरेसमेंट नहीं हो सकता है। 
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Published -17 Aug 2022, 19:12 ISTUpdated -17 Aug 2022, 19:16 IST
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How sexual harassment happen and where to report

सेक्शुअल हैरेसमेंट को लेकर बहुत सारे लोग अलग-अलग तरह की बातें करते हैं और भारत में इसे एक बड़ी समस्या की तरह माना जा सकता है। कई मामलों में हमें ये समझ नहीं आता है कि आखिर इसके लिए क्या किया जाए। अधिकतर सेक्शुअल हैरेसमेंट के केस तो रिपोर्ट ही नहीं हो पाते हैं और भारत में एक समस्या जो कई लड़कियों को फेस करनी पड़ती है वो है विक्टिम ब्लेमिंग की। हाल ही में केरल कोज़ीकोड सेशन कोर्ट का एक ऐसा ही फैसला देखा गया है। 

एक्टिविस्ट सिविक चंद्रन को सेक्शुअल हैरेसमेंट के एक केस में बेल मिल गई है जिसमें कोर्ट ने ये फैसला दिया है कि अगर कोई महिला छोटे या फिर प्रोवोकेट करने वाले ड्रेस पहने तो उसे सेक्शुअल हैरेसमेंट नहीं माना जाएगा। 

क्या है पूरा मामला?

सोशल एक्टिविस्ट चंद्रन पर एक युवा राइटर ने सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोप लगाए थे। ये आरोप था कि चंद्रन ने उस लड़की के साथ नंदी बीच में लगे एक कैंप में छेड़छाड़ करने की कोशिश की। 74 साल के चंद्रन ने अपनी सफाई में उस समय की तस्वीरें पेश की थीं। 

kerala court and sexual harrasment

ऐसे में कोर्ट ने ये फैसला सुनाया कि महिला 'सेक्शुअली प्रोवोकेटिव कपड़े' पहने हुई थी। कोर्ट के ऑर्डर के हिसाब से, 'जो तस्वीरें बेल एप्लीकेंट द्वारा दी गई हैं वो बताती हैं कि शिकायतकर्ता ने खुद ही एक्सपोजिंग ड्रेस पहनी थीं जो सेक्शुअली प्रोवोकेटिव थी। इसलिए धारा 354 ए प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ नहीं जाएगी।'

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मामले का दूसरा पहलू भी है

मामले का दूसरा पहलू ये है कि मिस्टर चंद्रन 74 साल के हैं और फिजिकली चैलेंज्ड हैं और इसलिए कोर्ट ने ये भी कहा कि, 'हालांकि, फिजिकल कॉन्टैक्ट को माना जा सकता है, लेकिन 74 साल का इंसान जो फिजिकली डिसएबल है वो खुद को किसी और पर फोर्स कर सकता है और उसे अपनी गोद में बैठा सकता है ये मानने में थोड़ी मुश्किल हो रही है।' (कितनी तरह के हो सकते हैं सेक्शुअल एब्यूज)

महिला के हिसाब से मिस्टर चंद्रन ने नंदी बीच पर एक कैम्प ऑर्गेनाइज किया था जो 8 फरवरी 2020 को हुआ था। शिकायतकर्ता के मुताबिक मिस्टर चंद्रन उन्हें फोर्स से एक सुनसान जगह पर लेकर गए थे और फिर उन्हें गलत तरह से छूने की कोशिश की। इस साल जुलाई में ही उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ था।  

इस मामले में ये दलील भी दी गई थी कि अगर ये हुआ था तो आखिर दो साल तक का इंतजार क्यों करना पड़ा?

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विक्टिम ब्लेमिंग को लेकर उठ रहे हैं सवाल 

यहां पर कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़े नहीं किए जा रहे हैं बल्कि विक्टिम ब्लेमिंग की बात को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या वाकई प्रोवोकेटिव ड्रेस पहनना ही सेक्शुअल हैरेसमेंट को दावत देना है? अधिकतर लोग इसी माइंडसेट पर काम करते हैं और विक्टिम ब्लेमिंग असल में बहुत ज्यादा बड़ी समस्या बनता जा रहा है। अगर विक्टिम ब्लेमिंग की बात करें तो इसे बहुत ज्यादा समस्या माना जाता है।  

छोटे कपड़े पहनना शायद अपनी पर्सनल च्वाइस हो सकती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि किसी लड़की को उसके लिए ब्लेम किया जाए।  

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