जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में एक विशेष अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए 6 आरोपियों को दोषी ठहराया है। इन आरोपियों में सांझी राम, आनंद दत्ता, परवेश कुमार, दीपक खजूरिया, सुरेंद्र वर्मा और तिलक राज शामिल हैं। इन आरोपियों में सांझी राम सहित तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं तीन अन्य आरोपियों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई गई है। मासूम बच्ची के साथ रेप और नृशंस हत्या के इस मामले ने देश को झकझोर कर रख दिया था और पूरे देश में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए आंदोलन हुए थे। इस मामले में बंद कमरे में सुनवाई तीन जून को पूरी कर ली गई थी। इस संवेदनशील मामले पर फैसला आने के मद्देनजर अदालत और उसके आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और 1000 से ज्यादा पुलिसवालों को पठानकोट कोर्ट के आसपास तैनात किया गया है। 

नेताओं ने किया फैसले का स्वागत

इस मामले पर यह फैसला आने के बाद कई नेताओं ने इसका स्वागत किया है। 

 

 

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मां-बाप की आंखों का तारा थी मासूम बच्ची

kathua rape murder case six held guilty inside

कुछ साल पहले इस पीड़ित परिवार की दो बेटियां एक हादसे में मारी गईं थीं। तब अपनी पत्नी के कहने पर इस मासूम को गोद लिया था, जो उनके रिश्तेदार की बेटी थी। यह नन्हीं बच्ची पूरे घर में दौड़ती रहती थी और अपने माता-पिता के लिए जीने का सहारा थी। जब वे लोग सफर करते थे, तब यह मासूम भैसों और घोड़ों का ध्यान रखती थी। यह बच्ची चरवाहों से भी काफी घुली-मिली हुई थी। 

घर से इस तरह लापता हुई थी मासूम

10 जनवरी, 2018 को यह मासूम लापता हो गई थी। इस बच्ची का परिवार जम्मू शहर से 72 किमी दूर पूर्व दिशा में एक गांव में रह रहा था। उस दोपहर यह बच्ची अपने घोड़ों को वापस लेने गई थी। घोड़े लौट आए लेकिन बच्ची नहीं लौटी। इस पर मासूम के मां-बाप और कुछ पड़ोसी उसकी तलाश में निकल पड़े। लालटेन और टॉर्च लेकर ये लोग पूर रात जंगलों में बच्ची को खोजते रहे लेकिन वह कहीं नहीं मिली। दो दिन बाद 12 जनवरी को परिवार ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई, लेकिन इस मामले में पुलिस ने मदद नहीं की। 

इस खबर के फैलने के बाद काफी विरोध प्रदर्शन हुए और हाईवे जाम कर दिया गया। तब दबाव में आकर पुलिस ने कठुआ मामले की चार्जशीट दाखिल की और अफसर मासूम की तलाश में जुटे। मासूम की मां ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में बताया कि मासूम को काफी टॉर्चर किया गया था, उसके पैर टूटे हुए थे और काले पड़ चुके थे। उसके हाथ और उंगलियां चोटिल थीं और उन पर गहरे जख्म दिखाई दे रहे थे।   

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जांचकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा था

23 जनवरी, 2018 को मासूम की बॉडी बरामद होने के बाद जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी थी। जांचकर्ताओं के अनुसार मासूम को नशीली दवाएं दी गई थीं। चार्जशीट में कहा गया कि मासूम के साथ कई बार रेप किया गया, कई बार टॉर्चर करने के बाद आखिर में उसकी हत्या कर दी गई। 

वुमन राइट्स एक्टिविस्ट ने बच्चियों की सुरक्षा पर ये कहा था

रंजना कुमारी ने इस मामले पर बयान देते हुए देश में बच्चियों की सुरक्षा पर सवाल थे। उनका कहना था, 

'बच्चियों की सुरक्षा के मामले में परिवार वालों को खुद सोचने की जरूरत है। हर तरफ माहौल काफी बिगड़ा हुआ है। एक फैक्ट ये भी है कि बच्चियों के साथ होने वाले रेप और यौन हिंसा के 90 फीसदी मामले दर्ज ही नहीं होते। बच्ची की सिक्योरिटी के मामले में रिश्तेदारों पर भी भरोसा ना करें।'