अकसर देखने  में आता  है  कि कई बच्चे आवश्यकता से अधिक चंचल  या फिर  बहुत शांत व गुमसुम रहना पसंद करते हैं। इसलिए उनकी उदासी या खुशी के संकेतों को समझना अभिभावक के  लिए चुनौतियों भरा होता है ।

आरती  की  आठ साल की बच्ची परी  उसकी समझ से परे है। उसकी बच्ची  लोगों से दूर भागती है। वो अपनी बेटी को कुछ कह भर दे कि उसका आंसू बहना शुरू हो जाता है। उसे न तो दूसरी बच्चियों के साथ खेलना पसंद है और न ही वह अपना सामान किसी को हाथ लगाने देती है। आरती को  समझ  नहीं  आ  रहा  था  कि उसकी  बेटी को  हुआ  क्या  है? इस बच्ची के जैसे और भी कई बच्चे होते हैं, जो दुनिया से कटे-कटे रहते हैं और कहीं न कहीं इन सभी की मांएं अपने बच्चों को परी की ही तरह दुनिया की भीड़ में शामिल करने में जुटी रहती हैं। इस बारे में समीर  पारिख का  कहना  है कि हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है लेकिन कई बच्चे आवश्यकता से अधिक शांत होते हैं,उनके मन में क्या चल रहा है ये पता करना कठिन है फिर भी आपको उनकी कुंठाओं का निदान समय रहते ही करना बहुत  जरुरी होता है  ताकि वो मानसिक रुप से स्थिर और कॉन्फिडेंट महसूस करें । वो  कैसे?  आइए  जानें -

बच्चों को  टाइम  दें

child silence INSIDE

साइकोलोजिस्ट एंड द डायरेक्टर ऑफ़  डिपार्टमेंट  ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड बिहेविओरल साइंसेज, फोर्टिस हेल्थ केयर के समीर पारिख  कहते हैं  कि 8 से लेकर 16 वर्ष की उम्र में बच्चों के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं और इस दौरान उनका मानसिक विकास भी तेजी से हो रहा होता है इसलिए अभिभावक की  जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है कि  वो  बच्चे  को पूरा  समय  दें।

 

इसे भी पढ़ें: आपके नटखट बच्चे झटपट मान लेंगे आपका कहना अगर आप ये तरीके आजमाएंगी

भावनाओं का ख़्याल  रखें

ऐसी स्थिति में उन्हें डांट नहीं क्योंकि ऐसे संवेदनशील बच्चे इन्हीं बातों को दिल से लगा बैठते हैं और उनका सोचने का तरीका नकारात्मक होने लगता है और धीरे-धीरे उन्हें सामान्य-सी बात समझाना भी मुश्किल पड़ने लगता है।

सब्र से काम लें

child silence  INSIDE

ऐसे  बच्चे भावनाओं से ओतप्रोत होते हैं। इनको समझने और समझाने के लिए आपको सबसे पहले खुद में सब्र लाना जरूरी है। इसलिए  बिना धैर्य खोये उससे  बात  करें और उससे बातें करें।

रूटीन में चेंज लाएं

बच्चे की रूटीन में आप थोड़ा चेंज लेकर आइए .कोशिश करें कि उसे बच्चों के बीच अब ज्यादा लेकर जाएं,  जहां पर उसे बच्चे मिलेंगे उनके साथ खेलेगा। वह अपने आप एक्टिविटी सीखेगा और साथ ही वह ज्यादा बात करना भी सीखने लगेगा।

कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ाएं

इसे भी पढ़ें: कहीं आप भी तो नहीं कर रही बच्चों की हेलिकॉप्टर पेरेंटिंग?

कभी भी उसके चुप रहने पर या गुमसुम रहने पर उसे डांटे नहीं. हमेशा प्यार दे.उसका कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ाएं .बच्चे जब बच्चों में होते हैं तब वह बहुत सारी चीजें ऐसे जल्दी सीखते हैं जो हम उन्हें खुद नहीं दिखा पाते तो बच्चा अगर बाहर बच्चों के बीच खेलेगा अपने आप ज्यादा एक्टिविटी सीखेगा और बातें करना भी सीख जाएगा।

child silence INSIDE  

बातचीत करें

अपने बच्चे से बातचीत करें और जानने की कोशिश करें कि अरे किसी प्रकार की कोई दिक्कत तो नहीं है| कई बार बच्चे जब कुछ नया चीज लिखते रहते हैं और उनको समझ में नहीं आता है तो उस वक्त भी वह बहुत गुमसुम से रहते हैं ऐसे में आप बच्चों की सहायता करें उन्हें सब चीज अच्छे से समझाएं।

दोस्त बने

बच्चा जब भी आपको गुमसुम लग रहा है आप उनसे पूछने की कोशिश करें कि उनको क्या परेशानी है और हो सके तो उनका दोस्त बनकर उनके साथ रहे. ऐसे  में बच्चे बहुत  बाते आसानी  से  बता  देते  हैं।