हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है। इस दिन भगवान् विष्णु जी की पूजा बड़ी ही श्रद्धा भाव से की जाती है। एक महीने में 2 और पूरे साल में 24 एकादशी तिथियां होती हैं। जिनमें से हर एक एकादशी तिथि अपने आप में विशेष महत्त्व रखती है। ऐसी ही एकादशी तिथियों में से एक है अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि जिसे इंदिरा एकादशी के नाम से भी जानते हैं। ये एकादशी पितृपक्ष में होती है इसलिए इसका महत्त्व और ज्यादा बढ़ जाता है। आइए नई दिल्ली के पंडित एवं वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें इस साल कब मनाई जाएगी इंदिरा एकादशी और इसका क्या महत्त्व है।

इंदिरा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त 

indira ekadashi date time

  • इंदिरा एकादशी की तिथि - इस साल अश्विन महीने में कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि 2 अक्टूबर, शनिवार के दिन पड़ेगी। 
  • एकादशी तिथि प्रारम्भ- 01 अक्टूबर 2021 को 11:03 पीएम
  • एकादशी तिथि समाप्त- 02 अक्टूबर 2021 को 11:10 पीएम
  • इंदिरा एकादशी पारण का समय- 03 अक्टूबर 2021 को 06:15 एएम से 08:37 एएम तक

इंदिरा एकादशी का महत्त्व 

significance indira ekadashi

अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यतानुसार इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। इस दिन पूजा का विशेष महत्त्व है और इस दिन व्रत कथा सुनना पुण्यकारी होता है।  इस दिन व्रत रखने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और कहा जाता है कि इस दिन व्रत कथा सुनना जरूरी होता है वरना व्रत अधूरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष  में होने वाली एकादशी का व्रत एवं पूजन करने से पितरों को शांति भी मिलती है और उनकी कृपा दृष्टि भी बनी रहती है। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन माता लक्ष्मी समेत करना भी विशेष रूप से फलदायी होता है। 

Expert Tips: पितरों को तर्पण देने का महत्व, विधि और शुभ मुहूर्त जानें

Recommended Video

इंदिरा एकादशी व्रत कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में महिष्मति नाम का एक नगर था इस नगर का राजा इंद्रसेन था, जो बहुत प्रतापी था। राजा अपनी प्रजा का पालन-पोषण अपनी संतान की तरह ही करता था।  इंद्रसेन के राज किसी को कोई कमी नहीं थी। राजा इंद्रसेन भगवान विष्णु का बहुत बड़ा उपासक था और एक दिन अचानक राजा इंद्रसेन की सभा में नारद मुनि का आगमन हुआ। नारद मुनि वहां राजा के पिता का संदेश लेकर पहुंचे राजा के पिता ने इंद्रसेन को संदेश भेजा कि पिछले जन्म में किसी भूल के कारण वह यमकोल में ही हैं और उन्हें यमलोक से मुक्ति के लिए उनके पुत्र को इंदिरा एकादशी का व्रत रखना होगा जिसे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके। तब नारद जी ने बताया कि यह एकादशी अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ती है। एकादशी से पूर्व दशमी के दिन पितरों का श्राद्ध करने के बाद एकादशी का व्रत का संकल्प लेकर व्रत करने और  द्वादशी के दिन स्नान आदि के बाद भगवान विष्णु की पूजा करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। नाराद मुनि के बताए अनुसार राजा इंद्रसेन ने इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जिसके पुण्य से उनके पिता को मोक्ष की प्राप्ति हुई और वे बैकुंठ चले गए। तभी से यह इंदिरा एकादशी व्रत फलदायी माना जाता है। 

इंदिरा एकादशी पूजा विधि 

puja vidhi tithi

  • इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें।
  • भगवान विष्णु की पूजा करें और व्रत का संकल्प करें। 
  • इंदिरा एकादशी के दिन महात्मय की कथा पढ़ें और सुनें। 
  •  इसके अलावा विष्णु सहस्त्रनाम और विष्णु सतनाम स्त्रोत का पाठ जरूर करें। 
  • पाठ के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (जानें किन चीज़ों में होता है माता लक्ष्मी का वास ) की आरती करें और प्रसाद का भोग लगाकर सभी सदस्यों में बांटे। 
  • भगवान विष्णु से पितरों की शांति की कामना करनी चाहिए। 

इस प्रकार इंदिरा एकादशी में पूजन करने से विशेष फलों की प्राप्ति होने के साथ पितरों को शांति भी मिलती है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit:  freepik