हमारे देश में आज भी महिलाएं अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस करने के मामले में बहुत मुखर नहीं हैं। अक्सर घरों में पुरुष चर्चा कर रहे होते हैं और महिलाएं किचन में कुकिंग या घर-गहस्थी के कामों में व्यस्त रहती हैं। अपने विचारों को बहुत ज्यादा जाहिर नहीं करने की वजह से बहुत सी महिलाएं खुद में कॉन्फिडेंट महसूस नहीं करतीं। कॉन्फिडेंस ना फील करना महिलाओं को मानसिक रूप से गहरे प्रभावित करता है। कम बोलने और लोगों से बात करने में झिझक महसूस होने की परेशानी फील करने वाली महिलाएं अक्सर किसी अपनी तारीफ किए जाने पर भी रेसपॉन्स नहीं दे पातीं। घर-गृहस्थी के कामों को बेहतरीन तरीके से करना, बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतों का खयाल रखना और तमाम छोटी-छोटी चीजों को मैनेज करते हुए ऑफिस की जिम्मेदारियां संभालना कोई आसान काम नहीं है, इसीलिए जब महिलाओं को इसके लिए तारीफ मिलती है तो उन्हें इस पर रेसपॉन्स भी ऐसा देना चाहिए, जिससे सामने वाला भी इंप्रेस हुए बिना ना रह सके।

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Husne Nazar e taan ast. So in Afghani culture when someone compliments you, it’s wrong to turn around and say thank you. Instead what you say is, Husne nazar e taan ast. Loosely translated, it would mean, i am beautiful only through your eyes or beauty lies in the eyes of the beholder. And this really is so true. How we see people or ourselves for that matter, is a matter of perspective. Beauty is not really in the sight but in the vision. And it’s time we women muster the courage and self esteem to see ourselves as beautiful. Because husne nazar e taan ast. And because doston, jo dil mein hota hai, wahi duniya mein dikhta hai. #afghanistan #dari #languageoflove #culture

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हेल्दी लिविंग को प्रमोट करने वाली सेलेब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने इस तरह से तारीफें मिलने पर रेसपॉन्स देने का एक ऐसा तरीका बताया है, जिसके बारे में जानने पर आपको भी बहुत अच्छा लगेगा और आप इसे अपने व्यवहार में जरूर शामिल करना चाहेंगी। तो आइए जानते हैं कि रुजुता दिवेकर के अनुसार तारीफ मिलने पर कैसा रेसपॉन्स देना चाहिए। 

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अफगानी संस्कृति से लें इंस्पिरेशन

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रुजुता दिवेकर बताती हैं कि अफगानी संस्कृति में जब कोई कॉम्प्लीमेंट देता है तो उसे पलटकर थैंक्स कहना अच्छा नहीं माना जाता। इसकी बजाय अफगानी भाषा में कहा जाता है हुस्ने नजर ए तान अस्त। हिंदी में इसे कह सकते हैं- मैं आपकी आंखों से खूबसूरत दिख रही हूं। अंग्रेजी में एक प्रचलित कहावत है beauty lies in the eyes of the beholder जिसमें ऐसा ही भाव आता है और यह बहुत सच है। हम लोगों को यहा खुद को जब देखते हैं तो एक खास नजरिए से देखते हैं। सुंदरता हमारी आंखों में नहीं होती, बल्कि हमारे नजरिए में होती है। और वक्त आ गया है, जब महिलाओं को अपने भीतर साहस पैदा करना चाहिए और अपने भीतर की सुंदरता को देखना चाहिए। यह मैं इसलिए भी कहूंगी क्योंकि जो हमारे दिल में होता है, वही दुनिया में  भी दिखता है। 

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तारीफ पर खामोश रह जाना सही नहीं

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बहुत सी महिलाएं तारीफ मिलने पर संकोचवश शांत रह जाती हैं और कोई भी रेसपॉन्स नहीं देतीं या हैरानी वाले भाव जाहिर करने लगती हैं। इसकी बजाय महिलाओं को अपनी तारीफ को खुले दिल से स्वीकार करना चाहिए। जो व्यक्ति तारीफ कर रहा है, उसके साथ गर्मजोशी से बात करनी चाहिए और भविष्य में होने वाली बातचीत में उसके पॉजिटिव रेसपॉन्स को ध्यान में रखना चाहिए। इससे लंबे दौर में कम्यूनिकेशन और रिलेशन दोनों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

आप चाहें तो तारीफ करने वाले की किसी अच्छी चीज की आप भी तारीफ कर सकती हैं, उसकी तरफ से तारीफ मिलने पर थैंक्स कह सकती हैं और एक क्यूट सी स्माइल दे सकती हैं। 

तारीफ पर ना जताएं ऐतराज

बहुत सी महिलाएं तारीफ करने पर ऐतराज जताती हैं। कुछ कहती हैं, 'ऐसी तो कोई बात नहीं' या फिर 'इसमें ऐसा कुछ खास नहीं था', लेकिन इस तरह का रेसपॉन्स तारीफ करने वाले को बहुत पॉजिटिव फील नहीं कराता। इसीलिए इस तरह से व्यवहार करना सही नहीं है, क्योंकि इससे प्रशंसा करने वाले व्यक्ति को लग सकता है कि आपने उसकी प्रशंसा को स्वीकार नहीं किया।