इस वक्त अफगानिस्तान का नाम जिस तरह से लिया जा रहा है वो देखकर सभी परेशान हैं और अफगानिस्तान में मौजूद लोगों की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। ये वक्त उस देश के लिए बहुत भारी है। वैसे तो अफगानिस्तान ने 1980 के दशक के बाद कभी भी शांति नहीं देखी, लेकिन फिर भी हालात बीच-बीच में सुधरे भी थे। वैसे तो बॉलीवुड की कई फिल्में अफगानिस्तान में शूट हुई हैं, लेकिन एक खास फिल्म ऐसी भी थी जिसकी शूटिंग के लिए खुद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने देश की आधी फौज खड़ी कर दी थी। 

ये फिल्म थी अमिताभ बच्चन और श्रीदेवी की सुपरहिट फिल्म 'खुदा गवाह'। इस फिल्म की शूटिंग 1992 में हुई थी और उस समय अफगानिस्तान में जंग चल रही थी। 1989 में USSR के हमले के बाद 1990 के दशक में अफगानिस्तान में कई आतंकी संगठन अपने पैर भी पसार रहे थे। ऐसे समय में उस देश में शूटिंग करना आसान नहीं था। 

इस दौरान अफगानिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति नजीबुल्लाह अहमदज़ई (Najibullah Ahmadzai) हुआ करते थे। हालांकि, जब खुदा गवाह बनी थी तब सिर्फ सोवियत संघ के कारण ही अफगानिस्तान परेशान था, लेकिन उस समय भी लगातार सड़कों पर टैंक चलते थे, बम धमाके होते थे और शूटिंग करना आसान नहीं था। 

khuda gawah in afghanistan

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किस तरह हुई थी फिल्म की शूटिंग?

राष्ट्रपति नजीबुल्लाह अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े फैन हुआ करते थे और उन्हें हिंदी फिल्मों का शौक भी था। इसलिए जब फिल्म का यूनिट अफगानिस्तान पहुंची तो राष्ट्रपति ने ऐलान किया कि अफगान सरकार खुद इस फिल्म की सुरक्षा का जिम्मा उठाएगी। 

जिस वक्त ये शूटिंग चल रही थी उस वक्त देश की आधी एयर फोर्स सिर्फ इस फिल्म के यूनिट की सुरक्षा में लगा दिया गया था। सोचिए एक देश की आधी एयरफोर्स 18 दिनों तक सिर्फ शूटिंग के क्रू की रक्षा कर रही थी और ये वो दौर था जब अफगानिस्तान पहले से ही सोवियत संघ की परेशानी झेल रहा था। 

'खुदा गवाह' का फेमस बुशकाशी (Buzkashi) स्पोर्ट वाला सीन अफगानिस्तान के मज़ार-ए-शरीफ में शूट किया गया था।  

movie shooting khuda gawah

टैंक और बंदूकधारी चलते थे सड़कों पर- 

इस फिल्म की शूटिंग को लेकर अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा है ये, 'ये मेरी जिंदगी की बहुत ही यादगार ट्रिप रही है और यहां सुरक्षा का खतरा था ही क्योंकि सड़कों पर टैंक और बंदूकधारी सैनिक चलते रहते थे। उस समय कुछ अफगानी सरदारों ने हमें न्योता दिया था और हम एक चॉपर में बैठे थे और अन्य पांच चॉपर हमारे पीछे चल रहे थे। अफगानी पहाड़ों के बदलते रंग जहां खूबसूरत पहाड़ पहले बैंगनी फिर गुलाबी और फिर लाल दिल रहे थे क्योंकि उनमें खसखस उगाई जा रही थी।' 

 
 
 
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अमिताभ बच्चन और टीम को मिला था ऐसा स्वागत- 

अमिताभ बच्चन और उनकी टीम को इस तरह का स्वागत दिया गया था जहां उनके लिए बुशकाशी का खेल आयोजित किया गया था और जब वो हेलिकॉप्टर से उतरे तब  उन्हें कंधों पर उठा लिया गया क्योंकि अफगानिस्तान में अतिथियों का स्वागत इसी तरह से किया जाता है। उनके लिए बुशकाशी का आयोजन किया गया था और टेंट आदि सब कुछ सिर्फ उनके लिए लगाए गए थे। उनका भव्य स्वागत हुआ और कई तोहफे दिए गए थे। यही नहीं जब वो लोग वापस भारत आने वाले थे उसके एक रात पहले राष्ट्रपति ने उन्हें अपने महल में बुलाया था और फिर उनके लिए एक फंक्शन रखा था।  

अमिताभ बच्चन ने ये सारा एक्सपीरियंस 2013 में अपनी एक फेसबुक पोस्ट पर शेयर किया था।  

इस पोस्ट के अंत में अमिताभ बच्चन ने ये भी लिखा था कि, 'पता नहीं अब हमारे मेज़बान कहां होंगे।' 

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इसलिए अफगानिस्तान में शूटिंग का किया था फैसला-

फिल्म की कहानी में बादशाह खान (अमिताभ बच्चन) बेनजीर (श्रीदेवी) से प्यार करता है पर बेनजीर के पिता के हत्यारे का पता लगाने के लिए वो अफगानिस्तान से भारत जाता है। ये पूरी कहानी बादशाह खान और श्रीदेवी के प्यार और अफगानिस्तान और भारत के अलग-अलग हिस्सों पर आधारित है और इसलिए जब फिल्म का ओपनिंग सीक्वेंस बुशकाशी  (अफगानिस्तान का अहम स्पोर्ट)  पर आधारित होने वाला था तब अमिताभ बच्चन ने ये सलाह दी कि फिल्म की शूटिंग अफगानिस्तान में ही होनी चाहिए।  

ये फिल्म अपने आप में ऐतिहासिक है क्योंकि शायद ही किसी फिल्म की शूटिंग के लिए इस तरह के इंतज़ाम किसी देश में किए गए हैं। यकीनन ये फिल्म अफगानिस्तान की खूबसूरती को भी दिखाती है।  

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