“घूरो मत, हम स्तनपान कराना चाहती हैं”, इस मैसेज के साथ एक इंडियन मैगज़ीन ने अपने कवर पर दूध पिलाती एक मॉडल की फोटो लगाई जिसे लेकर एक अजीब सी बहस छिड़ गई है। 

एक मलयाली मैगज़ीन है, ‘गृहलक्ष्मी’। इस मैगज़ीन ने अपने मार्च अंक के कवर पर बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराती एक मॉडल की तस्वीर छापी है। जिसकी हेडलाइन है, "माएं केरल वालों से कह रही हैं घूरो मत, हम स्तनपान कराना चाहती हैं" ये कवर मातृभूमि ग्रुप के एक कैंपेन का हिस्सा है। यह ग्रुप इस मुद्दे को पब्लिक स्फेयर में उठाकर ब्रेस्टफीडिंग जैसी चीज को नॉर्मल बनाने की कवायद कर रहा है। 

इंडिया और खासकर केरल जहां ये मैगज़ीन छपी है, इस विषय को एक बहस के रूप में देखा जा रहा है। जहां कुछ लोग इस कदम की तारीफ कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें ये चीज नागवार गुजरी है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर एक बहस छिड़ गई है। 

साथ ही ऐसा माना जा रहा है कि पहली बार किसी इंडियन मैगज़ीन ने किसी महिला की ब्रेस्टफीडिंग कराने की तस्वीर को कवर फोटो बनाया है। 

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ब्रेस्टफीडिंग कराती मॉडल की तस्वीर छापने पर मैगज़ीन पर केस

एक वकील ने गृहलक्ष्मी मैगजीन के खिलाफ केस दर्ज कराया है जिसके कवर पेज पर मॉडल की एक बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराते हुए तस्वीर छापी गई थी। 

एएनआई के अनुसार, वकील विनोद मैथ्यू ने कोल्लम मैगजीन के कवर पेज पर छपी इस फोटो को लेकर स्थानीय कोर्ट में केस दर्ज कराया है। मलयालम मॉडल गीलू जोसेफ (Gilu Joseph) की गृहलक्ष्मी के पेज पर ब्रेस्टफीडिंग कराते हुए फोटो ने सोशल मीडिया में सनसनी मचा दी थी। 

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मलयालम मॉडल गीलू जोसेफ ने एक मीडिया हाउस को दिए अपने इंटरव्यू में कहा कि वो वहीं करती हैं जो उन्हें लगता है कि वो मेरे लिए ठीक है। उनका कहना है, “मैं फेल हो सकती हूं लेकिन मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है। महिलाओं को बिना किसी निषेध और डर के आजादी के साथ ब्रेस्टफीड कराना चाहिए और आर्टिकल में यह मेरा संदेश भी था लेकिन लोग इस पर आपत्ति जताने लगे वो भी बिना जाने कि मैं क्या कहना चाह रही हूं।” 

साथ ही उनका कहना है, "मुझे पता था कि इसके लिए मुझे बहुत आलोचना झेलनी पड़ेगी लेकिन मैंने उन मांओं के लिए खुशी से ये फैसला लिया जो गर्व और आजादी से ब्रेस्टफीडिंग कराना चाहती हैं।“ 

गृहलक्ष्मी मैगज़ीन के कवर पर मॉडल गीलू जोसेफ बच्चे को छाती से लगाए कैमरे की ओर देख रही हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पहली बार किसी भारतीय मैगज़ीन ने किसी महिला की ब्रेस्टफीडिंग कराने की तस्वीर को कवर फोटो बनाया है लेकिन ये मॉडल खुद मां नहीं है इस बात ने बहस छेड़ दी है। गृहलक्ष्मी के संपादक ने कहा कि मैगज़ीन माओं की सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान कराने की ज़रूरत के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहती थी। 

सोशल मीडिया पर लोगों का कुछ ऐसा कहना है, “बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराती असल मां को अंदर के पन्नों में जगह देने और एक मॉडल को बच्चे और वस्त्रहीन स्तनों के साथ कवर पर पेश करने का फैसला सही नहीं। यह सिर्फ मार्केटिंग है।“ 

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इस एक्ट्रेस ने की थी सोशल मीडिया पर ब्रेस्टफीडिंग कराते हुए पोस्ट 

वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक के मौके पर मॉडल से एक्ट्रेस बनीं लीज़ा हेडन (Lisa Haydon) ने सोशल मीडिया पर अपने तीन महीने के शिशु को ब्रेस्टफीडिंग कराते हुए अपनी एक फोटो पोस्ट की थी। क्या गलत था उसमें भी? एक मां अपने बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराना गलत नहीं समझती है और उसके लिए यह नए जीवन जैसा होता है फिर इसमें क्या गलत है? आखिरकार क्यों ब्रेस्टफीडिंग को छिप –छुपाकर किया जाता है? 

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सार्वजनिक जगहों पर ब्रेस्टफीडिंग कराना एक विवादास्पद मुद्दा

स्कॉटलैंड में एक सर्वे बताता है कि एक चौथाई से अधिक माओं ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर ब्रेस्टफीडिंग कराने में असहज महसूस होता है। पिछले साल एक स्टडी से पता चला कि ब्रिटेन में स्कॉटलैंड कराने की दर दुनिया में सबसे कम थी। सिर्फ 200 में से एक महिला या 0.5% एक साल बाद कुछ हद तक ब्रेस्टफीडिंग करा रही थीं जबकि जर्मनी में ये आंकड़ा 23%, अमरीका में 27%, ब्राज़िल में 56%, सेनेगल में 99% था। 

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आखिरकार बहस किस बात की है?

भारत में पारंपरिक साड़ी पहनने वाली कई महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं वो ब्लाउज़ की मदद से ऐसा कर पाती हैं लेकिन कहीं ना कहीं उन्हें भी असहज महसूस होता है। 

अगर ऐसे में उन महिलाओं की बात की जाएं जो साड़ी नहीं पहनती हैं उनके पास क्या ऑप्शन है। जब साड़ी पहनने वाली महिला ही ब्रेस्टफीडिंग कराते टाइम असहज महसूस करती हैं तो फिर जींस टॉप के बारे में क्या कहा जाएं। किसी भी कपड़े में कोई बुराई नहीं है लेकिन ब्रेस्टफीडिंग कराते टाइम उन्हें जिस तरीके से देखा जाता है बुराई उसमें हैं। 

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मां बनना किसी महिला के जीवन की सबसे बड़ी खुशी है या नहीं, इस पर लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है लेकिन इस बात पर बिल्कुल नहीं कि महिलाएं अपने बच्चों को खुले में दूध पिलाएं या नहीं। 

हैरानी की बात तो यह है कि जो लोग मां बनने की खुशी को दैवीय मानते हैं वही उनके खुले में ब्रेस्टफीडिंग को लेकर जज़्बाती हो जाते हैं। उन्हें जान लेना चाहिए कि ब्रेस्टफीडिंग भी महिलाओं में होने वाले पीरियड्स की ही तरह नेचुरल है। इसमें शर्मिंदा होने या लुका-छिपी करने वाली कोई बात नहीं है लेकिन दिक्कत ये है कि भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में ब्रेस्टफीडिंग को सेक्स जितना ही प्राइवेट माना जाता है जो आप लोगों के सामने नहीं कर सकते हैं। आप ही सोचिए अपने बच्चे को खुले में ब्रेस्टफीडिंग कराने में क्या बुराई हो सकती है?