हिंदू धर्म के अनुसार सभी देवी देवताओं की पूजा का विशेष महत्त्व है। उन्ही देवी देवताओं में से एक हैं गायत्री माता। गायत्री माता को भगवान ब्रह्मा जी की पत्नी स्वरुप माना जाता है और उनके अवतरण दिवस को गायत्री जयंती के रूप में मनाया जाता है। प्राचीन काल से गायत्री जयंती मनाने की प्रथा चली आ रही है। हर साल यह तिथि ज्येष्ठ महीने की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। 

हालांकि भारत के कुछ हिस्सों जैसे दक्षिणी भारत में ये तिथि श्रावण महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। लेकिन वास्तविक गायत्री जयंती की तिथि ज्येष्ठ माह की एकादशी को ही होती है और इस दिन बड़े ही श्रद्धा भाव से माता गायत्री का पूजन अर्चन करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का विधान है। आइए नई दिल्ली के जाने माने पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी से जानें साल 2021 में कब मनाई जाएगी गायत्री जयंती और इसका क्या महत्त्व है। 

गायत्री जयंती की तिथि व मुहूर्त 

gayatri jayanti date

हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल 2021 में गायत्री जयंती ज्येष्ठ महीने की एकादशी तिथि को मनाई जाएगी। ज्येष्ठ के महीने में एकादशी तिथि 21 जून, सोमवार के दिन मनाई जाएगी। इस दिन माता गायत्री का पूजन अत्यंत शुभ होता है और व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। 

  • गायत्री जयंती की तारीख  – 21 जून 2021
  • गायत्री जयंती की तिथि – ज्येष्ठ मास एकादशी 
  • गायत्री जयंती तिथि प्रारंभ – 20 जून 2021 को सायं 4ः21 
  • गायत्री जयंती तिथि समाप्त – 21 जून 2021 को दोपहर 01ः31 तक 
  • उदया तिथि में एकादशी तिथि 21 जून को मनाई जाएगी इसलिए इसी दिन माता गायत्री का पूजन किया जाएगा। 

कौन हैं माता गायत्री 

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माता गायत्री को त्रिमूर्ति देव ब्रह्मा, विष्णु और महेश की देवी माना जाता है। सभी वेदों की देवी होने के कारण गायत्री को वेद माता के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें समस्त सात्विक गुणों का प्रतिरूप माना गया है और ब्रह्मांड में मौजूद समस्त सद्गगुण माता गायत्री की ही देन माने जाते। हैं। माता गायत्री को देवताओं की माता और देवी सरस्वती, पार्वती और लक्ष्मी सभी के अवतार के रूप में माना और पूजा जाता है। 

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माता गायत्री के विवाह की कथा 

पौराणिक मान्याताओं के अनुसार माता गायत्री का विवाह ब्रह्माजी से हुआ था। हिंदू वैदिक साहित्य और पुराणों के अनुसार ब्रह्माजी की दो पत्नियां हैं, एक गायत्री और दूसरी सावित्री। ब्रह्मा जी की अर्धांगिनी होने के नाते दुनिया में निरंतरता बनाए रखने के लिए माता गायत्री चेतन जगत में कार्य करतीं हैं। वहीं माता सावित्री भौतिक जगत के संचालन में मदद करती है। इस प्रकार माता गायत्री का पूजन विशेष महत्त्वपूर्ण होता है। 

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गायत्री माता का पूजन 

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अथर्ववेद में बताया गया है कि मां गायत्री से आयु, प्राण, प्रजा, पशु, कीर्ति, धन एवं ब्रह्मवर्चस मिलता है। विधि और नियमों से की गई गायत्री उपासना रक्षा कवच के रूप में कार्य करती है। इनकी पूजा से सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। देवी गायत्री की उपासना करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हिंदू धर्म में मां गायत्री को पंचमुखी माना गया है। जिसका अर्थ है यह संपूर्ण ब्रह्मांड जल, वायु, पृथ्वी, तेज और आकाश के पांच तत्वों से बना है। संसार में जितने भी प्राणी हैं, उनका शरीर भी इन्हीं पांच तत्वों से बना है। पृथ्वी पर प्रत्येक जीव के भीतर गायत्री प्राण-शक्ति के रूप में है। यही कारण है गायत्री को सभी शक्तियों का आधार माना गया है। इसीलिए गायत्री माता की उपासना के दौरान गायत्री मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। लेकिन पंडित प्रशांत मिश्रा जी बताते हैं कि कभी भी गायत्री मंत्र का जाप बिना गुरु दीक्षा के नहीं करना चाहिए और इसे हमेशा मौन जप ही करना चाहिए। 

गायत्री जयंती का महत्त्व 

कहा जाता है कि माता गायत्री लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती तीनों का अवतार हैं इसलिए उनका पूजन करने से सभी देवियों के पूजन के बराबर फल प्राप्त होता है। मां गायत्री अच्‍छे और बुरे का ज्ञान करवाती हैंऔर सत्य के मार्ग पर बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। मां गायत्री की उपासना करने वाले व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और उनके भक्त  को कभी भी किसी वस्तु की कमी नहीं होती है। कहा जाता है कि नियमित रूप से घर में गायत्री मंत्र का जाप करने से कीर्ति, धन, यश आदि का फल प्राप्त होता है और मां गायत्री स्वयं अपने भक्तों के चारों और रक्षा कवच बनाकर विपत्ति के समय उनकी रक्षा करती है। 

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