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Ganesha Puja 2022: क्यों भगवान गणेश को भी लेना पड़ा था 'विनायकी' अवतार?

क्या आपको पता है कि भगवान गणेश ने एक स्त्री के रूप में भी अवतार लिया था। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि इसके पीछे क्या कारण था। 
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Published -07 Sep 2022, 20:09 ISTUpdated -08 Sep 2022, 00:50 IST
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GANESH VINAYAKI ROOP

भगवान गणेश जी की पूजा हर घर में करी जाती है। गणेश जी को बुद्धि और समृद्धि का देवता माना जाता है। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि भगवान गणेश ने एक स्त्री रूप भी लिया था।  

इसके बारे में पौराणिक कथा भी है। गणेश जी के स्त्री अवतार को विनायकी,  गणेशानी, गणेश्वरी, गजमुखी और भी कई सारे नामों से जाना जाता है। 

देवी विनायकी का मंदिर कहां- कहां स्थित है?

GANESH VINAYAKI AVATAR

आपको बता दें कि पुराणों में मादा हाथियों के समूह का नेतृत्व करने वाली देवी विनायकी का जिक्र मिलता है। ऐसा माना जाता है कि यह देवी एक पवित्र स्त्री शक्ति का रूप है।

राजस्थान के रैरह में भी देवी विनायकी की एक मूर्ति मिली थी। आपको बता दें कि वह मूर्ति 5वीं शताब्दी से भी काफी पहले की है। यही नहीं देवी विनायकी का एक चित्र ओडिशा के हीरापुर में एक मंदिर में भी है। इस मंदिर में देवी विनायकी 64 योगिनियों में से एक है। (सभी बाधाओं को दूर करेंगे हनुमान जी, बस इन मंत्रों का करें जाप)

इन सभी मंदिरों के साथ-साथ तमिलनाडु के कन्याकुमारी में थानुमलायन मंदिर भी है जो 1300 साल पुराने है। इस मंदिर में भी एक देवी विनायकी की मूर्ति है। बता दें कि इस मूर्ति में देवी के चार दिव्य हाथों में कई शस्त्र भी हैं। इसके अलावा इस मूर्ति का चेहरा भगवान गणेश जी जैसा लगता है। आपको बता दें भारत के अलावा तिब्बत में भी गणेश जी के स्त्री रूप की पूजा होती है। तिब्बत में गणेश जी के स्त्री रूप को गणेशानी कहा जाता और उनकी पूजा की जाती है।

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भगवान गणेश के 'विनायकी' अवतार की कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार अंधक नाम का एक राक्षस था जो माता पार्वती को अपनी पत्नी बनाना चाहता था। उस वक्त भगवान शिव जी ने उस पर हमला किया था मगर जैसे ही अंधक के खून की बूंद जमीन पर गिरी तो हर जगह एक नई राक्षसी शक्ति उत्पन्न होने लगी।

अंधक का खून जमीन पर गिरते ही अंधक की संख्या बढ़ती गई। माता पार्वती को तब यह समझ में आया कि हर प्राणी में उसकी अवस्था के विपरीत भी एक ताकत होती है। यानी कि हर पुरुष में ताकत के अलावा एक स्त्री की शक्ति भी है जो करुणा और क्रोध दोनों ही है। देवी का मानना था कि अंधक ने इस बात को सिद्ध किया था और अपनी ताकत का गलत उपयोग करने लगा था।

फिर उन्होंने हर देवता की स्त्री शक्ति को पुकारा। उसके बाद विष्णु जी की कृपा से शिव जी की शिवानी नामक देवी, ब्रह्मा जी की ब्राह्मी देवी और वीरभद्र से  देवी भद्रकाली उत्पन्न हुई थी।

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आपको बता दें कि देवी दुर्गा अपने दस रूपों में असुर के सामने आ गई थी। इन सभी ने मिलकर सभी अंधक की राक्षसी शक्तियों को मार गिराया था लेकिन अंधक का रक्त बहना बंद नहीं हुआ था। फिर भगवान गणेश जी अपने स्त्री अवतार के रूप में आए और अंधक के साथ युद्ध करने के लिए तैयार हो गए। उन्होंने अपनी सूंड़ से अंधक का सारा रक्त एक बार में खींच लिया था और रक्त की एक बूंद को भी जमीन पर गिरने नहीं दिया था। इस तरह अंधक का अंत हुआ और गणेश जी के विनायकी अवतार का जन्म हुआ।

 

इसलिए भगवान गणेश जी की स्त्री के रूप में पूजा की जाती है। 

 

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