हिंदू धर्म में प्रत्येक तिथि का अलग महत्त्व है। ऐसी ही तिथियों में से एक तिथि है त्रयोदशी तिथि, इसका हिंदुओं में विशिष्ट महत्त्व बताया गया है। इस तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है और यह तिथि पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित होती है। प्रत्येक माह के दोनों पक्षों यानी कि कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस प्रकार महीने में दो और साल में 24 त्रयोदशी तिथियां होती हैं।

प्रदोष व्रत में भक्त जन भगवान शिव की सच्चे ह्रदय से पूजा करते हैं और ऐसा करने से उनकी मनोकामनाओं की पूर्ति होने के साथ समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। आइए विश्व के जाने माने ज्योतिर्विद पं रमेश भोजराज द्विवेदी जी से जानें जुलाई यानी कि आषाढ़ के महीने में  कब है पहला प्रदोष व्रत, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका महत्त्व।

जुलाई प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त

shubh muhurat pradosh

  • जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत 07 जुलाई 2021, दिन बुधवार को रखा जाएगा।
  • आषाढ़ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि आरंभ- 07 जुलाई 2021, दिन बुधवार, रात्रि 01 बजकर 02 मिनट से
  • आषाढ़ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि समाप्त- 08 जुलाई 2021, दिन बृहस्पतिवार, रात्रि 03 बजकर 20 मिनट तक
  • त्रयोदशी तिथि में प्रदोष काल 07 जुलाई 2021 को प्राप्त हो रहा है। इसलिए इसी दिन प्रदोष व्रत करना शुभ होगा।

जुलाई प्रदोष व्रत का महत्त्व

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पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी जी के अनुसार प्रदोष व्रत करने से आशुतोष भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। भगवान शिव जो आयुष्य और आरोग्यता के दाता हैं उनकी कृपा से व्यक्ति दीर्घायु तथा आरोग्य वान होता है। अतः पूरी भक्ति और नियम के साथ प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति दीर्घजीवी होता है। प्रत्येक प्रदोष व्रत का महत्त्व उसके दिन के आधार पर बढ़ जाता है। जैसे सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष, शनिवार के व्रत को शनि प्रदोष  कहा जाता है। इसी क्रम में बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में बुध प्रदोष का विशेष महत्त्व बताया गया है। इस दिन भगवान शिव का माता पार्वती समेत पूजन करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहले आरंभ हो जाता है। यदि इस मुहूर्त में शिव पूजन किया जाता है तो ये कई तरह के दोषों से मुक्ति दिलाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन शिव पूजन करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होने के साथ स्त्रियों का सौभाग्य लंबे समय तक बना रहता है।  

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कैसे करें प्रदोष व्रत में शिव पूजन

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  • शास्त्रों के अनुसार प्रदोष के दिन भगवान शिव का मां पार्वती के साथ पूजन करने का विधान है।
  • इस दिन प्रातः जल्दी उठाकर स्नान ध्यान से मुक्त होकर भगवान शिव का पूजन करें।
  • पूरे दिन फलाहार का पालन करते हुए व्रत करें और प्रदोष काल में फिर से शिव पूजन करें।
  • पूजन के समय एक साफ़ चौकी पर साफ़ वस्त्र बिछाएं और शिव परिवार की मूर्ति या शिवलिंग चौकी पर रखें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती को जलाभिषेक कराएं और धूप, दीप तथा फूल अर्पित करें।
  • भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग पर चन्दन लगाएं और को बेलपत्र अर्पित करें।
  • माता पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग का सामान अर्पित करें।
  • सुहागिन स्त्रियों को पूजन करते समय सोलह श्रृंगार करने चाहिए। इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • पूजन के दौरान प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें। शिव जी की आरती करें और भोग अर्पित करें।
  • सभी को भोग वितरित करके स्वयं भी ग्रहण करें।

इस प्रकार प्रदोष काल में शिव पूजन करने से कई तरह के विकारों से मुक्ति मिलती है और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।

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