Film Review: एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा फिल्म कैसी है

By Inna Khosla01 Feb 2019, 19:34 IST

फिल्म एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा जैसा कि आप सब फिल्म का ट्रेलर देखकर ही समझ गये थे कि फिल्म की कहानी हीरो और हीरोइन की लव स्टोरी नहीं बल्कि हीरोइन और हीरोइन की लव स्टोरी है। तो ऐसे में सवाल ये था कि फिर फिल्म में राजकुमार राव क्या कर रहे हैं। फिल्म की कहानी में ऐसा क्या खास है कि इसे देखने के लिए सिनेमाघरों में जाया जाए। 

वैसे आपको फिल्म का रिव्यू देने से पहले मैं ये बात जरुर कहना चाहूंगी कि फिल्म देखने जा रहे हैं तो आप दीमाग के साथ नहीं बल्कि दिल के साथ इस फिल्म को देखें। और फिल्म पसंद ना आए तो अंडे और टमाटर आप राइटर और डायरेक्ट को ही मारे, वैसे ये बात नहीं बल्कि एक डायलॉग है जिसे आप फिल्म में राजकुमार राव को कहते हुए सुनेंगें।

खैर फिल्म की कहानी शुरु होती है एक फेमस प्रोड्यूसर के स्ट्रगलिंग बेटे से जो अच्छा राइटर और डायरेक्टर बनना चाहता है और इंडस्ट्री में अपने पापा का नाम इस्तेमाल किये बिना अपनी पहचान बनना चाहता है और इस बेटे का किरदार निभा रहे हैं एक्टर राजकुमार राव जिनका नाम फिल्म में साहिल मिर्जा है। 

साहिल मिर्जा के करेक्टर के बाद फिल्म में एंट्री होती है छत्रो की जो हैं जूही चावला। जूही चावला फिल्म में एक केटरर के रोल में हैं जो फिल्म के सेट पर लोगों को खाना देती हैं और ये मानती हैं कि वो माइंड शटरिंग टेलेंटिड एक्टर हैं।

साहिल मिर्जा के प्ले कि रिहर्सल चल ही रही होती है कि भागते हुए एंट्री होती है सोनम कपूर की जो छुपने की कोशिश करती हैं और किसी से भाग रही होती हैं.... राजकुमार राव से उनकी मुलाकात तो एक्सीडेंटल होती है लेकिन उनके करेक्टर साहिल मिर्जा को सोनम यानि की स्वीटी चौधरी को देखते ही कुछ कुछ होने लगता है।

स्वीटी बिना ये जाने प्ले की रिहर्सल देखते हुए राइटर कमी गिनवा देती है और मानती है कि कोई भी लवस्टोरी बिना स्यापे के सुपरहिट नहीं होती।

जी हां स्यापा ये वर्ड इस फिल्म की कहानी को बयां करता है।

पंजाब के छोटे से शहर मोगा में रहने वाली स्वीटी चौधरी दिल्ली में जिससे भाग रही होती है वो उसका भाई ही होता है। 

स्वीटी अपने भाई के साथ वापस लौट जाती है और साहिल मिर्जा के दिल में ये बात घर कर जाती है कि उनकी स्टोरी स्यापे के बिना सुपरहिट नहीं होगी। इसलिए वो भी मोगा स्वीटी की तलाश में पहुंच जाते हैं। अनिल कपूर फिल्म में बलबीर चौधरी का रोल प्ले कर रहे हैं जो स्वीटी के पापा हैं और भले ही वो मोगा के सबसे बड़े बिज़नेसमैन हों लेकिन वो असल में शेफ बनना चाहते हैं जो बन नहीं पाते।

सोनम का भाई जानता है कि उसकी बहन लड़की से प्यार करती हैं और वो नॉर्मल नहीं हैं जिसे वो छुपाने के लिए मुस्लिम लड़के साहिल मिर्जा से ही उसकी शादी करवाना चाहता है। 

कहानी अच्छी है स्वीटी साहिल मिर्जा को पसंद होती है। साहिल मिर्जा से शादी करवाने के लिए घर वाले मान भी जाते हैं लेकिन कहानी में ट्वीस्ट आता है जब स्वीटी साहिल को बताती है कि वो लड़की से प्यार करती है।

उसे लगता है कि साहिल मिर्जा अब उसे छोड़कर चला जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं होता। फिल्म की कहानी में इमोशनल ट्वीस्ट आता है स्वीटी साहिल मिर्जा से शादी करने के लिए राज़ी भी हो जाती है। अब स्वीटी लड़की से प्यार करने के बावजूद साहिल मिर्जा से शादी के लिए राज़ी हो जाती है। साहिल मिर्जा ये जानने के बावजूद कि स्वीटी लड़की से प्यार करती है वो उससे शादी के लिए राज़ी हो जाती है। लेकिन ऐसा होता है क्या कहानी में आगे और क्या होता है... क्या स्वीटी चौधरी साहिल मिर्जा से शादी कर लेती हैं या भाग जाती है या परिवार वाले मान जाते हैं या फिर कुछ और ही हो जाता है ये सब जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

फिल्म की कहानी में वैसे एक भी सरप्राइज़िंग फेक्टर नहीं है आपको स्लो इमोशन्स में कहानी आगे बढ़ती हुई लगेगी हंसी मज़ाक वाले अच्छे सीन हैं इमोशनल फीलिंग भी है लास्ट में लेकिन जो मैने शुरु में कहा है वो एक बार फिर कहूंगी कि आप फिल्म देखने जा रहे हैं तो दीमाग लगाकर फिल्म ना देखे दिल से फिल्म देखे और फिल्म पसंद ना आए तो राइटर और डायरेक्टर हो अंडे टमाटर मारें वैसे ऐसी नौबत आएगी नहीं फिल्म में सभी आर्टिस्ट की परफोर्मेंस बेहद शानदार है। तो आप चाहें तो एक बार ये फिल्म देखने जरुर जा सकते हैं।