हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 14 हो जाती है। सभी पूर्णिमा तिथियों में से कार्तिक पूर्णिमा का अलग महत्त्व है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस बार कार्तिक मास की पूर्णिमा 30 नवंबर को मनाई जाएगी। श्रद्धालु कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर गंगा स्नान करते हैं और दान पुण्य करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही गुरुनानक जयंती भी मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार कार्तिक माह भगवान विष्णु को बहुत पसंद है और इस पूरे महीने में विष्णु जी का पूजन किया जाता है। खासतौर पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु जी का माता लक्ष्मी समेत पूजन किया जाता है। कुछ स्थानों पर कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है। आइए जानें कि कार्तिक पूर्णिमा पर दान-स्नान का क्या महत्व होता है, इसका शुभ मुहूर्त क्या है?

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

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कार्तिक पूर्णिमा के दिन मुख्य रूप से भगवान् विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। इस दिन गंगा स्नान का बहुत महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होता है और सौ पुण्यों के बराबर फल प्राप्त होता है। लोग इस दिन गंगा स्नान (कार्तिक पूर्णिमा के दिन इन जगहों पर करें स्नान ) करने के बाद दान पुण्य करते हैं। कार्तिक मास की पूर्णिमा पर दान करने का भी विशेष महत्व है। इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से सारे पापों का नाश होता है, इसीलिए इस दिन गंगा स्नान करने हजारों भक्तों की भीड़ इकठ्ठा होती है। कार्तिक पूर्णिमा दिवाली के 15 दिनों के बाद होती है और ऐसी मान्यता है कि इस दिन सभी देवता दिवाली मनाते हैं, इसीलिए इसे देव दिवाली भी कहा जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीप दान भी किया जाता है। 

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क्यों मनाई जाती है देव दिवाली 

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पौराणिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के कुछ दिन पहले देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु 4 महीने की निद्रा से जागते हैं और उनके जागने की खुशी में सभी देवता स्वर्ग से उतरकर बनारस के घाटों पर दीपों का उत्सव मनाते हैं। इसीलिए इसे देव दिवाली (दिवाली से जुड़ी कुछ ख़ास बातें ) भी कहा जाता है। मान्यता यह भी है कि दीपावली पर माता लक्ष्मी अपने प्रभु भगवान विष्णु से पहले जाग जाती हैं, इसलिए दीपावली के 15वें दिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताओं की दीपावली मनाई जाती है। देव दिवाली भगवान शिव की नगरी काशी में मुख्य रूप से मनाई जाती है। बनारस के घाटों को दीये की रोशनी से रौशन किया जाता है और धूम-धाम से ये पर्व मनाया जाता है। 

पंडित जी के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा की तिथि और मुहूर्त

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कार्तिक पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में अयोध्या के पंडित श्री राधे शरण शास्त्री जी का कहना है कि कार्तिक पूर्णिमा का आरंभ 29 नवंबर 2020 को रात 12 बजकर 47 मिनट से हो रहा है और कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर 2020 को रात 02 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। 29 नवंबर की रात्रि में पूर्णिमा तिथि लगने के कारण और उदया तिथि के अनुसार मुख्य रूप से 30 नवंबर को पूर्णिमा तिथि मनाई जाएगी। गंगा स्नान और दान-पुण्य भी 30 नवंबर को ही करना लाभकारी होगा। 

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कार्तिक पूर्णिमा के दिन पूरे श्रद्धा भाव से विष्णु जी का माता लक्ष्मी सहित पूजन करें व स्नान दान करें, जीवन में खुशहाली आएगी। 

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Image Credit: pintrest