भारतीय रेलवे ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम को खास तरीके से श्रद्धांजलि दी है। बेंगलुरु के यशवंतपुर रेलवे स्टेशन पर उनकी खूबसूरत और ऊंची प्रतिमा बनाई गई है, जो ट्रेन से आने-जाने वाले यात्री देख सकेंगे। यशवंतपुर कोचिंग डिपो में डॉ. कलाम की 7.8 फुट ऊंची प्रतिमा लगाई गई है, जिसे रेलवे के इंजीनियरों ने डेढ़ महीने में बनाकर तैयार किया है। भारतीय रेलवे ने डॉ. कलाम की प्रतिमा की तस्वीरें ट्विटर अकाउंट पर शेयर की हैं।

ट्विटर पर तस्वीर शेयर करते हुए बताया कि डॉ कलाम की प्रतिमा को बनाने के लिए कबाड़ की चीजों का इस्तेमाल किया गया है। 7.8 फीट ऊंची और 800 किलोग्राम का भारी ढांचा पूरी तरह से स्क्रैप मैटेरियल से बना है जैसे बोल्ट, नट्स, वायर रोप्स, साबुन कंटेनर, और डैम्पर पीस से बना है जो रेलवे के उपयोग के लायक नहीं थीं।

यात्रियों का ध्यान आकर्षित करेगी ये प्रतिमा

statue of abdul kalam

भारतीय रेलवे(रेलवे के पांच नियम) द्वारा शेयर तस्वीर के अनुसार डॉ. कलाम  की ये प्रतिमा गोल्डन कलाकृति से बनाई गई है और यह रेलवे ट्रैक के बीच की खाली जगह पर स्थापित की गई है। खास बात है कि यशवंतपुर रेलवे स्टेशन से करीबन 200 लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनें गुजरती रहती हैं, ऐसे में यह प्रतिमा आने-जाने वाले लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करेगी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की इस प्रतिमा को बनाने के लिए सबसे पहले मिट्टी से मॉडल तैयार किया गया, जिसके बाद एक प्लास्टिक ऑफ पेरिस मोल्ड बनाया गया था। जिसके बाद नट, बोल्ट और अन्य बेकार की चीजों को जोड़कर इस प्रतिमा को तैयार किया गया है।

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डॉ. कलाम की मूर्ति की पेंटिंग


यशवंतपुर के सीनियर कोचिंग डिपो अधिकारी विकास गुरवानी ने नेटवर्क18 को बताया कि 'मिसाइल मैन' सभी इंजीनियरों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम की इस प्रतिमा को सेक्शन इंजीनियर सीपी श्रीधर और श्रीनिवास राजू के नेतृत्व में इन हाउस टीम ने स्क्रैप मैटेरियल से तैयार किया है। खास बात है कि इस प्रतिमा की पेंटिंग के लिए सिर्फ 3,000 रुपये ही खर्च किए गए हैं।

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27 जुलाई को देश मनाएगा 6वीं पुण्यतिथि

Dr apj abdul kalam

27 जुलाई को पूरा देश अपने चहेते राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की 6वीं पुण्यतिथि मनाएगा। एक साधारण से परिवार में जन्में डॉ कलाम काफी मेहनती और मुश्किलों का सामना करने वाले व्यक्ति माने जाते थे। बचपन में वह ट्रेन से अखबार उतारने का काम करते थे। पोखरण परमाणु परीक्षण में डॉ. कलाम ने अहम भूमिका निभाई थी। डॉ कलाम अग्नि और पृथ्वी मिसाइल्स के विकास और संचालन के प्रमुख रहे थे, यही वजह है कि उन्हें 'मिसाइल मैन' भी कहा जाता है। अपने काम और बातों से लोगों का दिल जीतने वाले कलाम कई लोगों की प्रेरणा हैं, वह अपनी जिंदगी के अनोखे किस्सों से आज भी लोगों को प्रभावित करते हैं।

भारतीय रेलवे द्वारा डॉ. कलाम की ये प्रतिमा बेहद खूबसूरत है। साथ ही, अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें और इसी तरह अन्य खबरों के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।