'सॉरी डाइनिंग टेबल पर सबके साथ मैं खाना नहीं खा पाऊंगा। मुझे बेड पर ही खाना दे दो मैं काम करते हुए खाना खा लूंगा।'

'मुझे बहुत काम है और मुझे लगता है कि शायद मैं बर्थडे पार्टी में आने में लेट हो जाऊंगा।' 

'12 बज गये तो क्या हुआ तुम क्यों मुझे बार-बार जल्दी सोने के लिए टोकती हो, तुम्हें बता चुका हूं कि मुझे नींद नहीं आती। तुम सो जाओ, मैं स्मार्टफोन पर एक अच्छी फिल्म देख रहा हूं।'

'तुम अक्सर ही फोन पर बिजी रहते हो। क्या तुम्हें मुझसे बात करने और मेरे साथ थोड़ा क्वालिटी टाइम बिताने में कोई दिलचस्पी नहीं है।'

'तुम रात-रातभर फोन पर बिजी रहते हो, क्या तुम्हें कोई और अच्छा लगने लगा है?'

'मैं सुबह-सुबह तुम्हारे साथ वर्कआउट कैसे कर सकता हूं। तुम्हें पता ही है कि मुझे रात में जल्दी नींद नहीं आती। इसीलिए मैं फोन पर सर्फिंग करता रहता हूं।'

ऐसे संवाद अक्सर हर घर में सुनने को मिल जाते हैं। गैजेट्स के बढ़ते इस्तेमाल से रिलेशनशिप पर कितना गहरा असर हो रहा है, इसके बारे में बता रहीं हैं क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर रजत ठुकराल

महिलाएं भी स्मार्टफोन पर रहती हैं बिजी

यह भी सच है कि पुरुष ही नहीं महिलाएं भी स्मार्टफोन पर काफी ज्यादा वक्त बिताती हैं। व्यक्तिगत तौर पर बात की जाए तो अपने स्मार्टफोन्स में हम अक्सर नई-नई चीजों को देखकर काफी एक्साइटेड हो जाती हैं। देश-दुनिया की हर हलचल की खबर हमें पलक झपकते ही मिल जाती है। एक क्लिक पर हम अपने चहेतों से वर्चुअली कनेक्ट हो जाते हैं। अपने दोस्तों और near and dear ones से हम घंटों whatsapp पर चर्चा में मशगूल रहते हैं। सोशल मीडिया ग्रुप्स पर भी हम कई तरह की चर्चाओं में मसरूफ रहते हैं। अपने स्मार्टफोन्स पर अक्सर हम इतने व्यस्त होते हैं कि अपने आसपास की दुनिया से हम एक तरह से बेखबर हो जाते हैं। अपने पार्टनर के साथ के साथ हम कितना क्वालिटी समय बिता रहे हैं, इस बारे में हम गंभीरता से सोचते ही नहीं। इस बात पर भी ध्यान कम जाता है कि रिश्ते में समझ बेहतर करने के लिए एक दूसरे को वक्त देना कितना अहम होता है। 

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ताजा अध्ययन में भी कही गई है रिश्तों पर असर पड़ने की बात

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एएनआई की एक ताजा स्टडी के अनुसार कपल्स के लिए एक दूसरे से कम्यूनिकेट करने और साथ जुड़ने रहने के लिए डिवाइस का इस्तेमाल बहुत आम बात हो गई है। Kaspersky Lab की इस स्टडी में 55 फीसदी कपल्स ने डिवाइसेस के overuse की बात कही। इस स्टडी में कहा गया कि ज्यादातर लोग अपने परिवार और दोस्तों से कनेक्टेड रहने के लिए डिवाइसेस पर निर्भर रहते हैं और यही बात रिलेशनशिप में भी लागू होती है। 

क्या है असली चुनौती

हम सामाजिक प्राणी हैं। एक दूसरे से बातचीत करना, अपनी फीलिंग्श शेयर करना हम सभी की जरूरत है। हमारी जरूरतें भी बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं और ग्लोबलाइजेशन के समय में हम सबकुछ फटाफट चाहते हैं, जो पूरी तरह से संभव नहीं है। इस कारण हम संतुष्ट नहीं होते। सोशल मीडिया के जरिए हम जिस तरह कनेक्शन विकसित कर रहे हैं, वह बहुत सतही है। आजकल हम क्या सोचते हैं, क्या महसूस करते हैं, उसे हम सांकेतिक पिक्स के जरिए शेयर करते हैं, यहां तक कि बर्थडे पर भी हम मैसेज व्हाट्सएप पर डाल देते हैं। हम इतनी भी जेहमत नहीं उठाते कि अपनी जिंदगी में खास जगह रखने वालों को हम अपनी आवाज में मैसेज पहुंचाएं। हम लोगों से कनेक्टेड तो हैं लेकिन हमारी बॉन्डिंग नहीं बन पा रही, क्योंकि उसके लिए हमें जितना ध्यान देने की जरूरत होती है, उसका हम नहीं दे पाते। 

कैसे विकसित होती है इनसिक्योरिटी की फीलिंग

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अपनी रिलेशनशिप्स में सही मायने में नहीं जुड़ पाने के कारण हम अकेला महसूस करने लगती हैं। हमें लगता है कि हम पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। दूसरी तरफ हमारा धैर्य जवाब देने लगता है और हम घर के लोगों की बात भी नहीं सुनना चाहते। और इन दूरियों के पनपने की बड़ी वजह गैजेट्स भी हैं। फोन पर व्यस्त रहते हुए रिश्तों पर से हमारा ध्यान हट जाता है। फोन और दूसरे गैजेट्स हमें हमारे इमोशन से दूर कर रहे हैं, हम यह भी नहीं समझ पा रहे कि अपनी फीलिंग्स को कैसे शेयर करें। गैजेट्स के इस्तेमाल का कपल्स पर काफी असर पड़ता है। पति-पत्नी या रोमांटिक पार्टनर्स के बीच रिश्ते अच्छे हों, इसके लिए काफी समय साथ बिताने की जरूरत होती है। रोमांस में जब समय बीतता है, लंबी बातचीत होती है, तभी एक दूसरे के साथ अच्छी समझ विकसित होती है। लेकिन गैजेट्स के बढ़ने इस्तेमाल की वजह से पार्टनर के साथ बातचीत भी बहुत हद तक सतही होती जा रही है। बहुत वक्त तक साथ रहने के बावजूद बहुत से जोड़ों में यह चीज देखने को मिलती है कि वे बातचीत के पहले चरण पर ही हैं। इन्हीं वजहों से रिश्तों में इनसिक्योरिटी बढ़ती है और महिलाओं में यह भावना विकसित होने लगती है कि मेरा पति या मेरा साथी मुझमें दिलचस्पी नहीं ले रहा, मैं उसे एक्साइट नहीं कर पा रही। यहां यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि आवश्यकता से अधिक काम करना भी रिश्तों से ध्यान हटाने जैसा ही है। इसीलिए इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि कहीं प्रोफेशनल लाइफ पर्सनल लाइफ पर हावी तो नहीं होती जा रही।

एक बेहतर शुरुआत इस तरह करें

अगर आप चाहती हैं कि पर्सनल लाइफ में रिश्ते बेहतर हों तो गैजेट्स के इस्तेमाल में आपको संयम बरतने की जरूरत है। काम से वापस आने पर आप इस बात पर ध्यान दें कि आपको घर पर भी समय देना जरूरी है। घर पर ज्यादातर फोन पर रहना, सोशल मीडिया पर लग जाना, बच्चे से बात नहीं करना, यह सबकुछ आपकी रिलेशनशिप के लिए लंबे समय में मुश्किलें बढ़ा सकता है। ऐसे में आपको कॉन्शसली घर के लिए समय देने की जरूरत है, आपको घर पर क्वांटिटी नहीं, क्वालिटी टाइम देने की जरूत है। घर पर आपकी कई तरह की बातचीत हो सकती है, बस एक बार उन सभी पहलुओं के बारे में सोचकर देखिए और खुलकर बात करिए। जब पार्टनर से आपकी बात हो, तो उन पर यकीन करना भी सीखिए। 

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  • Saudamini Pandey
  • Her Zindagi Editorial