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    Chhath Puja 2022:जानिए क्या होता है कोसी भराई परंपरा का महत्व?

    इस लेख में हम आपको बताएंगे कि छठ पूजा पर कोसी भराई परंपरा का महत्व।
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    Updated at - 2022-10-09,03:02 IST
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    what is the significance of chhath pujan

    हमारे देश में कई तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। छठ पूजा भी उनमें से एक है आपको बता दें कि हिन्दू कैलेंडर के अनुसार दिवाली के छठवें दिन कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा के रूप में मनाया जाता है।ऐसा माना जाता है कि  जो भी पति-पत्नी पूरे श्रद्धा भाव से छठ माता का पूजन करते हैं उनका स्वास्थ्य ठीक बना रहता है और निःसंतान दम्पत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। छठ पूजा में मुख्य रूप से तीन दिनों के लिए मनाया जाता है जिसमें नहाय खाय, खरना और संध्या अर्घ्य प्रमुख हैं।

    आपको बता दें कि इस पूजा को विधि-विधान के साथ किया जाता है आपको बता दें कि इस पूजा में कोसी भराई का भी विशेष महत्व होता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कोसी भराई पूजा का क्या महत्व होता है। 

    क्या होता है 'कोसी पूजन' या 'कोसी भरना' ?

    kosi pujan in chhath puja

    ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा पर कोसी भरने की परंपरा करने से व्रत रखने वाली महिलाओं को और उनके परिवार को सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। आपको बता दें कि छठ पूजा में कोसी भरने को एक विधि के अनुसार करते हैं। मान्यताओं के अनुसार छठ व्रत करने वाले पति-पत्नी की अगर कोई मांगी हुई मनोकामना पूर्ण होती है तो इसकी खुशी में वह कोसी भरते हैं।

    कोसी भरने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम और विधियां होती हैं और माना जाता है कि इस विधि को सही तरह से करने पर माता प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को उनकी इच्छा के अनुसार फल देती हैं। 

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    क्या होती है कोसी भराई की विधि?

    आपको बता दें कि संध्या सूर्य को अर्घ्य देकर लोग अपने-अपने घर में या छत पर कोसी भरने की परंपरा निभाते हैं। इसके लिए सबसे पहले मिट्टी के हाथी को सिंदूर लगाया जाता है। कुछ लोग 12 दीपक जलाते हैं या फिर 24 दीपक भी जलाते हैं। फिर कलश में मौसमी फल और ठेकुआ, सुथनी और अदरक आदि के साथ सारी सामग्री रखी जाती है।

    इसके बाद कोसी पर दीपक जलाया जाता है। इसके बाद कोसी में दीपक जलाया जाता है। इसके बाद कोसी के चारों तरफ सूर्य को अर्घ्य देने वाली सामग्री से भरी सूप, डलिया और मिट्टी के ढक्कन में तांबे के पात्र को रखकर फिर दीपक जलाते हैं। आपको बता दें कि इसके बाद हवन की प्रक्रिया भी की जाती है।

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    इसके बाद छठी मइया की पूजा की जाती है। इसके बाद इसी विधि के साथ अगले दिन की सुबह को कोसी भरी जाती है जो घाट पर होती है। जब यह विधि की जाती है तो महिलाएं लोक गीत भी गाती हैं और अंत में मनोकामना पूर्ण होने के लिए छठी मइया को और सूर्य देव को मन से आभार व्यक्त करती हैं।

    आपको बता दें कि कोसी भरने की विधि जो सभी परिवार के लोग करते हैं उनके परिवार के सदस्य रतजगा यानी रात भर जगते हैं और महिलाएं छठी मइया के गीत भी गाती हैं। 

    तो यह थी छठ पूजा से जुड़ी हुई एक पवित्र परंपरा के बारे में जानकारी। 

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    image credit-flickr 

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