साल भर के इंतजार के बाद एक बार फिर चैत्र नवरात्रि आरंभ होने वाली हैं। 25 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत है। हिंदुओं में चैत्र नवरात्रि का उतना ही महत्‍व है जितना कि शारदिय नवरात्रि का है। चैत्र माह में आने वाली नवरात्रि हिंदुओं के लिए नव वर्ष की शुरुआत होती है। इस दौरान नौ दिन देवी दुर्गा का वर्त रखा जाता है। दुर्गा जी के नौ स्‍वरूपों की अलग-अलग दिन पर पूजा की जाती है। कई लोग चैत्र नवरात्रि पर पूरे नौ दिन का उपवास भी रखते हैं और घर में कलश स्‍थापना करते हैं।

कलश स्‍थापना अमूमन वही लोग करते हैं जो लोग देवी जी का व्रत रखते हैं। चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन रामनवमी का त्‍योहार मनाया जाता है। इस दिन विष्‍णु के छठे अवतार भगवान श्री राम का जन्‍मदिन होता है। चलिए उज्‍जैन के ज्‍योतिषाचार्य पंडित कैलाश नरायण शर्मा से जानते हैं कि इस बार कलश स्‍थापना का शुभ मुहूर्त क्‍या है? और पूजा करने की सही विधि क्‍या है? 

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चैत्र नवरात्रि घटस्थापना/कलश स्‍थापना मुहूर्त 

 25,  मार्च ,बुधवार ,2020   

शुभ मुहूर्त -06 :17 से 07:16 ( इस वर्ष 24 मार्च को दोपहर 2 बजे तक अमावस्‍या रहेगी। मगर, कलश स्‍थापना करने का अपने शुभ मुहूर्त यही है।)

समय अवधि -59  मिनट

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ -24 मार्च 2020 को 14:57 बजे

प्रतिपदा तिथि समाप्त -25 मार्च 2020 को 17:26  बजे

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किस दिन होगी किस देवी की पूजा 

25 मार्च- मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इसी दिन कलश स्‍थापना भी होगी।  साथ ही हिंदू नव वर्ष की शुरुआत भी होगी ।

26 मार्च-मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

27 मार्च-मां चंद्रघंटा की पूजा

28 मार्च-मां कुष्मांडा की पूजा

29 मार्च-मां स्कंदमाता की पूजा

30 मार्च -मां कात्यायनी की पूजा

31 मार्च-मां कालरात्रि की पूजा

01 अप्रैल-मां महागौरी की पूजा

02 अप्रैल-मां सिद्धिदात्रि की पूजा 

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कैसे करें कलश स्‍थापना 

सुबह उठ कर सबसे पहले नित्‍य कर्म करें और स्‍नान करने के बाद देवी की तस्‍वीर या मूर्ती को एक साफ सुथरे स्‍थान पर स्‍थापित करें। जहों पर आपने देवी की तस्‍वीर स्‍थापित की है वहीं पर मृत्तिका की वेदी बनाएं। अब एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी या बालू डालें। फिर उसमें जवारे के बीज डाल दें। इस बात का ध्‍यान रखें ध्यान रहे इन बीजों को पात्र में इस तरह से लगाएं की उगने पर यह ऊपर की तरफ उगें। यानी बीजों को खड़ी अवस्था में लगायें और ऊपर वाली लेयर में बीज अवश्य डालें। अब मिट्टी का कलश लें। कलश की गर्दन पर मौली बांधें और स्वास्तिक चिन्ह बनाएं। इसके बाद कलश में गंगा जल भर दें। इस जल में सुपारी, इत्र, दूर्वा घास, अक्षत और सिक्का भी दाल दें। अब इस कलश के किनारों पर 5 अशोक के पत्ते रखें और कलश को ढक्कन से ढक दें। नवरात्रि व्रत रखने के हैं ये 5 फायदे, स्किन करती है ग्लो और वेट तेजी से होता है कम

अब एक नारियल लें और उसे लाल कपड़े या  चुन्नी में लपेट लें। इसमें कुछ पैसे भी रखें। इसके बाद इस नारियल को रक्षा सूत्र से बांध दें। जब यह तीनों चीजें तैयार हो जाएं तो सबसे पहले आपकेा जौ वाला पात्र रखना है। उसके उपर मिट्टी का कलश रखना है और कलश पर ढक्‍कन रख कर नारियल रखना है। इस तरह कलश स्‍थापना पूरी होती है। इसके बाद भगवान श्री गणेश जी का पूजन करें। इसके बाद अपनी कुल देवी का पूजन करें। कुल देवी का पूजन अमूमन लोग करना भूल जाते हैं। मगर पंडित कैलाश नारायण शर्मा कहते हैं, 'पहले अपनी मां की पूजा करों और फिर देवी दुर्गा की। तब ही पूजा सफल होती है। ' नौ देवियों को ये 9 भोग लगाएं, बीमारियों को दूर भगाएं और धन की वर्षा पाएं

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इसके साथ ही इस मंत्र का उच्‍चारण करें- 'मम महामायाभगवती  वा मायाधिपति भगवत  प्रीतये  आयुर्बलवित्तारोयसमादरादिप्राप्तये वा  नवरात्रव्रतमहं करिष्ये ।' अब आप व्रत करने का संकल्‍प करें।  बहुत सारे लोग पूरे 9 दिन का व्रत रखते हैं। कुछ लोग सप्‍तमी को कन्‍या भोज कर उन्‍हें पूजते हैं और फिर अष्‍टमी को अपना व्रत खोल लेते हैं वहीं कुछ लोग अष्‍टमी के दिन कन्‍या भोज करते हैं और नवमी के दिन उपवास खोलते हैं। आपको भी पहले दिन यह संकल्‍प लेना होगा कि आप कितने दिन देवी का उपवास रखेंगे। ध्‍यान रखें कि आपको सुबह और शाम दो वक्‍त खेत्री में पानी डालते रहना है। 

नवरात्रि का व्रत स्त्री हो या पुरुष दोनों को रखना चाहिए। जो व्‍यक्ति कलश की स्‍थापना कर रहा है उसे तो यह व्रत जरूर रखना चाहिए। यदि आप में नौ दिन देवी का उपवास रखने का सामर्थ नहीं है तो आपको पहले और आखिरी दिन उपवास जरूर रखना चाहिए। नवरात्रि व्रत का मतलब दिन-भर खाते रहना नहीं

 Image Credit: jagranjunction/sriramwallpapers