हिन्दू धर्म के अनुसार प्रदोष व्रत का विशेष महत्त्व है। मान्यता है कि जो स्त्री या पुरुष ये व्रत पूरे नियम से करता है उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार महीने में दो प्रदोष व्रत होते हैं, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में होता है। फरवरी माह में प्रदोष व्रत दो बार पड़ेगा जिसमें से पहला 9 फरवरी को और दूसरा 24 फरवरी को मनाया जाएगा। इन दोनों में से पहला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष है जिसका विशेष महत्त्व है। आइए जानें भौम प्रदोष व्रत की कथा, पूजा विधि और सम्पूर्ण कथा। 

भौम प्रदोष की तिथि

shiv pujan 

प्रदोष व्रत चंद्र पखवाड़े के 13 वें दिन मनाया जाता है। इस दिन, भगवान शिव के भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को प्रदोष काल के दौरान पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त इस दिन उपवास रखते हैं, वे सभी पापों से मुक्त हो सकते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जब प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, जब यह मंगलवार को पड़ता है तब इसे भौम प्रदोष और शनिवार को पड़ने वाले व्रत को शनि प्रदोष कहा जाता है। इस बार प्रदोष व्रत 9 फरवरी को होगा और मंगलवार होने की वजह से यह भौम प्रदोष होगा जिसका बहुत अधिक महत्त्व है। 

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पूजा का शुभ मुहूर्त 

अयोध्या के पंडित श्री राधे शरण शास्त्री जी के अनुसार त्रयोदशी तिथि, माघ कृष्ण पक्ष 9 फरवरी को सुबह 3:19 बजे शुरू होगी और 10 फरवरी को 2:05 बजे समाप्त होगी। इसलिए पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 6:07 बजे से रात 8:42 बजे के बीच है और इसी समय पूजन करना लाभकारी होगा। 

पूजा और व्रत के नियम 

vrat niyam

मान्यतानुसार प्रदोष व्रत की पूजा सुबह और शाम, दोनों समय में की जाती है। लेकिन प्रदोष काल में इस पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव का श्रद्धा भाव से पूजन करने से भगवान प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि प्रदोष व्रत विधि पूर्वक करने से और शिव का पूजन करने से घर के सभी कलह क्लेश दूर होते हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। जानें क्या हैं पूजा के नियम -

  • प्रदोष व्रत वाले दिन साफ़ मन से प्रातः प्रथम स्नादि करके शिव जी का पूजन करें। 
  • शिव जी को जल एवं दूध से स्नान कराएं और धूप दीप प्रज्ज्वलित करें। '
  • प्रदोष काल में सफ़ेद वस्त्र धारण करके भोग तैयार करें एवं प्रदोष की कथा पढ़ें और दूसरों को सुनाएं। 
  • कथा के समापन पर शिव जी की आरती करके भोग अर्पित करें और प्रसाद सभी को वितरित करें। 
  • यदि आप व्रत कर रही हैं तो इस दिन प्रातः काल से शाम तक अनाज और नमक का सेवन न करें। 
  • पूरे दिन फलाहर व्रत रखने के बाद शाम को अनाज का सेवन किया जा सकता है लेकिन नमक का सेवन न करें। 
  • कहा जाता है कि इस व्रत को नियम पूर्वक करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है। 

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प्रदोष व्रत का महत्व

पुराणों के अनुसार, यह माना जाता है कि प्रदोष वाले दिन भगवान शिव ने असुरों से देव लोक को छुटकारा दिलाया था। भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के अलावा, भक्त मोक्ष प्राप्त करने के लिए भी इस दिन उपवास करते हैं। प्रदोष व्रत रखने और नियमपूर्वक शिव पूजा करने से दांपत्य जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। संतान की इच्छा रखने वाले दम्पत्तियों की ये इच्छा पूर्ण होती है और घर में सुख शांति बनी रहती है। 

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भौम प्रदोष की कथा 

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भौम प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार एक नगर में एक बुजुर्ग महिला रहती थी उसका एक ही पुत्र था। वृद्धा की हनुमानजी पर गहरी आस्था थी। वह प्रत्येक मंगलवार को नियमपूर्वक व्रत रखकर हनुमानजी की आराधना करती थी। एक बार हनुमानजी ने उसकी श्रद्धा की परीक्षा लेने के लिए साधु का वेश धारण किया और वृद्धा के घर गए और पुकारने लगे- है कोई हनुमान भक्त, जो हमारी इच्छा पूर्ण करे? पुकार सुन वृद्धा बाहर आई और बोली- आज्ञा महाराज। वेशधारी साधु बोले- मैं भूखा हूं, भोजन करूंगा, तू थोड़ी जमीन लीप दे। वृद्धा दुविधा में पड़ गई। अंतत: हाथ जोड़कर बोली- महाराज। लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त आप कोई दूसरी आज्ञा दें, मैं अवश्य पूर्ण करूंगी। साधु ने तीन बार प्रतिज्ञा कराने के बाद कहा- तू अपने बेटे को बुला। मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा। यह सुनकर वृद्धा घबरा गई, परंतु वह प्रतिज्ञाबद्ध थी।

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वृद्धा ने अपने पुत्र को बुलाकर साधु के सुपुर्द कर दिया। वेशधारी साधु हनुमानजी ने वृद्धा के हाथों से ही उसके पुत्र को पेट के बल लेटाकर उसकी पीठ पर अग्नि प्रज्ज्वलित कर दी। आग जलाकर दु:खी मन से वृद्धा अपने घर में चली गई। इधर भोजन बनाकर साधु ने वृद्धा को बुलाकर कहा- तुम अपने पुत्र को पुकारो ताकि वह भी आकर भोग लगा ले। इस पर वृद्धा बोली- उसका नाम लेकर मुझे और कष्ट न पहुंचाओ। लेकिन जब साधु महाराज नहीं माने तो वृद्धा ने अपने पुत्र को आवाज लगाई। अपने पुत्र को जीवित देख वृद्धा को बहुत आश्चर्य हुआ और वह साधु के चरणों में गिर पड़ी। हनुमानजी अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुए और वृद्धा को भक्ति का आशीर्वाद दिया। चूंकि हनुमान जी को शिव जी का अवतार ही माना जाता है। तभी से भौम प्रदोष व्रत की विशेष मान्यता है। 

जो भी व्यक्ति प्रदोष व्रत वाले दिन श्रद्धा भाव से पूजन करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit: pintrest