माना जाता है कि एक बेटी सबसे ज्यादा अपनी मां के ही करीब होती है, लेकिन उसका अपने पिता से भी उतना ही गहरा रिश्ता होता है। उपर से सख्त दिखने वाला पिता अपनी बेटी को जीवन के किसी भी मुश्किल हालात का डटकर सामना करना सिखाता है। हर बेटी के लिए उसका पहला आदर्श, उसका पहला हीरो उसका पिता ही होता है, जो हर विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी बेटी की हर छोटी से छोटी जरूरत को पूरा करने की कोशिश करता है। एक पिता ही होता है, जो अपनी बेटी का अंगुली पकड़कर चलना सिखाता है, गिरने पर उसे खुद उठने का हौसला देता है। एक पिता अपनी बेटी के सपनों को पंख देता है और जब कभी वह निराश होती है तो कहता है कि तुम चिंता मत करो, मैं हूं ना। बाप बेटी के इस अनूठे रिश्ते और उनकी आपसी बॉन्डिंग की झलक आम जिन्दगी में तो देखने को मिलती है ही, लेकिन कई फिल्मों में भी इस बॉन्डिंग को बेहतरीन तरीके से उतारा गया है। तो चलिए आज ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में जानते हैं-

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दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे

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दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे फिल्म में चौधरी बलदेव सिंह का किरदार निभाने वाले अमरीश पुरी ने फिल्म में एक पारंपरिक और ईश्वरवादी भगवान में आस्था रखने वाले व्यक्ति थे। बाहर से अपने परिवार को अनुशासन में रखने वाले कठोर बलदेव सिंह अपनी दोनों बेटियों से बेहद प्यार करते हैं और बेटियों के प्रति उनका यह प्रेम फिल्म में कई जगह नजर आता है। खासतौर से, फिल्म की शुरूआत में जब वह काजल को पूरी दुनिया घूमने की इजाजत देते हैं और फिल्म के लास्ट सीन में भी उनके मन की कोमलता नजर आती है। इस सीन में जहां वह अपनी बेटी को उस आदमी के साथ जाने देते है जिसे वह प्यार करती है। कौन सी लड़की ऐसा पिता नहीं चाहेगी? हालाँकि उन्हें पूरी फिल्म में सख्त दिखाया गया है, लेकिन उनका गुस्सा उनकी बेटी के प्यार के सामने पिघल गया।

पीकू

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साल 2015 में आई फिल्म पीकू में अमिताभ बच्चन और दीपिका पादुकोण ने पिता-पुत्री की भूमिका निभाई थी। यह पूरी फिल्म ही पिता और बेटी के खट्टे मीठे रिश्ते पर आधारित थी। फिल्म में बड़े मजेदार तरीके से दिखाया गया था कि जो पिता सारी उम्र अपने बच्चों का ध्यान रखता है, वह उम्र बढ़ने के बाद अपनी जरूरतों के लिए बच्चों पर निर्भर हो जाता है। फिल्म में दीपिका भी अपना सारा शेड्यूल अपने पिता के अनुसार ही बनाती है। फिल्म में वे दोनों कई बार बहस करते हैं, झगड़ते हैं व लड़ाई भी करते हैं, लेकिन इन सबके बावजूद भी उनका आपसी प्रेम कम नहीं होता। फिल्म के आखिरी सीन में अपने पिता की मृत्यु के बाद पीकू उन्हें बहुत मिस करती है।

चाची 420

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साल 1997 में आई फिल्म चाची 420 में तलाक के बाद, उनकी बेटी की कस्टडी मां (तब्बू द्वारा अभिनीत) को दी जाती है, लेकिन पिता (कमल हसन) अपनी बेटी से दूर नहीं रह पाते। फिर, कमल हसन एक महिला के रूप में कपड़े पहनने का फैसला करती है और अपनी पूर्व पत्नी के घर पर नानी की नौकरी करती है, ताकि वह अपनी लड़की के साथ कुछ समय बिता सके। इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक पिता अपनी बेटी और उसकी खुशियों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है।

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फन्ने खां

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अनिल कपूर की अभिनीत फिल्म फन्ने खां में भी एक पिता के जीवन के संघर्ष को बखूबी दिखाया गया है। फिल्म में मध्यमवर्गीय पुरुष फन्ने खान (अनिल कपूर)  अपनी बेटी (पीहू संद)  के सपनों को पूरा करने की ख्वाहिश में जी तोड़ मेहनत करता है। फन्ने खान उसे विभिन्न गायन प्रतियोगिता में ले जाता है, लेकिन उसकी बेटी अपने बढ़े वजन के कारण हंसी का पात्र बनती है। फिल्म में कई बार उसकी बेटी अपनी झुंझलाहट अपने पिता पर निकालती है, लेकिन फिर भी वह बुरा नहीं मानता। अंत में फन्ने खां अपनी बेटी को स्टार बनाने की चाहत में मशहूर सिंगर बेबी (ऐश्वर्या राय बच्चन) को किडनैप कर लेता है।